यूनियन के खिलाफ जीडीए में कर्मचारियों का हल्लाबोल, 400 से अधिक कर्मचारियों ने हस्ताक्षर अभियान में लिया हिस्सा

-पदोन्नति, वेतन वृद्धि और वर्दी जैसी लंबित मांगों को लेकर कर्मचारियों में रोष
-16 सदस्य समिति ने यूनियन और अधिकारियों को 15 दिनों में समस्याओं का समाधान करने का अल्टीमेटम दिया 

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीबीडीए) में कर्मचारियों और कर्मचारियों की प्रतिनिधि यूनियन के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। कर्मचारियों ने वर्तमान अध्यक्ष श्रीचंद सारस्वत और यूनियन पर गंभीर आरोप लगाते हुए मोर्चा खोल दिया है। कर्मचारियों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर यूनियन के कामकाज और अधिकारियों की उदासीनता के खिलाफ ज्ञापन सौंपा। इस अभियान में नरेन्द्र कुमार शर्मा, राजकुमार, देवेन्द्र कुमार, कृष्णकांत राजन, जटा शंकर मिश्रा, दीपक, प्रमोद कुमार, राहुल कुमार, कृष्णपाल, महेश कुमार शर्मा, नरेश गिरि, सतीश तौमर, अजय कुमार सिंह, गोविंद शरण दुबे और चन्द्रपाल समेत सैकड़ों कर्मचारियों ने भाग लिया। गौरतलब है कि प्राधिकरण कर्मचारी संगठन का गठन 8 जून 2023 को हुआ था, लेकिन संगठन के द्वारा कर्मचारियों के हित में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जाने के कारण कर्मचारियों में रोष व्याप्त हो गया। 22 सितंबर 2025 को कर्मचारियों ने व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से बैठक बुलाई, लेकिन यूनियन के कोई भी पदाधिकारी उपस्थित नहीं हुए। इससे नाराजगी में सभी कर्मचारियों की सहमति से 16 सदस्यीय समिति का गठन किया गया।

समिति ने निर्णय लिया कि कर्मचारियों की समस्याओं को व्यापक रूप से यूनियन और अधिकारियों के समक्ष रखा जाए और हस्ताक्षर अभियान चलाया जाए। इस अभियान में प्राधिकरण में कार्यरत कुल 495 कर्मचारियों में से लगभग 400 कर्मचारियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया और अपने हस्ताक्षर किए। चतुर्थ श्रेणी समूह घ और तृतीय श्रेणी समूह ग के कर्मचारियों की पदोन्नति काफी समय से लंबित है। 2011 से पूर्व और 2011 में विनियमित कर्मचारियों की ए0सी0पी0 वेतन वृद्धि अभी तक नहीं लगाई गई। कर्मचारियों के खिलाफ बिना आरोप पत्र जारी किए निलंबन या एफआईआर दर्ज की जा रही है। चपरासी, स्वीपर, माली, चौकीदार, बेलदार, खानसामा और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वर्दी नहीं मिल रही। सेवानिवृत्ति पर बकाया धनराशि समय पर नहीं मिल रही। लगातार सेवानिवृत्तियों के कारण कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ रहा है और मानसिक दबाव के कारण बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। कुछ कर्मचारियों का निलंबन छह महीने से अधिक समय से जारी है और उनकी बहाली नहीं हो रही, जिससे उनका और उनके परिवार का जीवन प्रभावित हो रहा है।

गठित समिति ने यूनियन और प्राधिकरण अधिकारियों से अनुरोध किया है कि 15 दिनों के भीतर सभी लंबित समस्याओं का समाधान किया जाए। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि समस्याओं का निवारण नहीं हुआ तो वे अग्रिम कार्यवाही करने के लिए बाध्य होंगे, जिसके लिए यूनियन और जिम्मेदार अधिकारी पूरी तरह उत्तरदायी होंगे।
कर्मचारियों का कहना है कि प्राधिकरण और यूनियन के बीच न केवल विश्वासघात हुआ है, बल्कि कर्मचारियों में अपनी मांगों के लिए संगठित होकर आवाज उठाने का जज्बा भी मजबूत हुआ है। पदोन्नति, वेतन, वर्दी और निलंबन जैसी लंबित मुद्दों पर कर्मचारियों का यह विरोध भविष्य में प्राधिकरण के कार्यकलापों और यूनियन की भूमिका पर भी असर डाल सकता है।

ज्ञापन में कर्मचारियों ने यह भी संकेत दिया कि यदि उनकी समस्याओं का समाधान शीघ्र नहीं हुआ, तो संगठन और समिति और भी सख्त कदम उठाने को मजबूर होंगे, जिसमें आंदोलन और अन्य कानूनी कार्रवाई शामिल हो सकती है। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के कर्मचारी संगठन और यूनियन के बीच यह विवाद न केवल कर्मचारियों के हित में है, बल्कि इससे संगठन की विश्वसनीयता और प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठते हैं। अब यह देखना होगा कि अधिकारियों और यूनियन की ओर से कर्मचारियों की लंबित मांगों का समाधान कब तक होता है और क्या इस बगावती कदम के बाद प्राधिकरण में शांति स्थापित हो पाएगी।