• गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों की लगाई क्लास
• तस्करी पर चलेगा बुलडोजर, राजस्व में नहीं दिखनी चाहिए कोई कमी: आदर्श सिंह
• अवैध शराब की तस्करी, फर्जी बार लाइसेंस, और लापरवाह कार्यशैली पर होगी सीधी कार्रवाई
• उत्तर प्रदेश का पहला एफएल-4डी लो-अल्कोहोलिक लाइसेंस भी गौतमबुद्ध नगर को मिला सम्मान
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। आबकारी विभाग के इतिहास में यह बैठक न केवल प्रशासनिक दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा, बल्कि यह राजस्व सुधार, पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रवर्तन तंत्र के नए युग की औपचारिक शुरुआत भी साबित हो सकती है। आबकारी आयुक्त आदर्श सिंह की अध्यक्षता में सोमवार को शक्ति सदन गेस्ट हाउस, नोएडा में आयोजित इस मील का पत्थर साबित होने वाली उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में विभागीय अधिकारियों की न केवल जवाबदेही सुनिश्चित की गई, बल्कि यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि अब काम का मूल्यांकन केवल कागजों से नहीं, ज़मीनी हकीकत से होगा। बैठक में संयुक्त आबकारी आयुक्त मेरठ जोन दिलीपमणि तिवारी, उप आबकारी आयुक्त मेरठ मंडल नीरज वर्मा, जिला आबकारी अधिकारी गौतमबुद्ध नगर सुबोध कुमार श्रीवास्तव और गाजियाबाद आबकारी अधिकारी संजय कुमार प्रथम दोनों जनपदों के सहायक आबकारी आयुक्त, और सभी आबकारी निरीक्षक आशीष पाण्डेय, अखिलेश बिहारी वर्मा, डॉ शिखा ठाकुर, सचिन त्रिपाठी, नामवर सिंह, अभिनव शाही, संजय चन्द्र, मनोज शर्मा, डॉ राकेश त्रिपाठी, अखिलेश कुमार, कीर्ति सिंह, अनुज वर्मा, चमन सिंह, चन्द्रजीत सिंह उपस्थित रहे।
आबकारी आयुक्त ने जनपदवार राजस्व सृजन, प्रवर्तन, तस्करी पर नियंत्रण, ऑकेजनल लाइसेंसिंग की पारदर्शिता और विभागीय कार्यसंस्कृति को लेकर गहन समीक्षा करते हुए सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए कि अब से विभाग की छवि सिर्फ राजस्व से नहीं, बल्कि ईमानदारी, प्रभावी कार्रवाई और जवाबदेही से बनेगी। गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद जैसे महत्वपूर्ण जिलों में आबकारी विभाग की भूमिका सिर्फ राजस्व वसूली तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि यह हमारी प्रशासनिक साख और सामाजिक जिम्मेदारी का भी दायरा है। सभी अधिकारी सुनिश्चित करें कि राजस्व लक्ष्य को पूरी निष्ठा के साथ समयबद्ध ढंग से पूरा किया जाए।
उन्होंने कहा कि हरियाणा सीमा से अवैध मदिरा की एक बूंद भी अब नहीं आनी चाहिए। बॉर्डर पर फार्महाउसों, रिसॉर्ट्स और लाइसेंसधारी प्रतिष्ठानों पर सतत निगरानी रखी जाए। जो अधिकारी फील्ड में सक्रिय नहीं हैं, वे जवाबदेह माने जाएंगे। एफएल-11 (ऑकेजनल बार लाइसेंस) की आड़ में चल रही अनियमितताओं को तुरंत चिह्नित कर स्थाई लाइसेंस में परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू करें, ताकि लाइसेंस प्रणाली पारदर्शी और व्यावसायिक रूप से जिम्मेदार हो सके। हमारा उद्देश्य सिर्फ कार्रवाई करना नहीं है, बल्कि एक ऐसी प्रणाली स्थापित करना है जो अवैध व्यापार, राजस्व क्षति और जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ पर पूर्ण विराम लगाए। मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि अब सिर्फ फाइलों में रिपोर्ट नहीं, जमीन पर परिणाम चाहिए। हर अधिकारी अगले 15 दिनों में ठोस कार्रवाई करके अपनी कार्यकुशलता सिद्ध करे, अन्यथा सख्त कदम उठाए जाएंगे।
