दिवाली 2025: पूजा का सही दिन और शुभ मुहूर्त, पं. मनोज कृष्ण शास्त्री ने दिए विशेष मार्गदर्शन

-धनतेरस 18 अक्टूबर को, लक्ष्मी पूजा 20 अक्टूबर को, निशिता काल और प्रदोष काल में पूजा का महत्व

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। दिवाली हिंदू धर्म का एक प्रमुख और अत्यंत आनंदमय त्योहार है, जिसे हर वर्ष कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस वर्ष दिवाली को लेकर अधिकांश लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई थी कि यह पर्व 20 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाए या 21 अक्टूबर, मंगलवार को। इस पर श्री शिव हनुमत धाम कष्ट निवारण धाम के अध्यक्ष पं. मनोज कृष्ण शास्त्री महाराज ने स्पष्ट किया कि कार्तिक मास की अमावस्या तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर 3 बजकर 45 मिनट से आरंभ होकर 21 अक्टूबर को शाम 5 बजकर 55 मिनट पर समाप्त हो रही है। पं. शास्त्री ने कहा कि दीपावली का मुख्य उद्देश्य मां लक्ष्मी की पूजा करना है और घर को दीपों व रंगीन लाइटों से सजाकर सुख-समृद्धि का स्वागत करना है। अमावस्या के दौरान निशिता काल का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है, इसलिए इस वर्ष लक्ष्मी पूजा 20 अक्टूबर, सोमवार को की जाएगी। उन्होंने बताया कि लक्ष्मी पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 6 बजकर 56 मिनट से 8 बजकर 4 मिनट तक रहेगा, जिसकी अवधि 1 घंटा 8 मिनट है। पूजा के समय वृषभ लग्न और कुंभ लग्न का विशेष महत्व है, जो धन, सुख और समृद्धि की प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है।

उन्होंने बताया कि दिवाली के पांच दिवसीय पर्व की शुरुआत धनतेरस से होती है, जो इस वर्ष 18 अक्टूबर, शनिवार को मनाई जाएगी। कार्तिक मास की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर दोपहर 12 बजकर 18 मिनट पर शुरू होकर 19 अक्टूबर को शाम 1 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। इस दिन धनतेरस पर धन-धन्य सामग्री की खरीदारी करने और विधिपूर्वक पूजन करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। पं. शास्त्री ने कहा कि दिवाली पर मां लक्ष्मी के साथ भगवान गणेश और धन के देवता कुबेर की भी पूजा की जाती है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि पूजा के समय प्रदोष काल का पालन करना चाहिए, जो शाम 5 बजकर 33 मिनट से रात 8 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। निशिता काल, जो रात 11:41 से अगले दिन सुबह 12:31 तक रहेगा, में पूजन करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि पूजा सामग्री में शुद्ध और मिलावट रहित वस्तुएं ही उपयोग करें और किसी प्रकार के मिलावटी या नकली उत्पादों का प्रयोग न करें।

अध्यक्ष पं. शास्त्री ने कहा कि दिवाली का पर्व केवल रोशनी और उत्सव का नाम नहीं है, बल्कि यह आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना का प्रतीक भी है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि इस अवसर पर परिवार और समाज में प्रेम, भाईचारा और सहयोग की भावना को बढ़ावा दें। उन्होंने बताया कि दीपावली की खुशियों को सही तरीके से मनाने के लिए मंदिरों और पवित्र स्थलों पर भी विशेष पूजा और आयोजन किए जा रहे हैं, जिनमें श्रद्धालु परिवार सहित भाग ले सकते हैं। पं. शास्त्री ने आगे कहा कि इस वर्ष लक्ष्मी पूजन के शुभ मुहूर्त में विशेष ध्यान देने योग्य हैं – कुंभ लग्न अपराह्न 15:44 से 15:52 तक और वृषभ लग्न संध्या 18:56 से 20:53 तक रहेगा। मध्यरात्रि का सिंह लग्न भी 21 अक्टूबर को सुबह 01:26 से 03:41 तक रहेगा, जिसे ध्यानपूर्वक पूजन में शामिल किया जा सकता है।

इस प्रकार पूजा का समय और विधि निर्धारित होने से श्रद्धालु सही तरीके से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकेंगे। पं. शास्त्री ने लोगों से यह भी आग्रह किया कि दीपावली पर्व को प्रदूषण मुक्त और शांतिपूर्ण बनाने का प्रयास करें। पटाखों का कम से कम प्रयोग करें, घर के आसपास सफाई रखें, और बच्चों व बुजुर्गों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि मां लक्ष्मी की पूजा में ध्यान और भक्ति का होना अत्यंत आवश्यक है, और पूजा विधि का पालन करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है। पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस वर्ष दिवाली का पर्व 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जबकि धनतेरस 18 अक्टूबर और भाई दूज 23 अक्टूबर को पड़ेंगे। पं. मनोज कृष्ण शास्त्री ने सभी नागरिकों से इस पर्व को शांति, समृद्धि और आपसी सौहार्द के साथ मनाने की अपील की।