कलेक्टर बेमिसाल, 125 आतंकियों ने डाले हथियार

रंग लाए सलीमा के प्रयास, बदल गए खतरनाक लड़ाके

काबुल। आतंकवाद से प्रभावित अफगानिस्तान में आजकल कलेक्टर सलीमा मजारी सुर्खियों में हैं। अलग कार्यशैली के कारण वह आतंकवाद पर काबू पाने में कामयाब हो रही हैं। सलीमा के प्रयासों से अब तक 125 आतंकियों ने हथियार डाल दिए हैं। सभी आतंकी नई जिंदगी की शुरुआत कर चुके हैं। कलेक्टर सलीमा को इस कार्य के लिए खूब वाह-वाही मिल रही है। यूएई के अखबार द नेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक सलीमा के इस काम को अफगानिस्तान की पुलिस और दूसरे सुरक्षा बलों का भी समर्थन मिल रहा है। सलीमा के प्रयासों से अक्तूबर माह में तालिबान के 125 आतंकियों ने हथियार छोड़कर अमन की राह पर चलने का संकल्प लिया है। कलेक्ट सलीमा ने एक इंटरव्यू में कहा मैं अपने मुल्क में अमन लाना चाहती हूं। इसके लिए हरसंभव कोशिश करुंगी। 39 साल की सलीमा का जन्म बतौर शरणार्थी ईरान में हुआ। वह ईरान में पली-बढ़ीं थी, मगर उन्होंने ठान लिया कि वह बतौर रिफ्यूजी पूरी जिंदगी नहीं काटेंगी। सलीमा ने मुल्क लौटने का फैसला किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी कोर्स पूरा किया। ईरान में अच्छी नौकरी भी मिल गई। तदुपरांत 9 साल पहले उन्होंने पति और बच्चों के साथ अफगानिस्तान लौटने का निर्णय किया। सलीमा का आरोप है कि अफगानिस्तान के युवाओं को पाकिस्तान भड़काता है। उन्हें वहां प्रशिक्षण देकर आतंकी बनाता है। बाद में ये लोग अपनों की जान लेने में शान समझने लगते हैं। मैनेजमेंट का अच्छा अनुभव होने के कारण सलीमा सिविल सर्विस के जरिए नौकरी में आई और अब अपने जिले चारकिंत में तैनात हैं। उन्हें 2 सुरक्षा गार्ड भी मिले हैं। सलीमा कहती हैं कि उनके जिले में कई पोस्ट्स पर अक्सर आतंकी कब्जा कर लेते थे। बाद में आतंकी आमजन से जबरन टैक्स वसूली करते थे। सुरक्षा बलों के हथियार लूट लेते थे। सलीमा का कहना है कि अपने मूल्क में अमन एवं शांति के लिए वह कोई कसर नहीं छोड़ेंगी।