रोजगार योजनाओं की सफलता पर बैंकों की लापरवाही की मार

गाजियाबाद। जनपद में बैंकों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पाया है। बैंकों की हठधर्मिता के बीच जिले में 668 लाख रुपये की रोजगार योजनाओं पर ग्रहण लग गया है। सरकार रोजगार के लिए लोन देने को तैयार है, मगर बैंक कुंडली मारे बैठे हैं। बिना कारण बताए बैंक बड़ी संख्या में लोन आवेदनों को निरस्त कर रहे हैं। प्रशासन के अधिकारी बैंकों के रवैये से खफा है। कई बार चेतावनी दी जा चुकी है लेकिन समस्या जस की तस है। ऐसे में अब बैंकों के ऊपर कार्रवाई की तैयारी भी की जा रही है। लॉकडाउन के बाद केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान लोगों को रोजगार मुहैया कराने पर रहा। इसके लिए सरकार ने व्यापक लोन देने का आदेश दिया। खासकर स्वयं का कारोबार करने वाले लोगों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए बिना गारंटी लोन मुहैया कराने का भी फैसला लिया। नगर निगम से लेकर अन्य विभागों को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। विभागों ने आवेदन मांगे। उसके बाद पात्र अभ्यर्थियों को शॉर्ट लिस्ट कर सूची बैंकों को भेजी गई। अब बैंकों को जांच के बाद लोन जारी करने थे, लेकिन बैंक करीब पांच माह तक आवेदनों को लटकाए बैठे रहे। प्रशासन सख्त हुआ तो जांच कराई गई लेकिन बड़ी संख्या में आवेदन निरस्त कर दिए गए। चुनिंदा लोगों को पात्र मानकर ऋण दे दिया। जबकि 60 फीसदी आवेदनों पर अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, एक जनपद एक उत्पाद वित्त पोषण योजना और मुख्यमंत्री युवा रोजगार योजना समेत अन्य योजनाओं में पात्रों को लोन बांटने में बैंकों का बेहद ढीला रवैया रहा है।
प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
केंद्र सरकार की इस योजना के तहत उद्योग लगाने के लिए 25 लाख और सेवा क्षेत्र में निवेश करने के लिए दस लाख रुपये तक की सहायता मिलती है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में जिला उद्योग केंद्र द्वारा विभिन्न बैंकों को 466 आवेदन भेजे गए। इसमें से दो दिसंबर तक 67 मंजूर हुए और महज 32 को योजना के तहत ऋण दिया गया। जबकि 288 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। वित्तीय वर्ष के लिए 180 लाख का लक्ष्य जिले को दिया गया था। ओडीओपी के तहत जिले के उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश सरकार ने वित्त पोषण योजना की शुरुआत की। विभिन्न मदों में आवेदक की मदद योजना के तहत की जाती है। इस वित्तीय वर्ष में प्रदेश सरकार की मंशा 300 लाख से जिले में ओडीओपी को बढ़ाने की थी, मगर बैंकों की हीलाहवाली इसमें भी दिखी। योजना के तहत बैंकों को 147 आवेदन भेजे गए। 37 आवेदन मंजूर हुए और 21 को ऋण दिया गया। जबकि 75 आवेदन बैंकों ने रिजेक्ट किए और 35 आवेदन साल खत्म होने तक लंबित हैं। उधर, उपायुक्त उद्योग बीरेंद्र कुमार के मुताबिक तीनों महत्वपूर्ण योजनाओं में सालभर में 881 आवेदनों को बैंकों को भेजा गया, लेकिन महज 86 आवेदकों को ऋण मिल सका। रोजगार के 218 अवसर ऋण का इंतजार कर रहे हैं और 505 रोजगार के आवेदन रिजेक्ट हो चुके हैं। साप्ताहिक और नियमित तौर पर बैंकों को आवेदन प्रेषित किए जाते हैं। कई बार बैठकों के बावजूद बैंकों की और से सकारात्मक परिणाम नहीं मिला।