संघ शताब्दी वर्ष पर विराट हिंदू सम्मेलन, एकजुटता का दिखा महासंकल्प

-हजारों की सहभागिता, संत-महात्माओं और संघ पदाधिकारियों ने दिया सामाजिक समरसता व राष्ट्र गौरव का संदेश
-संस्कृति, काव्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा रामलीला मैदान, हिंदू चेतना को मिली नई ऊर्जा

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर रविवार को (शताब्दी वर्ष) कवि नगर रामलीला मैदान में दोपहर 2 बजे से एक भव्य विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन का उद्देश्य हिंदू समाज में नई ऊर्जा, चेतना और सामाजिक एकता का संचार करना रहा। कार्यक्रम में संपूर्ण हिंदू समाज के हजारों लोगों ने सहभागिता कर इसे ऐतिहासिक रूप प्रदान किया। यह विराट आयोजन हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल, सचिव डॉ. अतुल कुमार जैन एवं उनकी समर्पित टीम के सहयोग से सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। सम्मेलन में सनातन संस्कृति, सनातन धर्म और सामाजिक समरसता को केंद्र में रखते हुए विचार, संस्कृति और राष्ट्र प्रेम का व्यापक प्रदर्शन देखने को मिला। सम्मेलन को संबोधित करते हुए श्रद्धेय स्वामी दीपांकर ने कहा कि हिंदू समाज को जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा। उन्होंने कहा कि जैसे मुस्लिम का बच्चा मुस्लिम और ईसाई का बच्चा ईसाई कहलाता है, उसी प्रकार हिंदू का बच्चा केवल हिंदू होना चाहिए, न कि अलग-अलग जातियों में बंटा हुआ।

उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि समाज को विभाजित करने के लिए जातियों का सहारा लिया गया, लेकिन अब समय आ गया है कि हिंदू समाज एकजुट होकर अपनी पहचान और गौरव को सुदृढ़ करे। श्रद्धेय पवन सिन्हा ने अपने उद्बोधन में कहा कि यदि भारत विश्वगुरु बनता है तो पूरे विश्व में शांति स्थापित होगी। उन्होंने कहा कि हिंदू समाज में वीरता की कोई कमी नहीं है, बल्कि संगठित योजना की आवश्यकता है। आज हिंदू समाज पुन: संगठित हो रहा है, और स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुषों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए समाज को जोडऩे का कार्य किया जा रहा है। श्रद्धेय जीवन ऋषि महाराज ने कहा कि जीवन का सबसे बड़ा संकट बाहरी नहीं बल्कि भीतरी उदासीनता है। उन्होंने कहा कि केवल शरीर में रक्त का प्रवाह पर्याप्त नहीं, बल्कि संस्कारों का प्रवाह भी आवश्यक है। धर्म केवल मंदिरों तक सीमित न रहकर समाज के व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।

राष्ट्र को मजबूत बनाने और हिंदू होने पर गर्व करने का संदेश उन्होंने अपने उद्बोधन में दिया। श्रद्धेय अरविंद भाई ओझा एवं श्रद्धेय नवनीत प्रिय दास ने भी हिंदुत्व, सनातन धर्म, संस्कार और राष्ट्र प्रेम विषयों पर अपने विचार रखे। सम्मेलन के मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्रीय प्रचार प्रमुख श्री पदम जी ने प्रेरक उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन हिंदू समाज को विभिन्न जातियों और भेदभाव से ऊपर उठाकर एक सूत्र में बांधने का सशक्त प्रयास है। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सभी का मन मोह लिया। राष्ट्र प्रेम से ओतप्रोत समूह गान, देशभक्ति नृत्य, शिव तांडव जैसे कार्यक्रमों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। साथ ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवि एवं कवयित्रियों द्वारा सनातन धर्म, हिंदुत्व, राष्ट्र प्रेम, भारतीय संस्कृति और पंच परिवर्तन विषयों पर काव्य पाठ प्रस्तुत किया गया।

लखनऊ से ओज के प्रसिद्ध कवि कमल आग्नेय तथा कवि नगर गाजियाबाद की अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कवयित्री अंजू जैन ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवि नगर में आयोजित इस विराट हिंदू सम्मेलन को सफल बनाने में आयोजन समिति के साथ-साथ स्थानीय निवासियों का भी पूर्ण सहयोग रहा। आरती के उपरांत उपस्थित बंधुओं द्वारा चित्र पर अक्षत अर्पित किए गए। कार्यक्रम की सफलता में आयोजन समिति के अध्यक्ष ललित जायसवाल, महासचिव डॉ. अतुल कुमार जैन, प्रवक्ता एवं मीडिया प्रभारी अजय जैन, राजकुमार, उपाध्यक्ष मनोज गोयल, कोषाध्यक्ष प्रवीण गर्ग एवं जयप्रकाश अग्रवाल, संरक्षक बी.के. ढाढनिया, सह सचिव दीपाली जैन, अंजू जैन, साधना जैन, जितेंद्र गुप्ता, शाखा मुख्य कार्यवाह सुभाष चंद्र सहित अनेक गणमान्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा। अध्यक्ष ललित जायसवाल एवं सचिव डॉ. अतुल कुमार जैन ने कार्यक्रम में पधारे सभी बंधुओं का आभार व्यक्त किया।