गाजियाबाद-नोएडा में तस्करों पर शिकंजा कसने का फरमान
आयुक्त ने दो टूक कहा कि हरियाणा सीमा से एक बूंद भी अवैध शराब नहीं आनी चाहिए। तस्करों पर ऐसा शिकंजा कसा जाए कि अवैध कारोबार करने वालों को जमीन छोडऩी पड़े। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती फार्म हाउसों, बार, रेस्टोरेंट और दुकानों की नियमित जांच की जाए। संबंधित थाना क्षेत्र के प्रभारी व आबकारी निरीक्षक के बीच समन्वय बना रहे। साथ ही उन्होंने आदेश दिया कि एफएल-11 (अस्थायी बार लाइसेंस) की मासिक समीक्षा कर यह सुनिश्चित किया जाए कि लाइसेंसधारी किसी नियम का उल्लंघन न करें। नियमों का उल्लंघन मिलने पर लाइसेंस रद्द किया जाए या स्थायी लाइसेंस में रूपांतरित किया जाए।
राजस्व लक्ष्य को ‘सम्मान’ की तरह लें अधिकारी
आयुक्त ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट किया कि राजस्व लक्ष्य सिर्फ आंकड़ा नहीं है, यह जनता के भरोसे का आईना है। अगर कोई अधिकारी इसे गंभीरता से नहीं ले रहा, तो वह सरकारी जिम्मेदारी के लायक नहीं है। उन्होंने थोक अनुज्ञापनों व गोदामों से अधिकतम इंडेंटिंग कराकर निर्धारित लक्ष्य से आगे बढऩे की हिदायत दी। बैठक में जनपद के अधिकारियों को चेताया कि यहां कई जगहों पर प्रवर्तन की रफ्तार धीमी है। दर्जनों एफएल लाइसेंसों की जांच अधूरी, सीमावर्ती क्षेत्रों में शिकायतों की पुष्टि के बाद भी कार्यवाही नहीं इस पर आयुक्त ने तीखी नाराजगी जताई और कहा कि अब फील्ड में गश्त और जांच में कोताही पर सीधे निलंबन की संस्तुति दी जाएगी।
एएफएल-4डी: गौतमबुद्ध नगर को मिली यूपी में पहली नई पीढ़ी की अनुज्ञप्ति
बैठक के उपरांत आरक्यूब मॉल सेक्टर-43 में नवनिर्मित एएफएल-4डी (लो-अल्कोहोलिक बीयर और वाइन लाइसेंस) व एफएल-7(1) बार का निरीक्षण भी किया गया। यह लाइसेंस अब कैफे और रेस्टोरेंट में सीमित मात्रा की बीयर और वाइन सर्व करने की अनुमति देगा और वो भी मात्र 6 लाख रुपये के वार्षिक शुल्क पर। यह प्रयोगात्मक योजना सबसे पहले गौतमबुद्ध नगर में लागू हुई, फिर इसे गाजियाबाद, आगरा और लखनऊ में शुरू किया जा रहा है। इससे रेस्तरां कारोबारियों को बढ़ावा मिलेगा और प्रदेश को राजस्व भी। आयुक्त ने जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव की पीठ थपथपाते हुए कहा कि यह नवाचार न सिर्फ विभाग को नई दिशा देगा बल्कि उद्योग जगत में हमारी सकारात्मक छवि भी निर्मित करेगा।
आगामी कार्रवाई के लिए बनेगा ब्लूप्रिंट
• गौतमबुद्ध नगर के सभी एफएल लाइसेंसधारियों की स्क्रूटनी होगी
• सीमा क्षेत्रों में जीपीएस आधारित निगरानी प्रणाली पर विचार
• राजस्व लक्ष्य से नीचे रहने वाले अधिकारियों पर निजी जिम्मेदारी तय की जाएगी
• साप्ताहिक रिपोर्टिंग सिस्टम लागू करने के निर्देश

















