-गाजियाबाद कमिश्नरेट में जनता के लिए खुला भरोसेमंद मंच, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण से बढ़ा पुलिस पर विश्वास
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुलिस आयुक्त कमिश्नरेट गाजियाबाद के निर्देशों को धरातल पर उतारते हुए पुलिस उपायुक्त (नगर) धवल जायसवाल ने जनता की शिकायतों के निस्तारण का एक नया और अनोखा तरीका अपनाया है। अपने कार्यालय में रोजाना आने वाले शिकायतकर्ताओं से वे न केवल आमने-सामने बातचीत करते हैं, बल्कि उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनकर तुरंत संबंधित विभाग या थाना प्रभारी को गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश देते हैं। श्री जायसवाल का यह प्रत्यक्ष संवाद लोगों के लिए एक उम्मीद की किरण बन चुका है। जहां पहले कई लोग अपनी शिकायत दर्ज कराने के बाद लंबे समय तक कार्रवाई की प्रतीक्षा करते थे, वहीं अब उन्हें त्वरित सुनवाई और समाधान का भरोसा मिल रहा है।
कार्यालय में आने वाले लोगों का कहना है कि यह पहल पुलिस और जनता के बीच की दूरी को कम कर रही है। स्थानीय निवासी राजेश कुमार ने कहा कि पहले हमें अपनी बात कहने के लिए कई बार थाने और दफ्तर के चक्कर लगाने पड़ते थे। अब डीसीपी साहब खुद हमारी बात सुनते हैं और तुरंत आदेश देते हैं, जिससे हमें लगता है कि हमारी समस्या को गंभीरता से लिया जा रहा है। शिकायत सुनने की यह खुली व्यवस्था खासतौर पर उन लोगों के लिए राहत का माध्यम बनी है जो पुलिस के ऊपरी अधिकारियों तक अपनी बात पहुंचाने में कठिनाई महसूस करते थे।
मुद्दों के समाधान में समयबद्धता प्राथमिकता
डीसीपी नगर का मानना है कि शिकायतों का निस्तारण केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि यह पुलिस की जिम्मेदारी और जनता के प्रति वचनबद्धता का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि किसी भी समस्या को लंबा खींचने से जनता का विश्वास कमजोर होता है। मेरा प्रयास है कि हर शिकायत का समाधान निर्धारित समयसीमा में हो और उसकी गुणवत्ता पर भी पूरा ध्यान दिया जाए।
कार्रवाई की पारदर्शी प्रक्रिया
शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित अधिकारी को न केवल मौखिक निर्देश दिए जाते हैं, बल्कि उसका फॉलो-अप भी किया जाता है, ताकि कार्रवाई में कोई ढिलाई न रहे। इस प्रक्रिया से शिकायतकर्ता को यह आश्वासन मिलता है कि उनकी समस्या फाइलों में दबकर नहीं रह जाएगी।
जनता में सकारात्मक संदेश
गाजियाबाद कमिश्नरेट में यह पहल पुलिस की संवेदनशील छवि को और मजबूत कर रही है। कई सामाजिक संगठनों ने इसे पुलिस-जन विश्वास का मजबूत उदाहरण बताते हुए सराहना की है। आम नागरिकों का मानना है कि ऐसे ‘जन संवादÓ कार्यक्रम पुलिस को और अधिक जवाबदेह और जनता के करीब ला सकते हैं।
















