-धैर्य और सही योजना से निवेशक 2030 तक सेंसेक्स 2,00,000 तक पहुंचने की संभावना में बन सकते हैं सहभागी: रविंद्र तिवारी
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। भारतीय शेयर बाजार में हाल ही में जबरदस्त तेजी देखने को मिली, जहाँ बीएसई सेंसेक्स लगभग 1000 अंक ऊपर बंद हुआ। यह केवल एक दिन की उछाल नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि भारतीय अर्थव्यवस्था और पूंजी बाजार दीर्घकालिक रूप से मजबूत स्थिति में हैं। देश और विदेश के वित्तीय विशेषज्ञ लगातार यह राय दे रहे हैं कि भारत आज दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बाजारों में प्रमुख स्थान पर खड़ा है। आने वाले वर्षों में घरेलू खपत, आधारभूत संरचना में निवेश और युवा आबादी की वजह से आर्थिक विकास और भी तेज़ हो सकता है। वित्तीय सलाहकार रविंद्र तिवारी का मानना है कि यदि मौजूदा गति और नीतिगत स्थिरता जारी रहती है, तो 2030 तक सेंसेक्स के 2,00,000 के स्तर को छूने की पूरी संभावना है। उन्होंने निवेशकों को सीधे कुछ चुनिंदा शेयरों पर दांव लगाने के बजाय बड़े पूंजी वाले, मध्यम पूंजी वाले और छोटे पूंजी वाले पारस्परिक कोष और इक्विटी-आधारित बीमा योजनाओं के माध्यम से विविध और कोष-आधारित पोर्टफोलियो बनाने की सलाह दी।
विशेष रूप से आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल जैसी संस्थाओं की बीमा योजनाएँ निवेशकों को एक ही मंच पर इक्विटी, मिश्रित और ऋण कोष सहित कई विकल्प प्रदान करती हैं। निवेशक अपनी आयु, लक्ष्य और जोखिम सहनशीलता के अनुसार उपयुक्त कोष का चयन कर सकते हैं। रविंद्र तिवारी के अनुसार, पूंजी बाजार में सफलता का मूल मंत्र है लंबी अवधि का दृष्टिकोण और धैर्य। बाजार में गिरावट आने पर घबराने के बजाय इसे निवेश का अवसर मानना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो निवेशक इक्विटी या इक्विटी-आधारित कोष में निवेश करें, उन्हें कम से कम पाँच वर्षों तक निवेश को बनाए रखने की मानसिकता अपनानी चाहिए। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि निवेश के फैसले कभी भी केवल यूट्यूब, सामाजिक मीडिया या दूरदर्शन की सुर्खियों पर आधारित नहीं होने चाहिए।
ये माध्यम केवल जानकारी प्रदान कर सकते हैं, लेकिन प्रत्येक निवेशक की स्थिति, लक्ष्य और जोखिम सहनशीलता अलग होती है। इसलिए सलाह दी जाती है कि निवेशक हमेशा अपने पंजीकृत वित्तीय सलाहकार या बीमा सलाहकार से मिलकर अपनी आवश्यकताओं के अनुसार योजना तैयार करें। रविंद्र तिवारी ने कहा कि सही सलाह, सही समय पर लिया गया निर्णय और सही उत्पाद का चयन-ये तीन मुख्य बातें हैं, जो निवेशकों को 2030 तक भारतीय अर्थव्यवस्था के इस शानदार विकास में बेहतर लाभ दिला सकती हैं। निवेशक यदि इन सिद्धांतों का पालन करें, तो लंबी अवधि में उनकी संपत्ति में स्थिर और लाभकारी वृद्धि संभव है।
















