चीन को अमेरिका की एक और गहरी चोट

चीनी कंपनियों में यूएस के निवेश पर बैन

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन को कतई बख्शने के मूड में नहीं हैं। राष्ट्रपति चुनाव में शिकस्त मिलने के बावजूद ट्रंप ने पद छोड़ने से पहले चीन की एक और टेंशन बढ़ा दी है। डोनाल्ड प्रशासन ने कार्यकारी आदेश जारी कर चीनी कंपनियों में अमेरिकी निवेश पर बैन लगा दिया है। आदेश के मुताबिक ऐसी किसी भी चीनी कंपनी में अमेरिका द्वारा निवेश नहीं किया जाएगा, जो किसी भी रूप में चीन की सेना से जुड़ी है। यह कदम अमेरिकी निवेश फर्म, पेंशन फंड और अन्य को 31 चीनी कंपनियों के शेयर खरीदने से रोकने को उठाया गया है। दरअसल इन कंपनियों को रक्षा विभाग ने चीनी सेना समर्थित कंपनियां माना है। डोनाल्ड ट्रंप के इस निर्णय से चीन को खासा नुकसान उठाना पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन के फैसले से चाइना टेलीकॉम कॉर्प लि., चाइना मोबाइल लि. और सर्विलांस डिवाइस निर्माता सर्वाधिक प्रभावित होंगी। यह आदेश 11 जनवरी 2021 से प्रभावी माना जाएगा। इसके बाद अमेरिकी निवेशक सूचीबद्ध चीनी कंपनियों में निवेश नहीं कर पाएंगे। आदेश में कहा गया है कि चीन अपनी सेना, खुफिया तंत्र और अन्य सुरक्षा एजेंसियों को मजबूती देने और उनके आधुनिकीकरण के लिए काफी समय से अमेरिकी पूंजी का प्रयोग करता आया है, मगर आगे से ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। राष्ट्रपति चुनाव में हारने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने यह बड़ा फैसला लिया है। यह निर्णय इस तरफ इशारा करता है कि डोनाल्ड ट्रंप सत्ता हस्तांतरण से पहले चीन के खिलाफ कार्रवाई का कोई मौका नहीं छोड़ना चाहते। नए राष्ट्रपति जो बाइडेन ने चीन को लेकर अपनी रणनीति का अब तक खुलासा नहीं किया है। हालाकि माना जा रहा है कि बाइडेन का रुख भी बीजिंग के प्रति सख्त रहेगा। यह भी संभव है कि बाइडेन आने वाले समय में ट्रंप के कुछ फैसलों को पलट दें। कोविड-19 (कोरोना वायरस) के कारण अमेरिका में अभी भी तबाही मच रही है। कोरोना के लिए डोनाल्ड ट्रंप सीधे तौर पर चीन को जिम्मेदार बता चुके हैं।