• माइंड बैटल इंटर स्कूल शतरंज टूर्नामेंट में 171 खिलाडिय़ों ने लिया भाग, अंडर-17 श्रेणी में प्राप्त किया द्वितीय स्थान
• 50 से ज्यादा ट्रॉफियों के साथ बनाई नई पहचान, धुरंधरों के बीच दिखाई परिपक्व खेल समझ
• माता-पिता के संस्कार और गुरु के मार्गदर्शन से हुई बड़ी जीत, हर चाल में सोच, हर जीत में मेहनत और लगन की झलक
• 50 से ज्यादा ट्रॉफियों के साथ बनाई नई पहचान, धुरंधरों के बीच दिखाई परिपक्व खेल समझ
• माता-पिता के संस्कार और गुरु के मार्गदर्शन से हुई बड़ी जीत, हर चाल में सोच, हर जीत में मेहनत और लगन की झलक
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और बौद्धिक क्षमता की परीक्षा है। इस खेल में वही आगे बढ़ता है, जो हर चाल को सोच-समझकर चलता है। गाजियाबाद के एक होनहार किशोर ने इसी बिसात पर अपनी बुद्धि और आत्मविश्वास से बड़े-बड़े धुरंधरों को मात देकर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। डीपीएसजी मेरठ-गाजियाबाद में कक्षा 9वीं के छात्र 15 वर्षीय अक्षित शर्मा आज शतरंज की दुनिया में तेजी से उभरता हुआ नाम बन चुके हैं। अक्षित शर्मा ने न केवल गाजियाबाद, बल्कि दिल्ली-एनसीआर स्तर की अनेक प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अब तक वह 50 से अधिक ट्रॉफियां और जीत के प्रमाणपत्र अपने नाम कर चुके हैं। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि ने अक्षित को जिले के सबसे प्रतिभाशाली शतरंज खिलाडिय़ों की कतार में खड़ा कर दिया है। रविवार को शतरंज के इस नन्हे खिलाड़ी ने हाल ही में पटेल नगर स्थित चौधरी छबीलदास पब्लिक स्कूल में आयोजित माइंड बैटल इंटर स्कूल शतरंज टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस प्रतियोगिता में अंडर-8, 10, 12, 14 और 17 श्रेणियों में कुल 171 खिलाडिय़ों ने भाग लिया। अंडर-17 श्रेणी में गाजियाबाद और आसपास के 10 प्रतिष्ठित स्कूलों के 15 प्रतिभाशाली खिलाड़ी मैदान में थे, जहां मुकाबला बेहद कड़ा रहा।
गाजियाबाद। शतरंज केवल एक खेल नहीं, बल्कि रणनीति, धैर्य और बौद्धिक क्षमता की परीक्षा है। इस खेल में वही आगे बढ़ता है, जो हर चाल को सोच-समझकर चलता है। गाजियाबाद के एक होनहार किशोर ने इसी बिसात पर अपनी बुद्धि और आत्मविश्वास से बड़े-बड़े धुरंधरों को मात देकर यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। डीपीएसजी मेरठ-गाजियाबाद में कक्षा 9वीं के छात्र 15 वर्षीय अक्षित शर्मा आज शतरंज की दुनिया में तेजी से उभरता हुआ नाम बन चुके हैं। अक्षित शर्मा ने न केवल गाजियाबाद, बल्कि दिल्ली-एनसीआर स्तर की अनेक प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। अब तक वह 50 से अधिक ट्रॉफियां और जीत के प्रमाणपत्र अपने नाम कर चुके हैं। इतनी कम उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि ने अक्षित को जिले के सबसे प्रतिभाशाली शतरंज खिलाडिय़ों की कतार में खड़ा कर दिया है। रविवार को शतरंज के इस नन्हे खिलाड़ी ने हाल ही में पटेल नगर स्थित चौधरी छबीलदास पब्लिक स्कूल में आयोजित माइंड बैटल इंटर स्कूल शतरंज टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। इस प्रतियोगिता में अंडर-8, 10, 12, 14 और 17 श्रेणियों में कुल 171 खिलाडिय़ों ने भाग लिया। अंडर-17 श्रेणी में गाजियाबाद और आसपास के 10 प्रतिष्ठित स्कूलों के 15 प्रतिभाशाली खिलाड़ी मैदान में थे, जहां मुकाबला बेहद कड़ा रहा।
इसी चुनौतीपूर्ण प्रतिस्पर्धा में अक्षित शर्मा ने अपनी रणनीतिक सोच और धैर्य का परिचय देते हुए कई मजबूत खिलाडिय़ों को पराजित किया। हालांकि वह इस बार प्रथम स्थान से थोड़ा चूक गए, लेकिन अंडर-17 श्रेणी में द्वितीय स्थान प्राप्त कर उन्होंने यह साबित कर दिया कि वह भविष्य के एक बड़े शतरंज खिलाड़ी बनने की पूरी क्षमता रखते हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल उनका स्कूल, बल्कि पूरा गाजियाबाद गौरवान्वित हुआ। अक्षित की इस सफलता के पीछे वर्षों की मेहनत, अनुशासन और निरंतर अभ्यास की कहानी छिपी है। कहा जाता है कि बच्चे के पहले गुरु उसके माता-पिता ही होते हैं और अक्षित के जीवन में यह कहावत पूरी तरह साकार होती है। उनकी माता प्रीति शर्मा और पिता मनोज शर्मा ने शुरू से ही उनके रुझान को पहचाना और हर कदम पर उनका मनोबल बढ़ाया। पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाते हुए अक्षित को आगे बढऩे के लिए प्रेरित किया गया।
इसके साथ ही अक्षित के कोच अभिमन्यु पोद्दार की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण रही है। उनकी कुशल मार्गदर्शन और तकनीकी प्रशिक्षण ने अक्षित की खेल समझ को और मजबूत बनाया। कोच के अनुसार, अक्षित में रणनीतिक सोच, शांत दिमाग और हार से सीखने की अद्भुत क्षमता है, जो किसी भी बड़े खिलाड़ी के लिए सबसे जरूरी गुण होते हैं। अक्षित शर्मा का मानना है कि शतरंज बच्चों के मानसिक विकास के लिए बेहद उपयोगी खेल है। इससे निर्णय लेने की क्षमता, एकाग्रता और आत्मविश्वास बढ़ता है।
वह चाहते हैं कि शतरंज को स्कूलों और घरों तक और अधिक पहुंचाया जाए, ताकि कम उम्र से ही बच्चे इस खेल से जुड़कर विश्व स्तर पर भारत का नाम रोशन कर सकें। अक्षित की यह सफलता उन सभी बच्चों के लिए प्रेरणा है, जो किसी भी क्षेत्र में आगे बढऩा चाहते हैं। उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि सही मार्गदर्शन, परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास हो, तो छोटी उम्र में भी बड़े सपने साकार किए जा सकते हैं। आज अक्षित शर्मा न केवल एक उभरते हुए शतरंज खिलाड़ी हैं, बल्कि आने वाले समय में गाजियाबाद से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की मजबूत संभावना भी रखते हैं। शतरंज की बिसात पर उनकी हर चाल यह संकेत दे रही है कि यह नन्हा खिलाड़ी भविष्य में बड़े-बड़े धुरंधरों को मात देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

















