-जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल से वार्ता के बाद किसानों ने दिया सहयोग का भरोसा, विकास कार्यों में नहीं डालेंगे अड़चन
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की महत्वाकांक्षी मधुबन-बापूधाम आवासीय योजना से प्रभावित किसानों की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं के समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। किसानों की मांगों और आपत्तियों के निस्तारण के लिए जीडीए स्तर पर अधिकारियों की एक समिति का गठन कर दिया गया है। सोमवार को मधुबन-बापूधाम योजना से प्रभावित किसानों के प्रतिनिधिमंडल ने जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल से उनके कार्यालय में मुलाकात कर अपनी समस्याएं विस्तार से रखीं। इस महत्वपूर्ण बैठक में जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह के साथ किसान प्रतिनिधि बॉस चौधरी, जसवीर चौधरी, आशु चौधरी, सुनील शेरावत, भोपाल चौधरी, ब्रह्मपाल शर्मा, डब्बू प्रधान, गौरी शंकर सहित अन्य किसान मौजूद रहे। किसानों ने योजना से जुड़े मुआवजा, पुनर्वास, सुविधाओं और अन्य बिंदुओं को लेकर अपनी आपत्तियां एवं मांगें जीडीए उपाध्यक्ष के समक्ष रखीं और एक मांग पत्र भी सौंपा।
जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने किसानों की बातों को गंभीरता से सुनते हुए सभी समस्याओं के शीघ्र और न्यायसंगत समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्राधिकरण का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करते हुए विकास कार्यों को आगे बढ़ाना है। किसानों के साथ संवाद और समन्वय बनाए रखना जीडीए की प्राथमिकता है।
बैठक के दौरान किसानों ने भी सकारात्मक रुख अपनाते हुए जीडीए उपाध्यक्ष को भरोसा दिलाया कि मधुबन-बापूधाम योजना के तहत कराए जाने वाले विकास कार्यों में वे किसी प्रकार का विरोध या अवरोध नहीं करेंगे। किसानों ने कहा कि वे सौहार्दपूर्ण वातावरण में प्राधिकरण को पूरा सहयोग देंगे, बशर्ते उनकी समस्याओं का समाधान पारदर्शी तरीके से किया जाए।
किसानों की मांगों के परीक्षण और समाधान के लिए जीडीए उपाध्यक्ष ने जीडीए सचिव राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। समिति को निर्देश दिए गए हैं कि वह किसानों द्वारा उठाए गए सभी बिंदुओं का गहन अध्ययन कर जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करे, ताकि समयबद्ध तरीके से समस्याओं का निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके। जीडीए उपाध्यक्ष ने किसानों को आश्वस्त किया कि विकास और किसान हितों के बीच संतुलन बनाते हुए मधुबन-बापूधाम योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। पारदर्शिता, संवाद और सहयोग के माध्यम से इस योजना को सफल बनाने का प्रयास किया जाएगा, जिससे किसानों और शहर दोनों के हित सुरक्षित रह सकें।
















