स्वर्णजयंतीपुरम से कपूर्रीपुरम तक: जीडीए ने नागरिक सुविधाओं का नियंत्रण नगर निगम को सौंपा

-जीडीए उपाध्यक्ष और नगर आयुक्त ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर विधिवत हैंडओवर किया
-66 करोड़ 32 लाख रुपये के वित्तीय संसाधन के साथ संपत्तियों का संचालन और अनुरक्षण नगर निगम के जिम्मे

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। आखिरकार गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की कई प्रमुख योजनाएं नगर निगम के नियंत्रण में आ गई हैं। बुधवार को जीडीए की स्वर्णजयंतीपुरम योजना, कपूर्रीपुरम योजना, गोविंदपुरम योजना, राजनगर एक्सटेंशन की मुख्य सड़कें, प्रताप विहार और 56 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) समेत कुल 6 योजनाओं का विधिवत हस्तांतरण नगर निगम को कर दिया गया। इस महत्वपूर्ण ऐतिहासिक अवसर पर जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल और नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने संयुक्त रूप से हस्ताक्षर कर योजनाओं के हैंडओवर को औपचारिक रूप दिया। इस अवसर पर जीडीए सचिव विवेक कुमार मिश्रा, फाइनेंस कंट्रोलर अशोक कुमार वाजपेयी, प्रभारी चीफ इंजीनियर आलोक रंजन, अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार, नगर निगम के अपर नगर आयुक्त अवनींद्र कुमार, चीफ इंजीनियर निर्माण एनके चौधरी, जलकल महाप्रबंधक केपी आनंद, उद्यान प्रभारी डॉ. अनुज कुमार सिंह और प्रकाश प्रभारी आस कुमार सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

जीडीए उपाध्यक्ष नंद किशोर कलाल ने कहा कि यह हस्तांतरण न केवल योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि शहर में नागरिक-केंद्रित और पारदर्शी शहरी प्रबंधन को भी मजबूत करेगा। उन्होंने बताया कि हैंडओवर की गई सभी योजनाओं के तकनीकी अभिलेख, ड्रॉइंग्स, संचालन एवं अनुरक्षण से संबंधित दस्तावेज नगर निगम को उपलब्ध कराए गए हैं।  उन्होंने कहा इससे भविष्य में इन क्षेत्रों में नागरिक सुविधाओं का संचालन, रख-रखाव और विकास कार्य निरंतर और व्यवस्थित रूप से किया जा सकेगा। जीडीए द्वारा नगर निगम को हैंडओवर की गई योजनाओं के लिए कुल 66 करोड़ 32 लाख रुपये की धनराशि भी उपलब्ध कराई जाएगी। फरवरी में 33.16 करोड़ रुपये और मार्च में शेष 33.16 करोड़ रुपये नगर निगम को प्रदान किए जाएंगे। इस वित्तीय संसाधन का उपयोग सफाई, सड़क निर्माण, सीवरेज एवं जल निकासी, हरित विकास, यातायात व्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में किया जाएगा। विशेष रूप से 56 एमएलडी क्षमता वाले एसटीपी के संचालन से सीवरेज निस्तारण की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा और जल प्रदूषण नियंत्रण में मदद मिलेगी।

नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि जीडीए और नगर निगम के बीच यह समझौता नागरिक सुविधाओं को और अधिक सक्षम, उत्तरदायी और पारदर्शी बनाने का एक महत्वपूर्ण कदम है। हम सुनिश्चित करेंगे कि हैंडओवर की गई सभी योजनाओं का संचालन, रख-रखाव और विकास लगातार सुचारू और व्यवस्थित रहे। हमारी प्राथमिकता नागरिकों की सुविधा और शहर के समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नगर निगम द्वारा 1 अप्रैल 2026 से सभी हैंडओवर की गई सुविधाओं जैसे सड़कें, नालियां, ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक, सीवर लाइन, पार्क और ग्रीन बेल्ट का पूर्ण संचालन मान्य होगा। इन हस्तांतरित योजनाओं में स्वर्णजयंतीपुरम, कपूर्रीपुरम, गोविंदपुरम के विभिन्न ब्लॉक, प्रताप विहार और राजनगर एक्सटेंशन की मुख्य सड़कें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, भाऊराव देवरस योजना के ब्लॉक-केए और केबी ब्लॉक, गोविंदपुरम के सी और पी ब्लॉक, प्रताप विहार सेक्टर-12 सहित अन्य महत्वपूर्ण निर्माण और पेयजल, स्ट्रीट लाइट तथा पार्क सुविधाओं का भी नगर निगम को हस्तांतरण किया गया।

जीडीए उपाध्यक्ष ने बताया कि प्राधिकरण का उद्देश्य केवल नई योजनाओं का विकास नहीं है, बल्कि विकसित परिसंपत्तियों को सक्षम निकायों के पास सौंपते हुए स्थाई और उत्तरदायी शहरी प्रबंधन सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि जीडीए भविष्य में भी इसी प्रकार योजनाबद्ध और समन्वित प्रयासों के माध्यम से शहर के समग्र विकास के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि हैंडओवर के बाद नगर निगम नागरिकों को बेहतर और निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी तकनीकी अभिलेख और वित्तीय संसाधन नगर निगम को उपलब्ध कराए गए हैं ताकि नागरिक सुविधाओं का संचालन और रख-रखाव बिना किसी रुकावट के हो। इस ऐतिहासिक कदम से गाजियाबाद के नागरिक अब और अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और उत्तरदायी शहरी प्रबंधन का लाभ उठा सकेंगे।