लेखक : तरुण मिश्र
(समाजसेवी एवं राजनीतिक चिंतक हैं। राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लिखते हैं। देश-विदेश में आयोजित होने वाले व्याख्यानों में एक प्रखर वक्ता के रूप में जाने जाते हैं। जनसेवक के रुप में प्रख्यात है।)
भारत में रेलवे की शुरुआत अंग्रेजों ने 172 साल पहले की थी, लेकिन पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम की राजधानी आइजोल अब तक भारतीय रेलवे नेटवर्क से वंचित रही थी। 13 सितंबर 2025 का दिन मिजोरमवासियों के लिए ऐतिहासिक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बइरबी-सैरांग ब्रॉड गेज रेलवे लाइन का उद्घाटन किया। इस परियोजना की कुल लागत 8070 करोड़ रुपये से अधिक है और इसके लागू होने के साथ ही मिजोरमवासियों को अपने राज्य में आधुनिक रेलवे सुविधा मिलने लगी है। इस नई रेल लाइन की शुरुआत मिजोरमवासियों के लिए किसी सोने पर सुहागा से कम नहीं है। इससे पहले उन्हें ट्रेन यात्रा के लिए असम के सिलचर तक लंबा सफर करना पड़ता था। अब आइजोल सीधे भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ गया है, जो क्षेत्र के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
बइरबी-सैरांग रेलवे लाइन परियोजना को अत्यंत चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाके में विकसित किया गया। इसमें कुल 45 सुरंगों का निर्माण किया गया, जो जटिल भूवैज्ञानिक परिस्थितियों के बीच बनाई गईं। इसके अलावा, परियोजना में 55 बड़े पुल और 88 छोटे पुल बनाए गए, जिनमें से एक पुल दिल्ली के कुतुब मीनार से भी ऊंचा है।
यह परियोजना न केवल इंजीनियरिंग दृष्टि से अद्वितीय है, बल्कि मिजोरमवासियों की यात्रा और कनेक्टिविटी की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में रेलवे की यह सुविधा न केवल यातायात को आसान बनाएगी, बल्कि ग्रामीण और दुर्गम इलाकों में रोजगार, स्वास्थ्य, शिक्षा और वाणिज्यिक गतिविधियों के लिए नई राह खोलेगी। रेलवे परियोजना के तहत बनाए गए पुल और सुरंगें तकनीकी और इंजीनियरिंग दृष्टि से देश में अब तक की सबसे चुनौतीपूर्ण संरचनाओं में शामिल हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस परियोजना का उद्घाटन करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों को भारत के मुख्य रेलवे नेटवर्क से जोडऩा विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि दुर्गम से सुगम तक का यह सफर उनकी दूरदर्शिता और केंद्र सरकार की नीति का परिणाम है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी और नीचे तबके मजदूर तक बधाई के पात्र है, जिन्होंने इस परियोजना में अपना योगदान दिया है।
मिजोरमवासियों के लिए यह रेल सेवा उनकी यात्रा की कठिनाइयों को दूर करेगी और आर्थिक व सामाजिक विकास को बढ़ावा देगी। मालगाड़ी सेवाएं तुरंत शुरू होंगी और रविवार से तीन यात्री ट्रेनें परिचालित होंगी। दिल्ली के लिए राजधानी एक्सप्रेस, कोलकाता के लिए ट्राई-वीकली एक्सप्रेस और गुवाहाटी के लिए मिजोरम एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें पहले दिन से ही सेवाओं में शामिल होंगी। बइरबी-सैरांग ब्रॉड गेज रेलवे लाइन की लंबाई 51.38 किलोमीटर है। यह आइजोल को असम के सिलचर और फिर पूरे देश से जोड़ती है। राजधानी एक्सप्रेस 2,510 किलोमीटर की दूरी 43 घंटे 25 मिनट में तय करेगी और इसकी औसत गति 57.81 किलोमीटर प्रति घंटे होगी। इस परियोजना के शुरू होने के साथ ही मिजोरमवासियों को अब राष्ट्रीय स्तर पर जुड़े रेल नेटवर्क का लाभ मिलेगा।
