जनहित की दिशा में बड़ी पहल: अकबरपुर-बहरामपुर में बनेगी गौशाला, निगम वाहनों के लिए पार्किंग भी तैयार

-नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने रिक्त भूमि पर जनकल्याणकारी योजनाएं शुरू करने के दिए निर्देश
-32 हेक्टेयर भूमि पर विशाल गौशाला और 4 एकड़ क्षेत्र में निगम पार्किंग का होगा निर्माण

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद नगर निगम की रिक्त पड़ी जमीनों को अब जनहित में इस्तेमाल करने की तैयारी जोर पकड़ रही है। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने सोमवार को नगर निगम की संपत्ति का स्थलीय निरीक्षण कर अकबरपुर-बहरामपुर और मेवला अगरी में जमीनों के उपयोग को लेकर अधिकारियों संग मंथन किया और स्पष्ट निर्देश दिए कि इन भूमियों का उपयोग गौशाला और निगम पार्किंग जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जाए। निरीक्षण के दौरान अपर नगर आयुक्त जंग बहादुर, अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, संपत्ति प्रभारी पल्लवी सिंह और संपत्ति अधीक्षक रामशंकर वर्मा समेत कई अधिकारी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने टीम के साथ विजयनगर क्षेत्र में स्थित अकबरपुर-बहरामपुर की खसरा संख्या-158 में लगभग 4 एकड़ भूमि का स्थलीय निरीक्षण किया और वहां नगर निगम के वाहनों के लिए पार्किंग स्थल विकसित करने के निर्देश दिए। यह निर्णय शहर में ट्रैफिक और निगम संचालन से जुड़ी समस्याओं के समाधान में एक अहम कड़ी साबित होगा।

वहीं दूसरी ओर, मोहन नगर क्षेत्र के मेवला अगरी में नगर निगम की लगभग 32 हेक्टेयर भूमि है। इस क्षेत्र में रेनिवेल के अंतर्गत लगभग 10 एकड़ भूमि पर बड़ी गौशाला बनाने की योजना तैयार की जा रही है। नगर आयुक्त ने कहा कि यह गौशाला न केवल बेसहारा गौवंश की देखभाल के लिए उपयोगी होगी, बल्कि शहर में पशु संरक्षण की दिशा में एक आदर्श मॉडल भी प्रस्तुत करेगी। नगर आयुक्त ने इस दौरान अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन दोनों क्षेत्रों की भूमियों की सीमांकन (बाउंड्रीवाल) तत्काल कराई जाए, ताकि किसी प्रकार का अतिक्रमण दोबारा न हो और योजनाएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकें। उन्होंने स्पष्ट कहा कि नगर निगम संपत्ति विभाग लगातार उन भूखंडों पर पुन: कब्जा लेने का कार्य कर रहा है, जो पूर्व में अतिक्रमण की चपेट में थे।

अब इन बहुमूल्य संपत्तियों को नगरहित में प्रयोग में लाया जाएगा, ताकि जनता को सीधा लाभ पहुंच सके। नगर आयुक्त ने टीम से यह भी कहा कि दोनों स्थानों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए, ताकि प्रस्तावों को आगे की प्रक्रिया में तेजी से लाया जा सके। गाजियाबाद नगर निगम का यह कदम न केवल अव्यवस्थित शहरी विकास को नियंत्रित करेगा, बल्कि जनसेवा और पशु कल्याण के क्षेत्र में भी एक नई मिसाल स्थापित करेगा। इन योजनाओं के सफल क्रियान्वयन से गाजियाबाद नगर निगम की छवि एक सक्रिय और जनहितकारी संस्था के रूप में और अधिक मजबूत होगी।