-सेंट्रल पार्क के पीछे निगम की नर्सरी और आर-15/9 क्षेत्र के पार्क में मिला अतिक्रमण, टूटी सुविधाएं और अव्यवस्था का अंबार
-पार्क की बिजली से चार्ज हो रहे ई-रिक्शा, ट्यूबवेल का निजी उपयोग और झुग्गियों पर महापौर ने जताई कड़ी नाराजगी
-स्थानीय लोगों की शिकायतों पर अधिकारियों को किया तलब, पार्कों को जल्द व्यवस्थित करने के दिए निर्देश
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर के पॉश इलाके राजनगर स्थित पार्कों की बदहाल स्थिति सोमवार को उस समय उजागर हो गई जब महापौर सुनीता दयाल ने स्थानीय नागरिकों की मांग पर क्षेत्र का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सेंट्रल पार्क के पीछे स्थित नगर निगम की नर्सरी तथा आर-15/9 के पीछे बने पार्क में कई गंभीर अनियमितताएं और अव्यवस्थाएं सामने आईं। पार्कों की दुर्दशा देखकर महापौर ने संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए नाराजगी व्यक्त की और तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान महापौर ने पाया कि पार्कों में झुग्गियां बनी हुई हैं, कई स्थानों पर वाहन खड़े किए जा रहे हैं और सार्वजनिक स्थल होने के बावजूद पार्क का उपयोग निजी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। पार्क की बेंचें टूटी हुई मिलीं, हरियाली और रखरखाव का अभाव दिखाई दिया तथा कई स्थानों पर ठेले और अस्थायी कब्जे भी पाए गए। इसके अलावा पार्क से सटे नालों की सफाई व्यवस्था भी बेहद खराब मिली, जिससे आसपास के वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। महापौर उस समय हैरान रह गईं जब निरीक्षण में यह सामने आया कि पार्क में स्थापित ट्यूबवेल से सीधे टोटी लगाकर एक परिवार पानी का निजी उपयोग कर रहा है।
वहीं पार्क में लगे पंप की बिजली का उपयोग ई-रिक्शा चार्ज करने के लिए किया जा रहा था। यह स्थिति तब और गंभीर हो गई जब पता चला कि करीब तीन माह पूर्व पार्क में पंप स्थापित किया गया था, लेकिन आज तक उसे नियमित बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाया है। ऐसे में अस्थायी व्यवस्थाओं के जरिए बिजली का उपयोग किया जा रहा था। निरीक्षण के दौरान महापौर ने पार्क के बाहर मौजूद ठेला संचालकों और स्थानीय लोगों से भी बातचीत की। बातचीत में कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि क्षेत्र का एक सुपरवाइजर विभिन्न गतिविधियों के लिए उनसे पैसे वसूलता है और उसकी मौखिक अनुमति से ही पार्क परिसर में ई-रिक्शा चार्ज किए जाते हैं। इस जानकारी को महापौर ने बेहद गंभीर बताते हुए इसकी जांच कराने की बात कही। महापौर ने कहा कि राजनगर शहर के सबसे विकसित और प्रतिष्ठित क्षेत्रों में गिना जाता है। यदि यहां के पार्कों की यह स्थिति है तो यह संबंधित विभागों की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। उन्होंने पूछा कि क्षेत्राधिकारी, उद्यान विभाग के कर्मचारी और माली अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किस प्रकार कर रहे हैं। यदि नियमित निगरानी होती तो पार्कों में झुग्गियां नहीं बसतीं, वाहन खड़े नहीं होते और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग नहीं किया जाता।
निरीक्षण के दौरान महापौर ने उद्यान विभाग के अधिकारियों को मौके पर ही स्थिति से अवगत कराया और स्पष्ट निर्देश दिए कि पार्कों को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी पार्क में झुग्गियां, अवैध कब्जे, वाहन पार्किंग अथवा निजी उपयोग की गतिविधियां स्वीकार नहीं की जाएंगी। पार्क आम नागरिकों के लिए बनाए जाते हैं और उनकी सुंदरता एवं उपयोगिता बनाए रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है। महापौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्कों में टूटी बेंचों की मरम्मत कराई जाए, हरियाली को बढ़ाया जाए, प्रकाश व्यवस्था को दुरुस्त किया जाए तथा साफ-सफाई की नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही पार्क परिसर में हो रही संदिग्ध गतिविधियों और स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए वसूली के आरोपों की भी जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा गया।
उन्होंने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर और स्वच्छ सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। राजनगर जैसे क्षेत्रों के पार्क शहर की पहचान हैं और उनकी उपेक्षा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी। आने वाले दिनों में पार्कों को व्यवस्थित कर उन्हें नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित, सुंदर और उपयोगी बनाया जाएगा। महापौर के निरीक्षण के बाद स्थानीय निवासियों ने उम्मीद जताई है कि लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा और पार्कों को उनकी मूल स्थिति में विकसित किया जाएगा। नगर निगम प्रशासन ने भी पार्कों की स्थिति सुधारने और अव्यवस्थाओं को समाप्त करने की दिशा में शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिया है।
















