जनप्रतिनिधियों की अनदेखी नहीं होगी बर्दाश्त, अधिकारियों को जवाबदेही होगी तय: वंदना वर्मा

-फोन न उठाने पर कॉल बैक अनिवार्य, जनता की शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई के निर्देश
-विकास कार्यों में पारदर्शिता व समयबद्धता पर जोर, विभागवार समीक्षा में खामियों पर जताई नाराजगी
-सड़क निर्माण में देरी पर पीडब्ल्यूडी को फटकार, योजनाओं का लाभ हर पात्र तक पहुंचाने के निर्देश

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। उत्तर प्रदेश विधान परिषद की विधायी समाधिकार समिति की सभापति एवं विधान परिषद सदस्य वंदना वर्मा ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों के फोन हर हाल में उठाए जाएं। यदि किसी कारणवश कॉल रिसीव नहीं हो पाता है तो संबंधित अधिकारी अनिवार्य रूप से कॉल बैक करें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों के माध्यम से आने वाली जनता की शिकायतों का समयबद्ध समाधान किया जाए तथा शिकायतकर्ता और जनप्रतिनिधि दोनों को कार्रवाई की जानकारी दी जाए। मंगलवार को विकास भवन स्थित दुर्गावती देवी सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में वंदना वर्मा हापुड़, गौतमबुद्धनगर और गाजियाबाद जनपदों के अधिकारियों के साथ विभिन्न विभागों की कार्यप्रगति की समीक्षा करने पहुंचीं। उनके आगमन पर पुलिस द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने पुष्पगुच्छ, पौधा और प्रतीक चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। बैठक में सभापति ने कहा कि विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए पत्रों और प्रस्तावों का समय पर जवाब दिया जाए तथा विधान परिषद सदस्यों की विभिन्न जिला स्तरीय समितियों में भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

समीक्षा के दौरान गृह विभाग से जनप्रतिनिधियों को उपलब्ध कराई गई सुरक्षा व्यवस्था, ग्राम्य विकास, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई, पंचायती राज, पर्यटन, ऊर्जा, नियोजन, महिला कल्याण, श्रम, बेसिक शिक्षा, नगर निगम सहित कई विभागों के वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 तक के विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी ली गई। विधायक निधि और विधान परिषद सदस्यों द्वारा भेजे गए प्रस्तावों की प्रगति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में लोक निर्माण विभाग द्वारा सड़कों का निर्माण समय पर पूरा नहीं किए जाने पर सभापति ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को लंबित परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूर्ण कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रस्ताव की स्वीकृति या अस्वीकृति की जानकारी संबंधित जनप्रतिनिधि को अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जाए। यदि कार्य में जनप्रतिनिधि की सहभागिता आवश्यक हो तो विभाग स्वयं संपर्क स्थापित करे।

वंदना वर्मा ने यह भी निर्देशित किया कि स्वीकृत विकास कार्यों को गुणवत्ता के साथ समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए और कार्यों की प्रगति रिपोर्ट समय-समय पर जनप्रतिनिधियों को दी जाए। साथ ही उद्घाटन कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया जाए तथा शिलापट्ट पर उनके नाम अंकित किए जाएं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। इसके लिए योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए और जिला स्तरीय अधिकारी जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लोगों को जागरूक करें। बैठक के अंत में सभापति ने अधिकारियों को आमजन की समस्याओं को गंभीरता से सुनने और प्राथमिकता के आधार पर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार मांदड़ ने समिति को आश्वस्त किया कि सभी निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन कराया जाएगा तथा अनुपालन आख्या समय पर प्रस्तुत की जाएगी। बैठक में समिति सदस्य डॉ. प्रज्ञा त्रिपाठी, एमएलसी दिनेश कुमार गोयल, विधायक नंद किशोर गुर्जर, जिला पंचायत अध्यक्ष ममता त्यागी सहित तीनों जनपदों के वरिष्ठ अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष उपस्थित रहे।