गाजियाबाद में शिक्षक संघ ने उठाई आवाज: टीईटी अनिवार्यता से मिले राहत

– सांसद, कैबिनेट मंत्री और विधायकों से की मुलाकात, ज्ञापन सौंपा
– कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने दिया आश्वासन, मुख्यमंत्री के सामने उठाएँगे मुद्दा
– विधायक अजीतपाल त्यागी ने लिखा मुख्यमंत्री को पत्र, संजीव शर्मा और एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा भी आए आगे

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। देशभर के सेवारत शिक्षकों पर मंडरा रहे संकट को लेकर शिक्षक संघ ने बड़ा मोर्चा खोला है। संघ के प्रतिनिधि मंडल ने रविवार को सांसद, कैबिनेट मंत्री और विधायकों से भेंट कर ज्ञापन सौंपा और मांग की कि शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता से सेवा में कार्यरत शिक्षकों को मुक्त किया जाए। दरअसल, सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में निर्णय दिया है कि देश के सभी प्राथमिक शिक्षक यदि सेवा में बने रहना चाहते हैं तो उन्हें दो वर्षों के भीतर टीईटी परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। निर्णय के मुताबिक, जो शिक्षक इस अवधि में परीक्षा पास नहीं कर पाएंगे उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। केवल उन्हीं शिक्षकों को छूट दी गई है जिनकी सेवा अवधि 5 वर्ष से कम बची है, लेकिन उन्हें भी पदोन्नति के लिए यह परीक्षा पास करनी होगी। इस आदेश ने लाखों शिक्षकों की नींद उड़ा दी है। विशेषकर वे शिक्षक, जो शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 लागू होने से पहले नियुक्त हुए थे, उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति सेवा नियमावली के अनुरूप है, इसलिए उनके लिए टीईटी की शर्त लागू नहीं होनी चाहिए। शिक्षक संघ के प्रतिनिधि मंडल ने शनिवार को गाजियाबाद के कई बड़े नेताओं से मुलाकात की।

सांसद अतुल गर्ग ने प्रतिनिधियों को भरोसा दिया कि आपकी समस्याओं को संसद में पूरी ताकत से रखा जाएगा। कैबिनेट मंत्री सुनील शर्मा ने कहा कि वह इस मुद्दे को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाएंगे और सकारात्मक समाधान की कोशिश करेंगे। मुरादनगर विधायक अजीतपाल त्यागी ने शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता दिखाते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भी लिखा। वहीं, गाजियाबाद शहर विधायक संजीव शर्मा और एमएलसी श्रीचंद्र शर्मा ने भी आश्वासन दिया कि वे इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के समक्ष उठाएँगे और शिक्षकों के पक्ष में खड़े रहेंगे। संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी ने कहा कि टीईटी परीक्षा केवल नियुक्ति के समय की पात्रता जांचने के लिए थी, न कि सेवा में लगे शिक्षकों की योग्यता परखने के लिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त सभी शिक्षक शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले अपनी नियुक्ति सेवा नियमावली के अनुसार पाए हैं। ऐसे में उनकी योग्यता को बदलना न्यायसंगत नहीं है।

जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा ने कहा कि सरकार को इस मामले पर सहानुभूति और व्यवहारिकता के साथ विचार करना चाहिए। लाखों शिक्षकों का भविष्य अधर में है, इसलिए अधिनियम में आवश्यक संशोधन कर उन्हें राहत दी जानी चाहिए। इस अवसर पर शिक्षक संघ और शैक्षिक महासंघ के कई पदाधिकारी मौजूद रहे। जिलाध्यक्ष रविंद्र राणा, प्रांतीय उपाध्यक्ष डॉ. अनुज त्यागी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदेश मित्तल, ब्लॉक अध्यक्ष लोनी मनोज डागर, रजापुर मनोज त्यागी, भोजपुर पुष्पेंद्र सिंह, मुरादनगर अमित यादव, साथ ही दिनेश कुमार, ओमेंद्र तिवारी, धर्मेश जौहर, रविन्द्र कुमार, संदीप कुमार, प्रमोद कुमार तथा जिला महामंत्री कनक सिंह त्यागी सहित अनेक जनपदीय पदाधिकारी इस मुलाकात में शामिल हुए। शिक्षक संघ का कहना है कि यह मुद्दा केवल गाजियाबाद का नहीं बल्कि पूरे देश के शिक्षकों का है। अगर सरकार ने इस पर समय रहते निर्णय नहीं लिया तो हजारों परिवार प्रभावित होंगे। सांसद, कैबिनेट मंत्री और विधायकों के आश्वासन के बाद शिक्षकों में उम्मीद जगी है कि जल्द ही कोई सकारात्मक कदम उठाया जाएगा और उनकी वर्षों की सेवा का सम्मान बरकरार रहेगा।