नई दिल्ली। खतरनाक नशे का दानव देश को जैसे चुनौती दे रहा है कि बचा सको तो बचा लो अपनी जवान हो रही पीढ़ी को। आज के युवा कल के भविष्य कहलाएंगे अगर भारत के युवा वर्ग गलत कामों में, नशे में आ जाए तो हमारे समाज का विकास कैसे होगा। आज के समय में हमारा समाज युवा नशे की लत के ज्यादा शिकार है। समाज एवं राष्ट्र के पुनर्निर्माण में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। संरक्षण के अभाव में छोटी सी उम्र से ही नशा की लत में पड़ने से उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है। जिससे वे राष्ट्र निर्माण के वाहक न रहकर विध्वंस और अव्यवस्था के प्रतीक बन रहे हैं। शहरी क्षेत्र एवं प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों युवाओं की कौन कहे छोटे-छोटे बच्चे नशे की लत की चिंता का विषय है। छोटे-छोटे बच्चे मादक पदार्थों के आदी होते जा रहे हैं। उक्त बातें भारत सरकार स्वास्थ्य मंत्रालय में डिप्टी कमिश्नर एवं आईएमए ईस्ट दिल्ली ब्रांच के उपाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार विमल ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में युवाओं को जागरुक करते हुए कहीं।
उपाध्यक्ष डॉ. सुशील कुमार विमल ने कहा आज युवाओं के नशे का मुख्य कारण यह है कि अपने सहनशीलता की कमी। देश का युवा वर्ग आज नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। युवा आजकल बहुत जल्दी अपना हौसला खो देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि वे डिप्रेशन में चले जाते और फिर वे नशे की गिरफ्त में फंस जाते हैं। अपने जीवन में कई बार लोग लगातार मिल रही असफलताओं से घबरा जाते हैं और इस कारण वे भविष्य में मिलने वाली सफलताओं की संभावना को खो देते हैं। फिर किस्मत और समय को दोष देते हैं। गलत संगत में पड़कर नशे को फैशन मान लेना युवा वर्ग की सबसे बड़ी कमजोरी है। दूसरों की देखा-देखी भी लोग नशा करने लग जाते हैं। अपने आपको आधुनिक बनाने के लिए नशे का सहारा लेने लगते हैं, जो कि गलत है। इसके लिए जरूरी है कि युवा अपने आपको मजबूत बनाएं और गलत संगति से बचें। उन्होंने कहा हर वर्ष 26 जून को अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस मनाया जाता है। आज सरकार और बहुत सारी ऐसी संस्थान है, जो युवा पीढिय़ों को नशा मुक्त करवाने के लिए कार्य कर रही है। लेकिन उनके साथ युवा पीढ़ी को भी समझने की जरूरत है कि वह खुद को कैसे नशे से दूर रहकर देश की तरक्की में अपना योगदान दें सकते हैं।
अंतरराष्ट्रीय नशा निषेध दिवस नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध नशीली दवाओं के व्यापार से मुक्त दुनिया को प्राप्त करने में कार्रवाई और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए मनाया जाता है। वर्ष 2021 में दुनिया भर में 15-64 आयु वर्ग के 17 में से 1 व्यक्ति ने नशीली दवाओं का उपयोग किया। उपयोगकर्ताओं की संख्या 2011 में 240 मिलियन से बढ़कर 2021 में 296 मिलियन हो गई (15-64 आयु वर्ग की वैश्विक आबादी का 5.8 प्रतिशत)। 219 मिलियन उपयोगकर्ताओं (वयस्कों का 4.3 प्रतिशत) के साथ कैनबिस सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली दवा है, जबकि गंभीर नुकसान और घातक ओवरडोज से जुड़े ओपिओइड के 60 मिलियन गैर-चिकित्सा उपयोगकर्ता थे। विभिन्न दवाएं स्वास्थ्य प्रणालियों को भिन्न-भिन्न प्रकार से प्रभावित करती हैं, जिनमें अधिकांश विकार कैनबिस और ओपिओइड से जुड़े होते हैं। 2021 में, 13.2 मिलियन लोगों ने नशीली दवाओं का इंजेक्शन लगाया, जो 35 गुना अधिक एचआईवी जोखिम का सामना कर रहे थे, जो नए हेपेटाइटिस सी संक्रमणों में 23 प्रतिशत का योगदान था।
युवा लोगों सहित कमजोर आबादी को सबसे अधिक परेशानी होती है। नशीली दवाओं का उपयोग करने वालों और मादक द्रव्यों के दुरुपयोग से पीड़ित लोगों को बार-बार दवाओं, कलंक और कठोर प्रतिक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। डॉ. सुशील कुमार विमल ने बताया नशीली दवाओं का दुरुपयोग तब होता है, जब किसी दवा का उपयोग इच्छित उद्देश्य के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए किया जाता है या अत्यधिक मात्रा में किया जाता है। नशीली दवाओं के सेवन से अवसाद, चिड़चिड़ापन, वजन घटना और दौरे पड़ने जैसे दुष्परिणाम हो सकते हैं। नशे की सुई लगाने का मतलब है कि नशीली दवा को सुई और सिरिंज के जरिये शरीर में पहुंचाना। इसके साथ ही खुद के द्वारा लगाई नशीली दवा को सुई और सिरिंज को अपने पार्टनर को देना। इन सबसे गंभीर बीमारी होती है। जिसका परिणाम बहुत ही घातक होता है।
नशीली दवाओं का उपयोग आपके स्वास्थ्य, रिश्तों, नौकरियों और शिक्षा को प्रभावित कर सकता है। इसकी रोकथाम के लिए थेरेपी, माइंडफुलनेस अभ्यास, व्यायाम व योग शामिल हो सकते हैं। जिस देश की युवा पीढ़ी ही गलत रास्ते पर चलने लगेगी तो देश का भविष्य अंधकारमय की ओर चला जाता है। यदि हमें समाज को उन्नति के मार्ग पर ले जाना है तो हर प्रकार के नशे को जीवन से बचाना है। नशा एक बुराई है, इस बुराई से लड़ने के लिए समाज के सभी लोगों को एकजुट होना होगा, तभी इस अभिशाप को जड़ से खत्म कर सकते है। नशा शरीर के लिए जहां खतरनाक है, वहीं अपराध का भी मुख्य कारण है। उन्होंने कहा स्कूल, कॉलेज, अस्पताल के आस-पास सिगरेट, शराब, नशीली दवाओं एवं अन्य तंबाकू उत्पाद एवं मेडिकल स्टोर से अनुसूचित एच एवं एक्स ड्रग्स की बिक्री पर पूरी तरह से रोक लगाना बेहद जरुरी है।
इस वर्ष की थीम, साक्ष्य स्पष्ट है: रोकथाम में निवेश, वैश्विक दवा समस्या पर प्रकाश डालता है, जीवन में शुरुआती शुरुआत से ही निवारक उपायों पर ध्यान केंद्रित किया जाना चाहिए। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय मादक द्रव्यों के सेवन से संबंधित निवारक शिक्षा, जागरूकता, क्षमता निर्माण, उपचार और पुनर्वास पर काम करने वाले संगठनों का समर्थन करता है। नशीली दवाओं के दुरुपयोग के निवारक उपायों में नशीली दवाओं के खतरों पर शिक्षा कार्यक्रम, जोखिम वाले व्यक्तियों के लिए शीघ्र हस्तक्षेप, स्वस्थ जीवन शैली को बढ़ावा देने वाली सामुदायिक पहल और मानसिक स्वास्थ्य सहायता के साथ पारिवारिक संबंधों को मजबूत करना शामिल है।




















