हाउस टैक्स मामले में वकील की गैरहाजिरी, उच्च न्यायालय में सुनवाई टली

-पूर्व पार्षदों की याचिका पर लगातार अनुपस्थित वकील, सुनवाई में हो रही देरी
-नगर निगम की राजस्व व कर वसूली प्रक्रिया प्रभावित, शहरवासियों को भी झेलनी पड़ रही परेशानी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। नगर निगम द्वारा हाउस टैक्स में मनमाने तरीके से की गई बढ़ोतरी के खिलाफ इलाहाबाद उच्च न्यायालय में लंबित याचिका की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष के वकील लगातार पेश नहीं हो रहे हैं। इस कारण नगर निगम और शहरवासियों के लिए हाउस टैक्स से संबंधित अंतिम निर्णय में लंबा अंतराल पैदा हो गया है। नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी सुनील कुमार राय ने बताया कि पूर्व पार्षदों की ओर से दायर याचिका में वकील हर सुनवाई तिथि पर अनुपस्थित रहते हैं। इसी वजह से पिछले सात महीनों से मामला उच्च न्यायालय में लंबित है।

16 जनवरी 2026 को भी नगर निगम और शासन पक्ष के अधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित थे, लेकिन याचिकाकर्ता पक्ष के वकील की गैरहाजिरी के कारण सुनवाई नहीं हो सकी। इससे पहले 19 और 26 नवंबर 2025 को भी वकील ने न्यायालय में उपस्थित होकर सुनवाई में बाधा डाली थी। नगर निगम की ओर से बताया गया कि पैनल अधिवक्ता और शासन की ओर से अपर महाधिवक्ता नियमित रूप से सभी तिथियों पर उपस्थित हैं।

वहीं याचिकाकर्ता पक्ष की लापरवाही से नगर निगम की कर वसूली प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और राजस्व में भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। सुनील कुमार राय ने कहा कि सुनवाई में हो रही देरी का नुकसान सीधे नगर निगम और शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। नगर निगम ने अदालत में याचिकाकर्ता पक्ष के वकीलों की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई में हो रही देरी को गंभीरता से लिया है और उम्मीद जताई है कि जल्द ही न्यायालय से इस मामले का समाधान निकल सके।