पुरानी पेंशन बहाली की गूँज: गाजियाबाद से सैकड़ों शिक्षक जंतर-मंतर के लिए रवाना, सरकार की सख्ती ने बढ़ाया आंदोलन का तापमान

-अटेवा संगठन का ऐलान- ‘जब तक पुरानी पेंशन बहाल नहीं, संघर्ष हर मोर्चे पर जारी रहेगा ‘

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। पुरानी पेंशन बहाली तथा ‘शिक्षा का अधिकार’ अधिनियम लागू होने से पूर्व शिक्षक पात्रता परीक्षा न कराने की माँग को लेकर मंगलवार को नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर विशाल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। इसके लिए गाजियाबाद जनपद की अटेवा (राष्ट्रीय आन्दोलन पुरानी पेंशन व्यवस्था) इकाई तथा शिक्षकों के संघर्ष संगठन एनएमओपीएस के सक्रिय सदस्य नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी प्रात:काल गाजियाबाद से दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गए। सभी शिक्षक उत्साह, रोष और दृढ़ संकल्प के साथ पुरानी पेंशन बहाली की माँग को बुलंद करने निकले। धरने से पूर्व दिल्ली-एनसीआर में जिस प्रकार कई जनपदों के अटेवा पदाधिकारियों को नजरबंद किया गया और आंदोलन को कमजोर करने हेतु सरकार द्वारा एक दिन पहले विशेष शिविर आयोजित कर माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया गया, उससे शिक्षकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। शिक्षकों का कहना है कि यह कदम स्पष्ट करता है कि सरकार पुरानी पेंशन बहाली की प्रबल होती मांग से भयभीत है और आंदोलन को दबाने के प्रयास कर रही है।

नेताओं ने कहा कि जहाँ जनप्रतिनिधियों को चार-चार पेंशनों का लाभ मिलता है, वहीं 30 से 40 वर्षों तक देश की सेवा करने वाला कर्मचारी जब सेवानिवृत्त होता है तो उसे बाज़ार आधारित नई पेंशन योजना में धकेल दिया जाता है। इस व्यवस्था में कर्मचारी का भविष्य पूर्णत: बाजार के उतार-चढ़ाव पर निर्भर कर दिया गया है, जो अत्यंत अनुचित और असुरक्षित है। इसी कारण सरकारी शिक्षकों, कर्मचारियों और अधिकारियों में नई पेंशन योजना के प्रति गहरा रोष व्याप्त है। अटेवा और नमोप्स संगठनों ने दोहराया कि उनका यह संघर्ष केवल पेंशन व्यवस्था तक सीमित नहीं, बल्कि कर्मचारी सम्मान, सुरक्षित भविष्य और सामाजिक न्याय से जुड़ा व्यापक मुद्दा है। उन्होंने घोषणा की कि पुरानी पेंशन बहाल होने तक उनका आंदोलन बिना रुके हर मोर्चे पर जारी रहेगा।

गाजियाबाद से जंतर-मंतर के लिए रवाना रैली का नेतृत्व जिले के वरिष्ठ नेताओं ने किया। इनमें जिलाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा, जिला वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमित कुमार त्यागी, वरिष्ठ सलाहकार प्रमोद कुमार बंसल, जिला अध्यक्ष महिला प्रकोष्ठ मीनू शर्मा, दीपक चौबियान, संयुक्त मंत्री जयवर्धन सिंह, जिला प्रवक्ता प्रमोद पाठक, ब्लॉक अध्यक्ष भोजपुर राजपाल यादव, उपाध्यक्ष अजय कुमार, तथा संयुक्त मंत्री राकेश कुमार प्रमुख रूप से शामिल रहे। इनके साथ शिक्षकों और कर्मचारियों का उत्साहपूर्ण दल दर्जनों वाहनों में नारे लगाते हुए दिल्ली के लिए प्रस्थान कर गया। रैली को लेकर शिक्षकों में ऊर्जा और जोश देखते ही बनता था।  ‘पुरानी पेंशन हमारी माँग-नहीं किसी से भीख माँग’ और ‘सेवा के बदले सम्मान दो, पुरानी पेंशन लागू करो’ जैसे नारे पूरे मार्ग में गूंजते रहे। रैली में शामिल शिक्षकों का कहना था कि नई पेंशन योजना कर्मचारी हितों पर कुठाराघात है और इसे समाप्त करना समय की जरूरत है।

धरना-स्थल को लेकर प्रशासन की चाक-चौबंद व्यवस्थाओं के बीच पूरे प्रदेश से आए शिक्षकों ने आज अपनी आवाज एक स्वर में बुलंद की और सरकार को चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और अधिक व्यापक स्वरूप लेगा। जिलाध्यक्ष मनीष शर्मा ने कहा देश के निर्माण में शिक्षक की भूमिका मूल स्तंभ की है। ऐसे में उसका भविष्य सुरक्षित होना चाहिए।  ‘जो शिक्षक देश का भविष्य बनाता है, उसका खुद का भविष्य बाजार के हवाले नहीं हो सकता ‘-इस भाव ने आज के धरने को और अधिक मुखर बना दिया। गाजियाबाद से रवाना हुई यह रैली पुरानी पेंशन बहाली के प्रति बढ़ती जागरूकता और बढ़ते जनसमर्थन का प्रतीक बनी। जंतर-मंतर पर इस संगठित शक्ति का प्रदर्शन राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष एक मजबूत संदेश है कि कर्मचारी समाज अब अपने अधिकारों के लिए पीछे हटने वाला नहीं है।