अक्षित शर्मा ने अंडर-15 शतरंज फेस्टिवल में दिखाई रणनीति की ताकत, शीर्ष स्थान पर किया कब्जा

• छोटी उम्र में बड़ी उपलब्धि, 50 से अधिक मेडल अपने नाम कर चुके हैं अक्षित शर्मा
• अंतिम राउंड तक बनाए रखा दबाव, निर्णायक जीत से हासिल किया शीर्ष स्थान
• डीपीएसजी मेरठ रोड का अकेला प्रतिनिधि, खेल में दिखाया आत्मविश्वास और कौशल
• आठ स्कूलों के 26 प्रतिभागियों के बीच उत्कृष्ट प्रदर्शन से सबका ध्यान खींचा
• प्रतियोगिता ने युवाओं को मानसिक संतुलन, रणनीति और अनुशासन की सीख दी 

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। शतरंज केवल शह और मात का खेल नहीं बल्कि यह बच्चों और युवाओं के लिए रणनीति, तर्क, निर्णय क्षमता और मानसिक संतुलन का पाठ भी पढ़ाता है। इसी खेल के माध्यम से युवा अपनी सोचने की क्षमता, धैर्य और रचनात्मकता को निखारते हैं। इस बार ग्लोबल स्पोर्ट्स एकेडमी द्वारा आयोजित अंडर-15 चेस फेस्टिवल 2025 में डीपीएसजी मेरठ रोड गाजियाबाद के 15 वर्षीय अक्षित शर्मा ने अपनी असाधारण प्रतिभा का प्रदर्शन किया और 26 प्रतिभागियों के बीच प्रथम स्थान हासिल कर अपनी और स्कूल की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई दी। रविवार को नोएडा एक्सटेंशन के सर्वोत्तम इंटरनेशनल स्कूल, टेक जोन में आयोजित इस फेस्टिवल में आठ प्रतिष्ठित स्कूलों के युवा प्रतिभागियों ने भाग लिया। कुल पांच राउंड में चले रोमांचक मुकाबलों के बाद अक्षित शर्मा ने 4.5 अंकों के साथ शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी ठोस रणनीति और मानसिक दृढ़ता के दम पर युवा प्रतिभाओं के बीच दबदबा बनाया।

अक्षित शर्मा की यह उपलब्धि न केवल उनके माता-पिता के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि उनके सहपाठियों और स्कूल के लिए भी प्रेरणास्त्रोत बनी है। दूसरे स्थान पर अरव सक्सेना रहे, जिन्होंने भी 4.5 अंक अर्जित किए, लेकिन टाई-ब्रेक के आधार पर उन्हें दूसरा स्थान दिया गया। तीसरे स्थान पर आर्श पसरीचा रहे, जिन्होंने 4 अंक अर्जित किए। इस तरह प्रतियोगिता में शीर्ष तीन स्थानों पर रहने वाले खिलाड़ी अपनी रणनीति और खेल की समझ से दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने में सफल रहे। प्रतियोगिता में कुल 26 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इनमें वंश यादव, सोहम मित्तल, ऋतिक श्रीवास्तव, कौस्तुभ तिवारी, माहित सिंघल और रचित माडेशिया जैसे युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ी शामिल थे। प्रतिभागियों ने न केवल अपनी तकनीकी क्षमता दिखाई, बल्कि खेल के प्रति अनुशासन, मानसिक संतुलन और निर्णय लेने की क्षमता का भी उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

अंडर-15 चेस फेस्टिवल की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि आठ स्कूलों से आए प्रतिभागियों के बीच डीपीएसजी मेरठ रोड गाजियाबाद का प्रतिनिधित्व केवल अक्षित शर्मा ने किया, और उन्होंने अपनी शानदार जीत से अपने माता-पिता, स्कूल और खुद का नाम रौशन किया। अक्षित ने अंतिम राउंड में निर्णायक जीत हासिल करके प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान पक्का किया, जो उनके धैर्य और खेल में निरंतरता का प्रमाण है।
अक्षित शर्मा की सफलता के पीछे उनकी कठिन मेहनत, लगन और खेल के प्रति समर्पण मुख्य कारण रहे। उनके कोच अभिमन्यु पोद्दार और परिवार ने बताया कि अक्षित नियमित अभ्यास, खेल के नियमों और रणनीतियों पर विशेष ध्यान देते हैं। यही कारण है कि इतनी छोटी उम्र में उनके नाम 50 से अधिक मेडल और ट्रॉफी दर्ज हैं। प्रतियोगिता के दौरान अरव सक्सेना और आर्श पसरीचा के बीच भी मुकाबला बेहद रोमांचक रहा।

उनके बीच के मैच ने दर्शकों और प्रतियोगियों के लिए उत्साह और रोमांच को बढ़ाया। हर राउंड में खिलाड़ी अपनी रणनीति और चालबाजी से प्रतिद्वंदियों को चुनौती देते नजर आए। प्रतियोगिता के आयोजक शशांक कुमार और चीफ ऑर्बिटर अनिशा सिंह ने बताया कि इस तरह के आयोजन युवा खिलाडिय़ों को प्रतिस्पर्धात्मक माहौल का अनुभव लेने, अपनी तकनीक को निखारने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि खिलाडिय़ों को खेल की आत्मा और अनुशासन का पालन करना सीखना चाहिए, और यह फेस्टिवल इन्हीं मूल्यों को बढ़ावा देने का एक आदर्श मंच बन गया।

डिप्टी चीफ ऑर्बिटर विवेक मित्रा ने भी प्रतियोगिता की सफलता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि अक्षित शर्मा जैसे खिलाड़ी युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने बताया कि प्रतियोगिता में खेल की गुणवत्ता और रणनीति पर विशेष ध्यान दिया गया, जिससे प्रतिभागियों की क्षमता और कौशल का वास्तविक आकलन किया जा सका। इस प्रतियोगिता ने यह भी साबित किया कि शतरंज जैसे खेल में युवाओं का मानसिक विकास और सोचने की क्षमता बढ़ती है। अक्षित शर्मा ने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्वता और रणनीतिक सोच दिखाई, जो उन्हें प्रतियोगियों में सबसे अलग और मजबूत बनाती है। अंत में, इस फेस्टिवल ने यह संदेश दिया कि सही प्रशिक्षण, कड़ी मेहनत और मानसिक दृढ़ता के साथ युवा अपनी उम्र से कहीं अधिक उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। अक्षित शर्मा की जीत ने यह प्रमाणित कर दिया कि छोटे बच्चों में भी बड़ी प्रतिभा होती है और उन्हें मंच मिलते ही वे अपने कौशल का लोहा मनवा सकते हैं।