नगर निगम यूनियन चुनाव : यही रात अंतिम, यही रात भारी . . . पर्दादारी से पहरेदारी तक, रात में जागते रहे दोनों पैनल के प्रत्याशी और करीबी समर्थक

– अंतिम रात की निर्णायक जंग, मतदाता बनेंगे भाग्यविधाता शुक्रवार को होगा किस्मत का फैसला
– गाजियाबाद नगर निगम कर्मचारी यूनियन चुनाव में दोनों पैनल में हाई-वोल्टेज मुकाबला
– नतीजों पर टिकी निगाहें, घोड़ा चुनाव चिन्ह बनाम शेर चुनाव चिन्ह के बीच है मुकाबला

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। यही रात अंतिम यही रात भारी, बस एक रात की अब कहानी है सारी। गाजियाबाद नगर निगम कर्मचारी यूनियन चुनाव के परिणाम का सारा दारोमदार आज की रात पर टिका है। शुक्रवार सुबह 9 बजे मतदान शुरू हो जाएगा और दोपहर में मतों की गणना होगी। ऐसे में यूनियन चुनाव में डटे दोनों पैनल रात में अंतिम व्यूह रचना कर रहे हैं। बृहस्पतिवार रात की पर्दादारी से पहरेदारी तक बस एक ही है कहानी। यानी पैनल दो हैं लेकिन काम एक ही कर रहे हैं। अपने पक्ष में आये समर्थकों को अंतिम समय तक पक्ष में रखने के लिए पहरेदारी कर रहे हैं वहीं, विपक्षी खेमे के मतदाता को अपने पक्ष में लाने के लिए पर्दादारी के जरिये दांव चला रहा है। किसी भी रण में जीत के चार नियम हैं साम, दाम, दंड, भेद। साम यानी अपनी बातों से विपक्ष को मनाना, दाम यानी उपहार या लुभावने चीज के जरिये पक्ष में करना, दंड यानी बलप्रयोग या धमकी देकर पक्ष में लाना, भेद यानी फूट और विभाजन पैदा करके अपने लक्ष्य को प्राप्त करना। यूनियन चुनाव में दंड को छोड़ कर तीनों नियम को पूरजोर तरीके से अपनाया गया है। ऐसे में अब सभी को शुक्रवार का इंतजार है।

गाजियाबाद नगर निगम कर्मचारी यूनियन चुनाव इस बार किसी साधारण प्रक्रिया की तरह नहीं, बल्कि एक रोमांचक संघर्ष में तब्दील हो गया है। गुरुवार शाम जैसे ही आधिकारिक तौर पर चुनाव प्रचार थमा, वैसे ही दोनों पैनलों के प्रत्याशी और उनके समर्थकों ने अंतिम जंग छेड़ दी। यह रात मानो निर्णायक साबित होने वाली है। कहीं पदार्दारी में बैठकर गुप्त रणनीतियाँ तैयार की जा रही थीं तो कहीं पहरेदारी के बीच प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ चर्चा कर रहे थे। शुक्रवार सुबह नौ बजे से मतदान शुरू होगा और दोपहर बाद मतगणना की प्रक्रिया आरंभ होगी। शाम तक यह स्पष्ट हो जाएगा कि गाजियाबाद नगर निगम कर्मचारी यूनियन की कमान किसके हाथ में जाएगी। कर्मचारियों की निगाहें इस चुनाव पर इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि यह केवल एक अध्यक्ष और कार्यकारिणी का चुनाव नहीं है, बल्कि यूनियन की नीतियों और भविष्य की दिशा तय करने वाला फैसला है। आने वाले तीन वर्षों तक कर्मचारियों की आवाज और उनके मुद्दे उसी पैनल के हाथों से उठेंगे जिसे आज बहुमत मिलेगा।

इस चुनावी रणभूमि में दो पैनल आमने-सामने हैं। एक ओर निवर्तमान अध्यक्ष रविंद्र कुमार का पैनल है जो घोड़ा चुनाव चिन्ह के प्रतीक पर मैदान में है। रविंद्र कुमार ने पिछले कार्यकाल में यूनियन की बागडोर संभाली और इस बार भी वे अपने अनुभव और कार्यकाल की उपलब्धियों को भुनाने में जुटे हैं। दूसरी ओर अनुराग नागर का पैनल है, जो शेर के चुनाव चिन्ह के साथ ताल ठोक रहें है। अनुराग नागर ने इस बार पूरी ताकत झोंक दी है।