पूर्वोत्तर राज्यों के लिए यह कनेक्टिविटी और बेहतर रोजगार, व्यापार और सामाजिक समृद्धि के नए द्वार खोलेगी। इस परियोजना से मिजोरम में केवल यात्रियों की सुविधा नहीं बढ़ेगी, बल्कि व्यापार, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में भी विकास की गति तेज होगी। क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर मालगाड़ी सेवाओं के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। स्थानीय उत्पादक, छोटे व्यापारी और पर्यटन उद्योग अब आसानी से पूरे देश से जुड़ पाएंगे। यह परियोजना पूर्वोत्तर राज्यों में सड़क और रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने की केंद्र सरकार की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को मजबूती प्रदान करती है। रेलवे परियोजना से न केवल राजधानी आइजोल बल्कि आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोज़गार के अवसर बढ़ेंगे। लोगों की जीवनशैली में सुधार और सामाजिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा। बैरबी-सैरांग रेलवे लाइन को अत्यंत चुनौतीपूर्ण पहाड़ी इलाके में तैयार किया गया। 45 सुरंगों, 55 बड़े और 88 छोटे पुलों के निर्माण ने इस परियोजना को तकनीकी दृष्टि से अद्वितीय बना दिया। इन संरचनाओं में भूगर्भीय और भौगोलिक बाधाओं को पार कर निर्माण किया गया। एक पुल दिल्ली के कुतुब मीनार से ऊंचा है, जो परियोजना की विशालता और तकनीकी महत्व को दर्शाता है। यह परियोजना भविष्य में अन्य दुर्गम क्षेत्रों में रेलवे परियोजनाओं के लिए मार्गदर्शक भी सिद्ध होगी।
रेलवे परियोजना की इंजीनियरिंग क्षमता और तकनीकी उत्कृष्टता इस क्षेत्र के लिए एक उदाहरण है। परियोजना में शामिल श्रमिक, तकनीकी कर्मचारी और अधिकारी सभी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के साक्षी हैं। मिजोरमवासियों के लिए यह परियोजना केवल यात्रा की सुविधा नहीं है, बल्कि उनके जीवन और क्षेत्रीय विकास में नई राह खोलने वाली है। आइजोल के नागरिक अब अपने राज्य में ही ट्रेन यात्रा का लाभ उठा सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यह परियोजना भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के विकास में मील का पत्थर साबित होगी। इस रेल परियोजना से सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक दृष्टि से क्षेत्र को नई पहचान मिलेगी। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे और केंद्र सरकार की दूरदर्शिता ने साबित किया कि दुर्गम इलाकों को भी मुख्य राष्ट्रीय नेटवर्क से जोडऩा संभव है। यह परियोजना मिजोरमवासियों के लिए गर्व का विषय बन चुकी है। बैरबी-सैरांग ब्रॉड गेज रेलवे लाइन की कुल लागत 8,213.72 करोड़ रुपये है। परियोजना का निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ और 10 वर्षों की कड़ी मेहनत और चुनौतीपूर्ण भूगोल के बावजूद इसे 2025 में पूरा किया गया।
प्रधानमंत्री मोदी ने 2014 में इस परियोजना की आधारशिला रखी थी। 10 साल की अवधि में तकनीकी, प्रशासनिक और निर्माण संबंधी सभी चुनौतियों को पार कर इसे पूर्ण किया गया। रेलवे परियोजना का उद्देश्य केवल आइजोल को जोडऩा नहीं है। भविष्य में मिजोरम और पूर्वोत्तर क्षेत्र में नई रेलवे लाइनें बनाई जाएंगी। मालगाड़ी और यात्री सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। यह परियोजना शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव लाएगी। ग्रामीण क्षेत्रों में कनेक्टिविटी से बच्चों की स्कूल यात्रा आसान होगी और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच तेज होगी। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और केंद्र सरकार की नीति पूर्वोत्तर एकीकृत विकास इस परियोजना में स्पष्ट रूप से झलकती है। दुर्गम से सुगम तक का यह सफर साबित करता है कि मोदी है तो सब मुमकिन है। मिजोरमवासियों के लिए यह परियोजना न केवल यात्रा की सुविधा है बल्कि उनके जीवन में नई दिशा, रोजगार और आर्थिक अवसर लेकर आई है। यह रेलवे परियोजना आने वाली पीढिय़ों के लिए भी प्रेरणा बनेगी और भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र के विकास में एक स्थायी योगदान देगी।

















