एचआईएमटी समूह संस्थानों का प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

-प्रबंधन, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अंत:विषयक अनुसंधान और नवाचार पर विशेष कार्यक्रम
-सम्मेलन का उद्घाटन गरिमामयी और ऐतिहासिक वातावरण में संपन्न
-विदेशों से आए विशेषज्ञों और शिक्षाविदों ने साझा किए विचार
-मुख्य अतिथि मोहम्मद अली फजारी ने शोध और नवाचार को वैश्विक विकास का स्तंभ बताया
-शिक्षा और अनुसंधान के मेल से समाज को नई दिशा देने पर जोर
-डॉ. राजदेव तिवारी ने डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला
-एचआईएमटी समूह के चेयरमैन हेम सिंह बंसल ने शिक्षा और अनुसंधान के संगम की महत्ता बताई
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। एचआईएमटी समूह संस्थानों में शुक्रवार को आयोजित प्रबंधन, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी में अंत:विषयक अनुसंधान और नवाचार पर प्रथम अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन का उद्घाटन समारोह गरिमामयी और ऐतिहासिक वातावरण में सम्पन्न हुआ। यह अवसर न केवल देश बल्कि विदेशों से आए विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और शोधकर्ताओं के लिए भी विशेष रहा। सम्मेलन की शुरुआत ने भविष्य के सत्रों के लिए नई दिशा और ऊर्जा प्रदान की। मुख्य अतिथि मोहम्मद अली फजारी, जो सूडान दूतावास में उप मिशन प्रमुख हैं, ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि शोध और नवाचार वैश्विक विकास का मूल स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि कोई भी समाज या राष्ट्र तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक वह अनुसंधान को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल न करे। उन्होंने शिक्षा के साथ अनुसंधान को जोड़कर समाज को नई दिशा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि डॉ. राजदेव तिवारी, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मशीन अधिगम अनुसंधान एवं विकास के प्रमुख हैं तथा सीईईकेएच एडुनिक्स प्राइवेट लिमिटेड के महाप्रबंधक हैं, ने अपने सारगर्भित संबोधन में डिजिटल युग की चुनौतियों और अवसरों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि तकनीक ने विश्व को जोडऩे के साथ-साथ नई समस्याएँ भी पैदा की हैं और इन चुनौतियों का समाधान केवल नवोन्मेषी अनुसंधान से ही संभव है।
सम्मेलन के मुख्य संरक्षक एवं एचआईएमटी समूह के चेयरमैन हेम सिंह बंसल ने अपने आशीर्वचन प्रदान करते हुए कहा कि शिक्षा और अनुसंधान का संगम समाज को प्रगतिशील दिशा प्रदान करता है। उन्होंने इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलनों को विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए एक प्रेरणास्रोत बताया। सम्मेलन के अध्यक्षीय उद्बोधन में समूह निदेशक प्रो.(डॉ.) सुधीर कुमार ने अंत: विषयक अनुसंधान की महत्ता को रेखांकित किया और कहा कि विभिन्न विषयों का मेल ही वास्तविक नवाचार का मार्ग प्रशस्त करता है।
संयोजक प्रो.(डॉ.) पंकज कुमार ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया और इस आयोजन की रूपरेखा पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन सह-संयोजक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. विक्रांत चौधरी ने किया। वहीं सह-संयोजक प्रो. नरेंद्र उपाध्याय ने पूरे दिवस के आयोजन का संक्षेप प्रस्तुत किया और आगे होने वाले व्याख्यानों की जानकारी दी। पहले दिन अंतरराष्ट्रीय स्तर के कई प्रमुख विद्वानों ने अपने-अपने व्याख्यानों के माध्यम से प्रतिभागियों को शोध और नवाचार की गहनताओं से अवगत कराया। बांग्लादेश इंजीनियरी एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियरी विभाग के प्रोफेसर डॉ. शेख फत्ताह ने अपने व्याख्यान में नई तकनीकों की उपयोगिता बताई। ओमान की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड एप्लाइड साइंसेज के डॉ. दिव्यंकर अग्रवाल ने शिक्षा और शोध के बीच गहरे संबंधों को स्पष्ट किया। मुख्य वक्ता सुश्री नेहा टंडन ने कहा कि विश्व का कोई भी देश अनुसंधान और नवाचार को प्राथमिकता दिए बिना सफलता प्राप्त नहीं कर सकता।
उन्होंने यह भी कहा कि अनुसंधान का उद्देश्य केवल शैक्षणिक विकास न होकर समाज के समग्र उत्थान में योगदान देना चाहिए। समारोह की शोभा बढ़ाने वालों में एचआईएमटी समूह के सचिव अनिल कुमार बंसल, संयुक्त सचिव अनमोल बंसल, प्राचार्या (शिक्षा) डॉ. मनोरमा, जैव प्रौद्योगिकी विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार, प्रशासनिक अधिकारी कविता चौधरी सहित सभी संकाय सदस्य मौजूद रहे। उनकी उपस्थिति ने सम्मेलन को और अधिक भव्यता प्रदान की। पहले दिन का यह आयोजन प्रतिभागियों और विद्वानों के लिए अत्यंत प्रेरणादायी रहा। सम्मेलन की शुरुआत ने जहां नई ऊर्जा और उत्साह का संचार किया, वहीं यह विश्वास भी जगाया कि इस प्रकार का अंत:विषयक मंथन न केवल शिक्षा जगत को नई दिशा देगा बल्कि समाज के विकास और प्रगति में भी मील का पत्थर साबित होगा।