महाशिवरात्रि पर दूधेश्वरनाथ में उमड़ेगा आस्था का सैलाब, सुरक्षा के कड़े इंतजाम

-अतिरिक्त पुलिस आयुक्त राज करन नैय्यर व एसीपी उपासना पाण्डेय ने संभाली कमान
-निशीथ काल में होगा विधिवत जलाभिषेक, चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व
-501 किलो फलों से महाकाल श्रृंगार, चार कतारों व 250 स्वयंसेवकों की व्यवस्था

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। महाशिवरात्रि पर्व को लेकर सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर में तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन के साथ-साथ पुलिस और जिला प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क है। शनिवार को सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून-व्यवस्था एवं यातायात) राज करन नैय्यर ने पुलिस बल के साथ कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित दूधेश्वरनाथ मंदिर का भ्रमण किया। उन्होंने मंदिर परिसर, प्रवेश एवं निकास मार्गों का निरीक्षण कर संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। इसी क्रम में सहायक पुलिस आयुक्त कोतवाली नगर उपासना पाण्डेय ने भी पुलिस बल एवं बीडीडीएस (बम डिटेक्शन एंड डिस्पोजल स्क्वाड) के साथ मंदिर परिसर और आसपास के मार्गों की सघन जांच की। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने, भीड़ नियंत्रण, संदिग्ध गतिविधियों पर पैनी नजर रखने तथा सीसीटीवी निगरानी को प्रभावी बनाने के निर्देश दिए।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि महाशिवरात्रि का पावन पर्व रात्रि 12 बजे से प्रारंभ होगा। सर्वप्रथम वे स्वयं भगवान दूधेश्वर का विधिवत जलाभिषेक करेंगे। उनके साथ श्री दूधेश्वर नाथ मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष अनुज गर्ग भी पूजा-अर्चना में सहभागी होंगे। इसके पश्चात प्राचीन देवी मंदिर, द्वारका पुरी (दिल्ली गेट) के महंत गिरिशानंद गिरि महाराज द्वारा महाआरती संपन्न कराई जाएगी और फिर मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए जाएंगे।
महाराजश्री ने बताया कि फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि सायं 5 बजकर 04 मिनट से प्रारंभ होकर 16 फरवरी को सायं 5 बजकर 34 मिनट तक रहेगी।

इसी कारण महाशिवरात्रि पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। व्रत का पारण 16 फरवरी को प्रात: 6 बजकर 42 मिनट से दोपहर 3 बजकर 10 मिनट तक किया जा सकेगा। निशीथ काल का पूजन विशेष फलदायी माना गया है। इस वर्ष यह शुभ मुहूर्त रात्रि 12 बजकर 09 मिनट से प्रात: 1 बजकर 01 मिनट तक रहेगा। शास्त्रों के अनुसार इस काल में जलाभिषेक एवं रुद्राभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही महाशिवरात्रि पर इस बार अनेक शुभ योग और राजयोग बन रहे हैं, जो भगवान दूधेश्वर की आराधना को और अधिक फलदायी बनाएंगे। चार प्रहर की पूजा का भी विशेष महत्व बताया गया है। प्रथम प्रहर सायं 6:11 से 9:23 तक, द्वितीय प्रहर 9:23 से 12:35 तक, तृतीय प्रहर 12:35 से 3:47 तक तथा चतुर्थ प्रहर प्रात: 3:47 से 6:59 तक रहेगा। श्रद्धालु इन चारों प्रहरों में विधिवत पूजा-अर्चना कर सकते हैं। मंदिर के मीडिया प्रभारी पिंटू सुथार ने बताया कि भगवान दूधेश्वर का महाकाल रूप में भव्य एवं दिव्य श्रृंगार किया जाएगा।

यह श्रृंगार 501 किलो फलों और फूलों से किया जाएगा तथा 56 भोग अर्पित किए जाएंगे। श्रृंगार सेवा समिति के अध्यक्ष विजय मित्तल के नेतृत्व में भक्तगण इस अलौकिक सज्जा को अंतिम रूप देंगे। श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर प्रशासन ने चार कतारों की विशेष व्यवस्था की है। लगभग 250 स्वयंसेवक व्यवस्था संभालेंगे, जिससे जलाभिषेक के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो। जिला प्रशासन, नगर निगम और बिजली विभाग भी पूरी तरह सक्रिय हैं। स्वच्छता, पेयजल, गंगाजल, प्रकाश व्यवस्था और यातायात नियंत्रण के विशेष प्रबंध किए गए हैं। पुलिस प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात रहेगा तथा सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से हर गतिविधि पर सतत निगरानी रखी जाएगी। महाशिवरात्रि के इस पावन अवसर पर आस्था, भक्ति और सुरक्षा का समन्वय गाजियाबाद में एक अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करेगा, जहां श्रद्धालु निर्बाध रूप से भगवान दूधेश्वर के दर्शन कर सकेंगे।