गाजियाबाद में कमजोर वर्ग के घर रोकने वाले बिल्डरों पर चला जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल का हंटर

-एलआईजी-ईडब्ल्यूएस आवंटियों से खिलवाड़ पर जीरो टॉलरेंस: नंद किशोर कलाल
-हर रोज आने वाली शिकायतों के बाद जीडीए सख्त, एक सप्ताह में रिपोर्ट, कब्जा रोकने वालों पर प्रोजेक्ट रोकने तक की चेतावनी
-एलआईजी-ईडब्ल्यूएस आवंटियों को कब्जा न देने वाले बिल्डरों पर कठोर कार्रवाई की तैयारी, जवाबदेही तय करने को छह सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) अब उन बिल्डरों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने जा रहा है, जो निम्न आय वर्ग (एलआईजी) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के फ्लैटों का कब्जा आवंटियों को समय पर नहीं दे रहे हैं। लगातार बढ़ती शिकायतों के बाद जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने मामले को अत्यंत गंभीर मानते हुए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन कर दिया है, जो इन बिल्डरों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई तय करेगी। जनसुनवाई में प्रतिदिन 5 से 6 शिकायतें ऐसी आ रही थीं जिनमें निजी बिल्डरों पर आरोप था कि उन्होंने एलआईजी/ईडब्ल्यूएस फ्लैटों का निर्माण तो कर दिया, लेकिन आवंटियों को कब्जा देने में अनावश्यक देरी की जा रही है। उपाध्यक्ष के अनुसार यह बेहद चिंताजनक स्थिति है, क्योंकि इन सभी फ्लैटों का आवंटन स्वयं जीडीए द्वारा किया गया है, इसके बावजूद बिल्डर अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहे हैं।

गठित समिति में सचिव राजेश कुमार सिंह को अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अपर सचिव प्रदीप कुमार सिंह, मुख्य नगर नियोजक अरविंद कुमार, संबंधित जोन के प्रवर्तन प्रभारी, विधि अधिकारी शशि भूषण और संबंधित जोन के सहायक अभियंता इसके सदस्य होंगे। इस समिति का मुख्य कार्य ऐसे सभी बिल्डरों की पहचान करना, मामले की गंभीरता का आकलन करना और आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना है। शुक्रवार को सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में हुई महत्वपूर्ण बैठक में सभी जोन के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में उन बिल्डरों की सूची तैयार कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपें, जो कब्जा देने में टालमटोल कर रहे हैं।

सचिव ने स्पष्ट कहा कि इस पूरी प्रक्रिया की कठोर निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी आवंटी को अपने घर के लिए लंबा इंतजार न करना पड़े। जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह ने बताया कि एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के आवंटियों को समय पर मकान का कब्जा मिलना उनका अधिकार है। बिल्डरों की मनमानी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हमने सभी जोनों को निर्देश दिए हैं कि एक सप्ताह के भीतर ऐसे निजी विकासकर्ताओं की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करें जो कब्जा देने में देरी कर रहे हैं। शिकायतों का तेजी से निस्तारण होगा और दोषी पाए जाने पर कड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

मानकों की अनदेखी करने वालों पर होगी कार्रवाई
प्रदेश सरकार के निर्देशों के अनुसार, किसी भी निजी परियोजना में बिल्डरों के लिए एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैटों को समय पर बनाकर आवंटियों को कब्जा देना अनिवार्य है। इसके बावजूद कई बिल्डरों द्वारा लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि उन्होंने आवंटियों को न कब्जा दिया है और न ही कोई ठोस जानकारी प्रदान की है। जीडीए ने स्पष्ट कर दिया है कि अब ऐसे बिल्डरों की न केवल जवाबदेही तय की जाएगी, बल्कि कड़ी कार्रवाई भी की जाएगी। इनमें परियोजना की मंजूरी रोकना, समापन प्रमाणपत्र (कंप्लीशन सर्टिफिकेट) रोकना, आगे की किसी भी प्रशासनिक अनुमति पर रोक, कैसे गंभीर कदम शामिल होंगे।

कमजोर वर्ग के हितों की सुरक्षा जीडीए की प्राथमिकता
एलआईजी और ईडब्ल्यूएस श्रेणी के फ्लैट उन लोगों के लिए बनाए जाते हैं जिनकी आय सीमित होती है और जो लंबे समय तक किराए या महंगाई का बोझ नहीं उठा पाते। ऐसे वर्ग के अधिकारों की रक्षा करना जीडीए की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसलिए इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए अब प्राधिकरण बिल्डरों पर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगा। जीडीए उपाध्यक्ष ने कहा कि शहर में नियोजित विकास, अवैध निर्माण पर नियंत्रण और आम नागरिकों के हितों की रक्षा जीडीए की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

एलआईजी और ईडब्ल्यूएस परियोजनाओं में देरी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। जीडीए उपाध्यक्ष की इस पहल से गाजियाबाद में नियोजित विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है। अब बिल्डरों को यह समझना होगा कि सामाजिक दायित्वों और सरकारी नियमों की उपेक्षा करने पर सख्त दंड का सामना करना पड़ेगा। जीडीए की इस कार्रवाई से आवंटियों में भरोसा बढ़ेगा और आवास योजनाओं में पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।