शराब माफियाओं के लिए ‘नो एंट्री ज़ोन’ बना गौतमबुद्ध नगर

-जहां तस्कर सोचते हैं रात है सुरक्षित, वहीं सुबोध श्रीवास्तव की टीम देती है धर-पकड़ की दस्तक
-रात हो या दिन आबकारी विभाग हर मोर्चे पर मुस्तैद, अवैध शराब के खिलाफ निर्णायक जंग

उदय भूमि संवाददाता
गौतमबुद्ध नगर। जिले में अवैध शराब के कारोबारियों के लिए अब कोई कोना सुरक्षित नहीं बचा है। एक ओर जहां तस्कर अंधेरे में अपने मुनाफे का खेल खेलना चाहते हैं, वहीं दूसरी ओर जिला आबकारी अधिकारी सुबोध कुमार श्रीवास्तव और उनकी स्पेशल टीम उन्हें हर मोड़ पर घेर रही है। आबकारी विभाग की कार्यशैली अब केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिणाम आधारित सक्रियता बन चुकी है। गौतमबुद्ध नगर में आबकारी विभाग अब केवल एक विभाग नहीं, बल्कि कानून की सशक्त रक्षा दीवार बन गया है, जो न केवल तस्करों को जेल भेज रहा है, बल्कि कानून की ताकत को भी ज़मीन पर उतार रहा है। सुबोध कुमार श्रीवास्तव जैसे अधिकारी की अगुवाई में जब टीम पूरी ऊर्जा के साथ मैदान में उतरती है, तो परिणाम बोलते हैं और तस्कर भागते हैं।

जिले में बीते 48 घंटे में तीन अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई कर तीन कुख्यात शराब तस्करों को गिरफ्तार किया गया, जिनके पास से हरियाणा व यूपी मार्का की कुल 187 अवैध शराब की टेट्रा पैक बोतलें और एक बाइक भी बरामद की गई। सोमवार की रात आबकारी निरीक्षक अखिलेश बिहारी वर्मा व थाना बीटा-2 की संयुक्त टीम ने एक बड़े ऑपरेशन को अंजाम देते हुए नेवादा-ऐछर रोड से अलीगढ़ निवासी तस्कर सनी पुत्र रामपाल को गिरफ्तार किया, जिसके पास से 45 टेट्रा पैक ‘कैटरीना’ ब्रांड देसी शराब जब्त की गई। इसके बाद मंगलवार को बीटा-नॉलेज पार्क कोंडली अंडरपास के पास सर्विस रोड पर तस्कर जोगेंद्र पुत्र चाउआ को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से 45 टेट्रा पैक ‘ट्विन टावर’ देसी शराब (यूपी मार्का) और एक बाइक बरामद हुई। इसी दिन दादरी थाना क्षेत्र के राजपूत गोलचक्कर से आबकारी निरीक्षक आशीष पांडेय व पुलिस टीम ने इमरान पुत्र मुस्तकीम को दबोचा, जिसके पास से 97 पव्वा 20-20 स्ट्रॉन्ग लिक्वर मेट्रो ब्रांड हरियाणा मार्का शराब बरामद की गई।

जिला आबकारी अधिकारी सुबोध श्रीवास्तव ने स्पष्ट किया कि तस्करी में शामिल हर शख्स को न सिर्फ गिरफ्तार किया जाएगा, बल्कि तस्करी में प्रयुक्त वाहनों को भी जब्त कर दिया जाएगा। चाहे वो दोपहिया हों या लाखों के चारपहिया वाहन कानून अब सख्ती से चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि तस्कर भले ही शराब की कीमत कुछ हज़ारों में जोड़ते हों, लेकिन जब जब्त वाहन लाखों का होता है, तो उनके अवैध धंधे की कमर टूट जाती है यही हमारी रणनीति है। सुबोध श्रीवास्तव की कार्यशैली में सख्ती के साथ-साथ निगरानी और प्रोएक्टिव इंटेलिजेंस भी शामिल है। हर अभियान से पहले पूरी रणनीति बनाई जाती है और फिर संयुक्त पुलिस टीमें मैदान में उतारी जाती हैं। उनकी यही शैली अब जिले को अवैध शराब मुक्त बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है।