-ऑफर कल्चर और नियमविहीन बिक्री पर सख्ती, वैध शराब कारोबार को मिलेगा संरक्षण
-एफएल-11 से एफएल-7 लाइसेंस की अनिवार्यता, बिना एनओसी किसी आयोजन को हरी झंडी नहीं
-जिला आबकारी अधिकारी बोले-राजस्व नुकसान नहीं होने देंगे, उल्लंघन पर होगा कड़ा एक्शन
उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जिले में शराब कारोबार से जुड़े उन अनुज्ञापियों के लिए बड़ी राहत की खबर है, जिन्होंने लाखों-करोड़ों रुपये खर्च कर शराब की दुकानों का लाइसेंस लिया है। लंबे समय से रेस्टोरेंट और बार में चल रही अनियंत्रित शराब बिक्री और आकर्षक ऑफरों के कारण जिन लाइसेंसियों के राजस्व पर सीधा असर पड़ रहा था, उसे देखते हुए आबकारी विभाग ने अब सख्त और निर्णायक कदम उठाया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि शराब की बिक्री और परोसने की प्रक्रिया पूरी तरह नियंत्रित और तय नियमों के अनुसार ही होगी, ताकि न केवल लाइसेंसधारकों का हित सुरक्षित रहे बल्कि सरकारी राजस्व में भी बढ़ोतरी सुनिश्चित की जा सके। आबकारी विभाग का मानना है कि बीते कुछ वर्षों में रेस्टोरेंट, बार और होटलों में शराब पार्टियों का चलन तेजी से बढ़ा है। ग्राहकों को लुभाने के लिए ‘एक के साथ एक फ्री’ जैसे ऑफर दिए जाते रहे, जिससे आसपास स्थित वैध शराब दुकानों की बिक्री पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।
शराब के शौकीन लोग सुविधाजनक माहौल, बैठकर सेवन करने की सुविधा और अतिरिक्त ऑफर के कारण दुकानों की बजाय बार-रेस्टोरेंट का रुख करने लगे। इसका सीधा नुकसान उन अनुज्ञापियों को हुआ, जिन्होंने भारी निवेश कर लाइसेंस प्राप्त किए थे। विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यदि यह स्थिति यूं ही बनी रहती तो न केवल लाइसेंसियों का व्यवसाय संकट में पड़ता, बल्कि राज्य के राजस्व पर भी नकारात्मक असर पड़ता। इसी को ध्यान में रखते हुए आबकारी विभाग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि मॉल या स्थायी व्यावसायिक परिसरों में एफएल-11 लाइसेंस पर बार संचालन कर रहे संचालक स्थायी एफएल-7 लाइसेंस के लिए शीघ्र आवेदन करें। इसके साथ ही सभी एफएल-11 लाइसेंसियों को एसओपी में उल्लिखित सभी शर्तों और दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करने को कहा गया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि नियमों की अनदेखी किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
नई व्यवस्था के तहत समारोह बार अनुज्ञापियों के लिए अग्नि सुरक्षा अनापत्ति प्रमाण पत्र को अनिवार्य कर दिया गया है। बिना अग्नि सुरक्षा एनओसी के किसी भी तरह के आयोजन की अनुमति नहीं दी जाएगी। इसके अलावा रेस्टोरेंट और बार में ‘अपनी बोतल स्वयं लाने’ की व्यवस्था पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब शराब केवल वैध स्रोत से ही खरीदी और परोसी जा सकेगी, जिससे अवैध बिक्री और कर चोरी पर अंकुश लगेगा। आबकारी विभाग ने मूल्य निर्धारण को लेकर भी सख्ती दिखाई है। नियम के अनुसार शराब की बोतल निर्धारित खुदरा मूल्य से कम से कम 20 प्रतिशत अधिक मूल्य पर ही परोसी जा सकेगी। इससे कम दर पर बिक्री पाए जाने पर संबंधित बार या रेस्टोरेंट के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह प्रावधान फिलहाल लखनऊ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर और आगरा जैसे प्रमुख शहरों में लागू किया गया है, जहां बार-रेस्टोरेंट संस्कृति का सबसे अधिक प्रभाव शराब कारोबार पर पड़ा है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस नीति से सबसे बड़ा फायदा उन अनुज्ञापियों को होगा, जो दुकान खोलकर बैठे हैं और वैध तरीके से शराब की बिक्री कर रहे हैं। चूंकि बार और रेस्टोरेंट में आमतौर पर उच्च आय वर्ग के लोग जाते हैं, वहां कीमतें बढ़ने और नियम सख्त होने के बाद एक बड़ा वर्ग फिर से लाइसेंसी दुकानों से शराब खरीदने को प्राथमिकता देगा। इससे न केवल दुकानदारों का राजस्व बढ़ेगा, बल्कि आबकारी विभाग की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी। कुल मिलाकर आबकारी विभाग की यह कार्यप्रणाली स्पष्ट संदेश देती है कि अब शराब कारोबार में अनुशासन, पारदर्शिता और वैधता से कोई समझौता नहीं होगा। लाइसेंसियों के हितों की रक्षा और सरकारी राजस्व को मजबूत करने की दिशा में इसे एक बड़ा और दूरगामी फैसला माना जा रहा है।

जिला आबकारी अधिकारी
गौतमबुद्ध नगर
आबकारी विभाग का उद्देश्य शराब कारोबार को पूरी तरह अनुशासित, पारदर्शी और नियमबद्ध बनाना है। जिन अनुज्ञापियों ने भारी निवेश कर वैध रूप से लाइसेंस प्राप्त किए हैं, उनके हितों की रक्षा विभाग की प्राथमिकता है। बार और रेस्टोरेंट में अनियंत्रित बिक्री, अवैध ऑफर और नियमों की अनदेखी से न केवल लाइसेंसियों को नुकसान हो रहा था, बल्कि सरकारी राजस्व भी प्रभावित हो रहा था। नई व्यवस्था के तहत यह सुनिश्चित किया गया है कि शराब केवल वैध स्रोत से, तय मूल्य और निर्धारित शर्तों के अनुसार ही परोसी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी लाइसेंसधारकों को एसओपी का सख्ती से पालन करना होगा और किसी भी प्रकार की अनियमितता पाए जाने पर विभाग कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा। यह नीति राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ शराब कारोबार में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और संतुलन स्थापित करेगी।
सुबोध कुमार श्रीवास्तव
जिला आबकारी अधिकारी
गौतमबुद्ध नगर।















