– पारस हॉस्पिटल द्वारा आयोजित हेल्थ टॉक्स कार्यक्रम में बोले डॉ. संजय जीवन के प्रथम 1000 दिन हैं बेहद जरूरी
– आइडेंटिफिकेशन एंड ट्रैकिंग ऑफ चिल्ड्रेन विद सीवर एक्यूट माल न्यूट्रीशन विषय पर हुई चर्चा
– पोषण माह के अंतर्गत जागरूकता फैलाने के लिए पारस हॉस्पिटल ने किया कार्यक्रम का आयोजन
– बच्चों का गर्भ में बिताया 270 दिन और जन्म के बाद के 730 दिन जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण
उदय भूमि ब्यूरो
पटना। आप कितना स्वस्थ रहेंगे यह आपका बचपन तय करता है। स्वस्थ जीवन के लिए बचपन का पोषण बेहद जरूरी है। जीवन की शुरूआत के 1000 दिन बेहद जरूरी है। बच्चे का गर्भ में बिताया हुआ 270 दिन और जन्म के बाद के 730 दिन काफी महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान पोषण की कमी का खामियाजा जीवनपर्यंत भुगतना पड़ता है। ऐसे में हमें बचपन की देखभाल बेहद ही संजीदगी के साथ करनी चाहिये। पारस हॉस्पिटल द्वारा आयोजित हेल्थ टॉक्स कार्यक्रम में डॉ. संजय मिश्र ने यह बातें कही। आइडेंटिफिकेशन एंड ट्रैकिंग ऑफ चिल्ड्रेन विद सीवर एक्यूट माल न्यूट्रीशन विषय पर हुई चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि बच्चों में कुपोषण की शुरूआत गर्भावस्था में ही हो जाती है। बेहद जरूरी है कि गर्भधारण के बाद गर्भवती महिला की अच्छी से देखभाल की जाये और इस बात का ध्यान रखा जाये कि उसे उचित और पर्याप्त पौष्टिक आहार मिले। बच्चे के जन्म लेने के बाद से दो वर्ष तक उसकी भरपूर देखभाल जरूरी है।
संतुलित आहार व नियमित व्यायाम से डायबिटीज को रखें नियंत्रित: डॉ. संजय मिश्र
केंद्र सरकार द्वारा चलाये जा रहे पोषण माह के अंतर्गत महिलाओं एवं बच्चों के पोषण के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पारस हॉस्पिटल द्वारा यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। फेसबुक लाइव के जरिये ऑनलाइन चर्चा करते हुए डॉ. मिश्र ने कहा कि कुपोषण एक गंभीर स्थिति है। जब शरीर की आवश्यकता अनुसार पोषक तत्व की प्राप्ति नहीं होती है तब कुपोषण की स्थिति पैदा होती है। जब भोजन के द्वारा हमें सभी आवश्यक तत्व जैसे काबोर्हाइड्रेट, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन एवं मिनिरल नहीं मिलते हैं तो कुपोषण की स्थिति पैदा होती है।
बच्चों का वजन एवं लंबाई उम्र के हिसाब से नहीं बढऩे का प्रमुख कारण कुपोषण होता है। कुपोषण के कारण शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है और कई तरह की बीमारियां होने की संभावना बढ़ जाती है। बच्चों में कुपोषण के कारण शारीरिक विकास के साथ-साथ मानसिक विकास भी अवरूद्ध हो जाता है।
डॉ. संजय मिश्र ने कहा कि बच्चों के लिए मां का दूध बेहद जरूरी है। सामान्य प्रसव के मामले में जन्म के आधे घंटे में और सी-सेक्शन में 4 से 5 घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कर देना चाहिए। पर्याप्त और संतुलित भोजन देना चाहिये। इसके अलावा साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखना चाहिये।
















