1 जनवरी से बिना क्यूआर कोड नहीं चलेंगे ई-रिक्शा, ट्रैफिक पुलिस का बड़ा फैसला

-महिला सुरक्षा और यातायात सुधार के लिए क्यूआर कोड अनिवार्य, बिना कोड ई-रिक्शा पर होगी कार्रवाई : त्रिगुण बिसेन
-यूनिक क्यूआर कोड से जुड़ेगा हर ई-रिक्शा, महिला सुरक्षा और यातायात व्यवस्था होगी और मजबूत

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शहर की यातायात व्यवस्था को सुरक्षित, अनुशासित और पारदर्शी बनाने की दिशा में गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस ने एक अहम कदम उठाया है। अब शहर में एक जनवरी से बिना यूनिक क्यूआर कोड के कोई भी ई-रिक्शा सड़क पर संचालित नहीं हो सकेगा। ट्रैफिक पुलिस द्वारा ई-रिक्शा चालकों और स्वामियों को यूनिक क्यूआर कोड जारी किए जा रहे हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि 31 दिसंबर के बाद बिना क्यूआर कोड पाए जाने पर ई-रिक्शा चालकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन ने बताया कि यह पहल शहर में तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शा संचालन को नियंत्रित करने और अव्यवस्था पर रोक लगाने के उद्देश्य से शुरू की गई है। उन्होंने कहा ई-रिक्शा सार्वजनिक परिवहन का अहम हिस्सा बन चुके हैं, लेकिन इनके अनियंत्रित संचालन से यातायात जाम, अवैध पार्किंग और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने आ रही थीं। यूनिक क्यूआर कोड व्यवस्था से हर ई-रिक्शा की स्पष्ट पहचान सुनिश्चित की जाएगी। डीसीपी ट्रैफिक ने बताया कि प्रत्येक ई-रिक्शा को एक विशिष्ट क्यूआर कोड से जोड़ा जा रहा है। इस क्यूआर कोड को स्कैन करते ही ई-रिक्शा चालक का नाम, फोटो, मोबाइल नंबर, वाहन का पंजीकरण, परमिट और अन्य आवश्यक विवरण सामने आ जाएंगे। इस व्यवस्था से यात्रियों को यह भरोसा मिलेगा कि वे किसी अधिकृत और पंजीकृत ई-रिक्शा में यात्रा कर रहे हैं।

त्रिगुण बिसेन ने कहा कि यह व्यवस्था महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी। क्यूआर कोड के जरिए चालक की पहचान सुनिश्चित होने से महिलाओं के साथ छेड़छाड़, दुर्व्यवहार या अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी। किसी भी आपात स्थिति में ई-रिक्शा और चालक की पहचान कर तुरंत पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगीा। ट्रैफिक पुलिस का मानना है कि क्यूआर कोड व्यवस्था से ई-रिक्शा के निर्धारित रूट, नो-एंट्री जोन और यातायात नियमों के पालन पर प्रभावी निगरानी रखी जा सकेगी। इससे शहर में जाम की समस्या, अव्यवस्थित पार्किंग और नियम उल्लंघन की घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है।

किसी भी दुर्घटना या आपराधिक घटना की स्थिति में क्यूआर कोड के माध्यम से ई-रिक्शा की पहचान कर त्वरित वैधानिक कार्रवाई संभव हो सकेगी। इस पहल से शहर में अवैध और बिना पंजीकरण चल रहे ई-रिक्शा पर भी प्रभावी रोक लगेगी। केवल वही ई-रिक्शा सड़क पर चल सकेंगे, जिनका पंजीकरण पूरा होगा और जिन पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा जारी क्यूआर कोड लगा होगा। इससे सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगी। डीसीपी ट्रैफिक त्रिगुण बिसेन ने ई-रिक्शा चालकों और स्वामियों से अपील करते हुए कहा कि सभी चालक और स्वामी समय रहते क्यूआर कोड प्राप्त कर अपने ई-रिक्शा पर अनिवार्य रूप से लगवाएं। 31 दिसंबर के बाद बिना क्यूआर कोड पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी, जिसके लिए चालक स्वयं जिम्मेदार होंगे।

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त्रिगुण बिसेन
डीसीपी ट्रैफिक

शहर में ई-रिक्शा संचालन को सुरक्षित, व्यवस्थित और भरोसेमंद बनाने के लिए यातायात पुलिस ने यूनिक क्यूआर कोड व्यवस्था लागू की है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य यात्री सुरक्षा, विशेषकर महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। प्रत्येक ई-रिक्शा को एक विशिष्ट क्यूआर कोड से जोड़ा जा रहा है, जिससे चालक और वाहन की पहचान पूरी तरह से सत्यापित हो सके। क्यूआर कोड को स्कैन करते ही ई-रिक्शा चालक का नाम, फोटो, मोबाइल नंबर, वाहन पंजीकरण और परमिट की जानकारी तुरंत उपलब्ध होगी। इससे यात्रियों को यह भरोसा मिलेगा कि वे किसी अधिकृत और पंजीकृत ई-रिक्शा में सफर कर रहे हैं। किसी भी संदिग्ध या आपात स्थिति में वाहन और चालक की पहचान कर तुरंत पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी। महिला सुरक्षा के दृष्टिकोण से यह व्यवस्था अत्यंत महत्वपूर्ण है। चालक की पहचान सुनिश्चित होने से छेड़छाड़, दुर्व्यवहार और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम में प्रभावी मदद मिलेगी। शिकायत मिलने पर त्वरित कार्रवाई संभव होगी। इसके साथ ही यह व्यवस्था यातायात नियंत्रण को भी मजबूत करेगी। नियम उल्लंघन, अवैध संचालन और अव्यवस्थित पार्किंग पर प्रभावी अंकुश लगेगा। सभी ई-रिक्शा चालकों और स्वामियों से अपील है कि वे समय रहते क्यूआर कोड प्राप्त कर अपने वाहन पर लगवाएं। 1 जनवरी से बिना क्यूआर कोड ई-रिक्शा का संचालन प्रतिबंधित रहेगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी।
त्रिगुण बिसेन
डीसीपी ट्रैफिक