अनुराग नागर

अनुराग नागर का कहना है कि नगर निगम का सबसे खराब कार्यकाल पिछले यूनियन का रहा है। काठ की हांडी बार-बार चुल्हे पर नहीं चढ़ सकती है। ऐसे में इस बार बदलाव को कोई रोक नहीं सकता है। रविंद्र कुमार का दावा है कि इस बार घोड़ा चुनाव चिन्ह वाला पैनल ही जीतेगा।

रविंद्र कुमार

रविंद्र कुमार का कहना है कि निगम के चुनिंदा बाबू यूनियन को अपने हाथों की कठपूतली बनाकर रखना चाहते हैं। ये बाबू अनुराग नागर के शेर चुनाव चिन्ह वाले पैनल के समर्थक हैं। जबकि घोड़ा चुनाव चिन्ह वाले पैनल को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी, माली, बाबू सहित सभी जोन के कर्मचारियों का साथ मिल रहा है।

महेंद्र प्रताप मोंटी

महामंत्री पद के दावेदार महेंद्र प्रताप मोंटी का कहना है कि शेर पैनल जीतेगा और यूनियन कर्मचारियों के हित में अधिक से अधिक काम करेगा। कर्मचारियों को हॉस्पिटल में कैशलेस चिकित्सा की सुविधा मिले। यह हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। जीत तय है, पैनल को भरपूर समर्थन मिल रहा है। कर्मचारी जानते हैं जिन्होंने पहले काम नहीं किया वह अब क्या काम करेंगे।

कुलदीप शर्मा

घोड़ा चिन्ह वाले पैनल से महामंत्री पद के दावेदार कुलदीप शर्मा का कहना है कि कर्मचारियों के हित में काम करने के लिए पद से जरूरी इच्छाशक्ति है। मैंने सभी को दिखा दिया है कि खुद के हित के बजाय कर्मचारियों के हित में किस तरह काम किया जाता है। कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा मिले इस दिशा में काम शुरू हो गया है और जीत के बाद कर्मचारियों को एक और बड़ी खुशखबरी मिलेगी। रविंद्र कुमार पैनल के पक्ष में कर्मचारी चुनाव लड़ रहे हैं और वह जीतेंगे।

रविंद्र कुमार पैनल से उपाध्यक्ष पद के प्रत्याशी संजय शर्मा ने जीत का दावा करते हुए कहा कि नगर निगम में जोड़ तोड़ कर फूट डालने वाले मठाधीशों की इस बार दाल नहीं गलेगी। चुनाव का मुकाबला घोड़ा चुनाव चिन्ह वाले पैनल के पक्ष में है और परिणाम भी हमारे ही पक्ष में होगा।

अनुराग नागर पैनल से उपाध्यक्ष पद प्रत्याशी मयूर गिरधर का कहना है कि कर्मचारी किसके साथ है यह साफ दिखाई दे रहा है। जो लोग कर्मचारियों को बड़गलाने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें इस बार जोरदार करंट लगेगा। शेर चुनाव चिन्ह वाले पैनल की जीत पक्की है।

विदित हो कि गुरुवार की रात दोनों खेमों में गहमागहमी का माहौल रहा। देर रात तक प्रत्याशी अपने-अपने गुटों के बीच डटे रहे। कहीं फोन कॉल्स के जरिए वोटरों को साधा गया, कहीं गुप्त मुलाकातों के जरिए पक्के समर्थकों को भरोसा दिलाया गया। यहां तक कि कुछ स्थानों पर प्रत्याशी खुद अपने समर्थकों के घर-घर पहुंचे और उन्हें मतदान केंद्र तक आने के लिए प्रेरित किया। यह माहौल किसी आम चुनाव से कम नहीं था। जिस तरह राजनीतिक चुनावों में मतदान से पहले अंतिम रात में रणनीतियाँ बनती हैं, उसी तरह नगर निगम यूनियन चुनाव में भी गुरुवार की रात उत्साह और तनाव दोनों का मिला-जुला रूप देखने को मिला।

शुक्रवार यानि आज का दिन निर्णायक साबित होने वाला है। नगर निगम के कर्मचारी सुबह से ही मतदान केंद्रों पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराएंगे। नगर निगम प्रशासन ने भी पूरी तैयारी कर ली है ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्वक संपन्न हो सके। कर्मचारियों का कहना है कि परिणाम बहुत ही नजदीकी रहेंगे और मामूली अंतर से भी हार-जीत तय हो सकती है। यही वजह है कि दोनों पैनलों के प्रत्याशी और समर्थक रातभर सो नहीं सके और हर संभव प्रयास करते रहे कि किसी भी तरह वोटरों का रुख अपने पक्ष में कर लिया जाए।