-प्रधानमंत्री की बचत अपील को धरातल पर लागू करने की मांग, ईंधन बचत पर जोर
-सरकारी वाहनों के निजी उपयोग पर रोक लगाने की उठी आवाज
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। देश में आर्थिक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और सरकारी खर्चों में कटौती को लेकर चल रही पहल के बीच गाजियाबाद नगर निगम की वार्ड संख्या-72 कौशाम्बी की पार्षद कुसुम मनोज गोयल ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित करते हुए एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि सरकारी अधिकारियों को निर्देश जारी किए जाएं कि वे दोपहर का भोजन अपने घर से लेकर कार्यालय आएं, जिससे सरकारी वाहनों के अनावश्यक उपयोग पर रोक लगे और ईंधन की बचत सुनिश्चित हो सके। पार्षद कुसुम मनोज गोयल ने अपने बयान में कहा कि देश को आर्थिक चुनौतियों से सुरक्षित रखने के लिए प्रधानमंत्री द्वारा खर्चों में कटौती और संसाधनों के संयमित उपयोग की अपील की गई है, जिसका पालन राज्य सरकार भी गंभीरता से कर रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा प्रशासनिक स्तर पर खर्च नियंत्रण के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यदि छोटी-छोटी व्यवस्थागत सुधार लागू किए जाएं तो सरकारी खजाने पर पडऩे वाला अनावश्यक बोझ काफी हद तक कम किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि अनेक अधिकारी दोपहर के भोजन के लिए सरकारी वाहनों का उपयोग कर अपने घर जाते हैं। इससे न केवल सरकारी ईंधन की खपत बढ़ती है, बल्कि सरकारी संसाधनों का निजी उपयोग भी होता है। पार्षद के अनुसार यदि अधिकारी घर से भोजन लाकर कार्यालय में ही भोजन करें तो प्रतिदिन बड़ी मात्रा में डीजल और पेट्रोल की बचत संभव है। कुसुम मनोज गोयल ने कहा कि वर्तमान समय में देश आत्मनिर्भरता और वित्तीय अनुशासन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासनिक व्यवस्था भी उदाहरण प्रस्तुत करे तो आम नागरिकों में सकारात्मक संदेश जाएगा। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और अधिकारी यदि स्वयं बचत और सादगी अपनाएं तो समाज में भी जिम्मेदारी की भावना मजबूत होगी। पार्षद ने मुख्यमंत्री से यह भी अनुरोध किया कि सरकारी वाहनों के उपयोग को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, जिससे सरकारी संसाधनों का उपयोग केवल सरकारी कार्यों तक सीमित रहे। उनका मानना है कि प्रशासनिक स्तर पर अनुशासन लागू होने से राज्य सरकार की बचत नीति को और मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि ईंधन की बढ़ती कीमतें और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां यह संकेत देती हैं कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग समय की आवश्यकता है।
यदि राज्य के हजारों अधिकारी प्रतिदिन सरकारी वाहन से अनावश्यक आवागमन कम करें तो इससे लाखों रुपये की बचत संभव है, जिसे जनहित योजनाओं में लगाया जा सकता है। कुसुम मनोज गोयल ने कहा कि यह सुझाव किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि एक सकारात्मक प्रशासनिक सुधार की दिशा में उठाया गया कदम है। उनका उद्देश्य केवल इतना है कि सरकारी व्यवस्था अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और किफायती बने। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस सुझाव पर गंभीरता से विचार करेंगे और आवश्यक निर्देश जारी कर प्रशासनिक सुधार की नई मिसाल स्थापित करेंगे। पार्षद ने कहा कि यदि यह व्यवस्था लागू होती है तो उत्तर प्रदेश पूरे देश के लिए सरकारी खर्च नियंत्रण का एक आदर्श मॉडल बन सकता है। स्थानीय नागरिकों ने भी इस सुझाव को व्यावहारिक बताते हुए कहा कि सरकारी स्तर पर बचत की शुरुआत छोटे कदमों से ही होती है। उनका मानना है कि जब शासन और प्रशासन स्वयं अनुशासन का पालन करेंगे, तभी आर्थिक सुदृढ़ता का लक्ष्य तेजी से प्राप्त किया जा सकेगा। गाजियाबाद से उठी यह पहल अब प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बनती दिखाई दे रही है और माना जा रहा है कि प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सुधार के लिए ऐसे सुझाव भविष्य में नई नीतियों का आधार बन सकते हैं।
















