33 बीघा में फैलीं अवैध कॉलोनियों पर चला जीडीए का बुलडोजर

-रावली रोड व साहना क्षेत्र में अवैध प्लॉटिंग पर जीडीए की कार्रवाई, सड़कें, बाउंड्रीवाल और साइट ऑफिस ध्वस्त

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने मंगलवार को मुरादनगर क्षेत्र में 33 बीघा में फैली तीन अनाधिकृत कॉलोनियों को ध्वस्त कर बड़ा एक्शन लिया। जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के सख्त निर्देशों के बाद अवैध कॉलोनियों और निर्माण के खिलाफ अभियान में तेजी आई है। इस अभियान के तहत प्रवर्तन जोन-2 की टीम ने बुलडोजर चलाकर प्लॉटिंग की गई जमीन पर बनी बाउंड्रीवॉल, सड़कों, कमरे और साइट ऑफिस को पूरी तरह से ढहा दिया। प्रवर्तन जोन-2 के प्रभारी अधिशासी अभियंता वीरेंद्र कुमार ने मौके पर मौजूदगी में सहायक अभियंता विनय वर्मा, अवर अभियंता, जीडीए पुलिस बल और मुरादनगर थाना पुलिस की सुरक्षा में कार्रवाई को अंजाम दिया। यह ध्वस्तीकरण कार्यवाही रावली रोड और ग्राम साहना क्षेत्र में खसरा संख्याओं के आधार पर चिन्हित की गई तीन कॉलोनियों पर की गई, जिनमें बगैर अनुमति प्लॉटिंग कर कॉलोनाइजर भूखंड बेचने की कोशिश में लगे थे।

पहली कॉलोनी डासनरा-मुरादनगर मार्ग पर खसरा संख्या 64 और 65 में फारूक चौधरी और अय्यूब द्वारा विकसित की जा रही थी, जिसका कुल क्षेत्रफल लगभग 8 बीघा था। दूसरी कॉलोनी ग्राम मोहम्मदपुर धेंदा के खसरा संख्या 274 में थी, जिसे उम्मेदपाल पुत्र हरवीर, मुकेश पुत्र देवेंद्र, रविंद्र तेवतिया और कोमल सिंह जैसे लोगों द्वारा 15 बीघा में काटा गया था। वहीं, तीसरी कॉलोनी ग्राम साहना के खसरा संख्या 266, 267 और 269 में अनवर इलाही, ईरशाद इलाही, अफजल इलाही और नीरज त्यागी द्वारा लगभग 10 बीघा क्षेत्र में विकसित की जा रही थी। कार्रवाई के दौरान कॉलोनाइजरों और निर्माणकर्ताओं ने जमकर विरोध जताया, लेकिन जीडीए की टीम ने पुलिस बल की सहायता से मोर्चा संभालते हुए अवरोध को दूर कर दिया और कार्रवाई को अंजाम तक पहुंचाया।

बुलडोजर की गर्जना के बीच अवैध निर्माण धराशायी हो गए और जीडीए ने स्पष्ट संकेत दे दिया कि अब अवैध प्लॉटिंग को किसी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की कि वे किसी भी प्रकार की अनधिकृत कॉलोनी में भूखंड की खरीद-फरोख्त न करें। ऐसी कॉलोनियों में निवेश करना न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि आर्थिक नुकसान और धोखाधड़ी के खतरे से भी भरा होता है, जिसके लिए क्रेता स्वयं जिम्मेदार होगा। भविष्य में भी इस तरह की कॉलोनियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि गाजियाबाद का विकास नियोजित और वैध ढांचे के अंतर्गत सुनिश्चित किया जा सके।