आबकारी विभाग की लॉटरी में 18,402 आवेदकों के बीच 501 बने किस्मत के बाजीगर

• आबकारी विभाग की कुशल कार्यशैली से सरकार का खजाना भर रहा, रिकॉर्ड राजस्व प्राप्ति से प्रदेश में टॉप पर
• आबकारी विभाग की नीतियों से बढ़ी पारदर्शिता, राजस्व में हुई ऐतिहासिक वृद्धि

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। उत्तर प्रदेश सरकार की नई आबकारी नीति के तहत गौतमबुद्ध नगर ने प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देने वाला जिला बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। आबकारी विभाग की कुशल रणनीति और प्रभावी कार्यशैली के चलते जिले से सरकार को अब तक का सबसे अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। 1 अप्रैल से जिले में 501 अनुज्ञापियों के शराब कारोबार की नई व्यवस्था शुरू होगी, जिससे राजस्व में और वृद्धि होने की संभावना जताई जा रही है। यह पहली बार नहीं है जब गौतमबुद्ध नगर ने रिकॉर्ड राजस्व दिया है, बल्कि यह पहली बार नहीं है जब जिले ने प्रदेश में सबसे अधिक राजस्व देकर सरकार की अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है।

गौतमबुद्ध नगर जिले में देशी, मॉडल, कम्पोजिट और भांग की कुल 501 दुकानों के लिए लॉटरी प्रक्रिया पूरी की गई। इस बार 501 दुकानों के लिए 18,402 आवेदन प्राप्त हुए, जिससे सरकार को आवेदन शुल्क से ही करोड़ों की कमाई हुई। 6 मार्च को पहले चरण की ई-लॉटरी में 500 दुकानों के आवंटन के लिए 18,229 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि गुरुवार को शेष बची एक दुकान (चिटहेरा नंबर-1) के लिए 173 आवेदन आए। इस लॉटरी प्रक्रिया से सरकार को 1 करोड़ 12 लाख 45 हजार रुपये का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त हुआ।

गुरुवार को दुसरे चरण की हुई ई-लॉटरी प्रक्रिया में अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) मंगलेश दुबे, पुलिस आयुक्त द्वारा नामित सदस्य हेंमत उपाध्याय, आबकारी विभाग के नामित सदस्य बख्तावर हनीफ, जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव, आबकारी निरीक्षक आशीष पांडेय, गौरव चंद, डॉ. शिखा ठाकुर, अभिनव शाही, नामवर सिंह, चंद्रशेखर सिंह और रवि जायसवाल मौजूद रहे।

सरकार के लिए सबसे बड़ा राजस्व केंद्र
आबकारी विभाग की कुशल कार्यशैली के चलते गौतमबुद्ध नगर प्रदेश का सबसे बड़ा राजस्व केंद्र बन गया है।
• बढ़ी हुई पारदर्शिता: आबकारी विभाग ने लॉटरी प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाया है, जिससे किसी भी प्रकार की धांधली की संभावना शून्य हो गई है।
• आवेदन शुल्क से बड़ा मुनाफा: केवल आवेदन शुल्क से ही सरकार को करोड़ों रुपये की आय हुई, जो जिले की आर्थिक गतिविधियों की मजबूती को दर्शाता है।
• शराब की दुकानों का प्रभावी नियमन: आबकारी विभाग की सख्ती के चलते अवैध शराब बिक्री पर अंकुश लगा है, जिससे लाइसेंसी दुकानों से ही अधिक राजस्व प्राप्त हो रहा है।
• राजस्व में लगातार वृद्धि: हर साल जिले से सरकार को मिलने वाला राजस्व बढ़ता जा रहा है, जिससे यह प्रदेश की सबसे मजबूत आर्थिक रीढ़ बन चुका है।

आबकारी विभाग की कड़ी निगरानी से खत्म हुआ भ्रष्टाचार
पहले शराब की दुकानों के आवंटन में धांधली और गड़बड़ी के आरोप लगते थे, लेकिन आबकारी विभाग ने कड़ी निगरानी, ऑनलाइन लॉटरी प्रक्रिया और मजबूत प्रशासनिक पकड़ से इन सभी आरोपों को खत्म कर दिया है। सभी दुकानों का आवंटन ई-लॉटरी के माध्यम से पूरी पारदर्शिता से किया गया। अवैध शराब के कारोबार पर नकेल कसते हुए विभाग ने सख्त कार्रवाई की, जिससे केवल अधिकृत दुकानें ही संचालन कर सकें। शराब की कीमतों और गुणवत्ता की नियमित जांच की जा रही है, जिससे ग्राहकों को सुरक्षित और वैध उत्पाद मिल सके।

प्रदेश सरकार को मिलेगा अरबों का राजस्व, अन्य जिलों के लिए बना उदाहरण
गौतमबुद्ध नगर अब उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों के लिए एक मॉडल बन चुका है। इस जिले की सफलता को देखते हुए प्रदेश सरकार अन्य जिलों में भी इसी तरह की पारदर्शी नीति लागू करने की योजना बना रही है। इस वर्ष शराब कारोबार से प्रदेश सरकार को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है, जिसमें अकेले गौतमबुद्ध नगर का योगदान सबसे अधिक होगा। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार इस बढ़ते राजस्व का इस्तेमाल कैसे करती है और क्या अन्य जिले भी गौतमबुद्ध नगर की तरह सरकार के लिए ‘कमाऊ पूत’ बन पाते हैं या नहीं।

आबकारी अधिकारी जिले में नियमों का सख्ती से पालन करवा रहे हैं, जिससे अवैध शराब कारोबारियों की कमर टूट गई है। जिले में अवैध शराब की तस्करी रोकने के लिए लगातार छापेमारी और जब्ती अभियान चलाया जा रहा है। शराब के अवैध उत्पादन और बिक्री के दुष्परिणामों को लेकर आम जनता को जागरूक किया जा रहा है, जिससे अवैध शराब की मांग में भारी कमी आई है। आबकारी अधिकारी की सख्ती से शराब माफिया जिले में कदम रखने से भी डर रहे हैं, जिससे जिले में अवैध शराब का कारोबार लगभग खत्म होने की कगार पर है।

जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि, हमारी प्राथमिकता पारदर्शिता और कानून के दायरे में रहकर अधिकतम राजस्व प्राप्त करना है। आबकारी विभाग की कुशल रणनीति से जिले में शराब कारोबार का प्रभावी संचालन सुनिश्चित हुआ है।