मेडिकल डिवाइस पार्क में 18 और कंपनियां आईं, 500 करोड़ का होगा निवेश

• यीडा के सेक्टर-28 में 350 एकड़ में विकसित हो रहा मेडिकल डिवाइस पार्क
• दो हजार लोगों को मिल सकेगा रोजगार, मेडिकल उपकरण में आएगी आत्मनिर्भरता

उदय भूमि
ग्रेटर नोएडा। उत्तर भारत का पहला मेडिकल डिवाइस पार्क यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 में विकसित किया जा रहा है। मेडिकल उपकरण में आत्मनिर्भरता लाने के लिए इस पार्क में कंपनियों को भूखंड आवंटित किए जा रहे हैं। सोमवार को 18 कंपनियों को भूखंड आवंटित किए गए। इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश होगा। साथ ही दो हजार लोगों को रोजगार मिल सकेगा।
केंद्र सरकार के सहयोग से यमुना प्राधिकरण के सेक्टर-28 में 350 एकड़ में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित किया जा रहा है। इससे पूरे उत्तर भारत में मेडिकल डिवाइस उद्योग को मजबूती मिलेगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में भारत की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए यह परियोजना अहम कदम साबित हो सकती है। इस पार्क में प्राधिकरण ने सोमवार को ड्रॉ प्रक्रिया के जरिये 18 कंपनियों को भूखंड आवंटित कर दिए।

जबकि योजना में 27 भूखंड शामिल थे। इस परियोजना में 500 करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है, जिससे लगभग 2000 नौकरियों का सृजन होगा। यीडा के इस कदम से मेडिकल डिवाइस उद्योग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। आवंटित भूमि पर मेडिकल डिवाइस से जुड़े विभिन्न उद्योग स्थापित किए जाएंगे। इसमें प्रमुख रूप से इम्प्लांटेबल इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, एनेस्थेटिक्स, कार्डियोरेस्पिरेटरी डिवाइसेस, इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स और रेडियोलॉजी से जुड़े उद्योग शामिल हैं। इस क्षेत्र में निवेश से स्वास्थ्य सेवाओं में आत्मनिर्भरता को भी बढ़ावा मिलेगा।यह कदम न केवल क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देगा, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

यह होगा फायदा
मेडिकल डिवाइस पार्क को कैंसर देखभाल और रेडियोलॉजी, इमेजिंग प्रौद्योगिकी, एनेस्थेटिक्स, कार्डियोरेस्पिरेटरी उपकरण, साथ ही पेसमेकर और कॉक्लियर इम्प्लांट से जुड़े उपकरणों सहित उन्नत चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित करना शामिल है। पार्क में प्रयोगशालाएं और केंद्र सुविधाएं होंगी, जो एक केंद्रीकृत स्थान पर विविध प्रकार के परीक्षणों को सुव्यवस्थित करेंगी। इस रणनीतिक दृष्टिकोण का उद्देश्य विनिर्माण लागत को कम करना, चिकित्सा उपकरण उपयोग को अनुकूलित करना और देश भर में चिकित्सा उपकरण विनिर्माण के लिए एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देना है।