-किसानों के बीच पहुंचकर सुनी पीड़ा, मौके पर ही अधिकारियों को तलब
-मुआवजा दिए बिना कब्जा नहीं, एनएचएआई को दिए सख्त निर्देश
-तलहैटा अंडरपास निरीक्षण से भरोसा मजबूत, संवेदनशील प्रशासन की झलक
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ सोमवार को प्रशासनिक सक्रियता और जनसंवेदनशीलता की मिसाल पेश करते हुए एक अलग अंदाज में नजर आए। जनसुनवाई में किसानों की शिकायत सुनने के तुरंत बाद वह मोटरसाइकिल पर सवार होकर किसानों के साथ भोजपुर थाना क्षेत्र के तलहैटा गांव के पास दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे (फेज-5) स्थित अंडरपास का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंच गए। उनके इस कदम से मौके पर मौजूद किसानों में विश्वास और संतोष का माहौल दिखाई दिया। जनसुनवाई के दौरान किसानों ने शिकायत की थी कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सड़क किनारे उनकी भूमि से मिट्टी उठाई गई, लेकिन समुचित भराव न होने से खेतों के पास गहरे गड्ढे बन गए हैं, जिससे उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत निरीक्षण का निर्णय लिया और बिना देरी किए मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने एनएचएआई के अधिकारियों को मौके पर तलब किया। मोदीनगर एसडीएम अजीत सिंह सहित अन्य अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यदि किसानों की भूमि से मिट्टी उठाई गई है तो उसकी गुणवत्तापूर्ण भरपाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि किसानों को विधिवत मुआवजा दिए बिना उनकी भूमि पर कब्जा नहीं लिया जाएगा। मौके पर निरीक्षण के दौरान पाया गया कि संबंधित स्थलों पर मिट्टी भराव का कार्य कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने भाकियू के जिलाध्यक्ष बिजेंद्र सिंह समेत अन्य किसानों और कार्यकर्ताओं से संवाद कर उनकी अन्य समस्याओं की भी जानकारी ली। किसानों ने गांव की पैमाइश कराने तथा मुआवजा मिलने के बाद ही भूमि अधिग्रहण करने की मांग रखी।
जिलाधिकारी ने आश्वासन दिया कि नियमानुसार पैमाइश कराई जाएगी और किसानों की अन्य मांगों पर एनएचएआई अधिकारियों से वार्ता कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी मांदड़ ने मोटरसाइकिल से ही सड़क और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण करते हुए निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। उनकी यह कार्यशैली प्रशासन की सक्रियता, जवाबदेही और जनसमस्याओं के त्वरित समाधान के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है। जिलाधिकारी की इस पहल से किसानों में भरोसा मजबूत हुआ है और प्रशासन के प्रति सकारात्मक संदेश गया है कि शासन-प्रशासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए जमीनी स्तर पर सक्रिय है।















