नवाचार और तकनीक से गाजियाबाद बना प्रदेश का पहला स्मार्ट ABC Model

  • निराश्रित श्वानों के लिए नया युग: मास वैक्सीनेशन और माइक्रोचिप
  • गाजियाबाद में एनिमल वेलफेयर का नया अध्याय, विज्ञान और तकनीक का संगम
  • तीन एबीसी सेंटर और आरएफआईडी माइक्रोचिप से होगी श्वानों की पूरी मॉनिटरिंग
  • डॉग शेल्टर और एडॉप्शन योजना से मिलेगी श्वानों को नई जिंदगी
  • हेल्पलाइन और डिजिटल रजिस्ट्रेशन से तेज होगी शिकायत निस्तारण प्रक्रिया

उदय भूमि संवाददाता
गजियाबाद। नगर निगम ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली और नवाचार के कारण प्रदेश में मिसाल कायम करने का निर्णय लिया है। नगर निगम मुख्यालय में शनिवार को नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक की अध्यक्षता में एनिमल बर्थ कंट्रोल मॉनिटरिंग कमेटी की बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर की आवारा और निराश्रित श्वानों से संबंधित समस्याओं के स्थायी समाधान और एबीसी कार्यक्रम को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए गंभीर और रणनीतिक निर्णय लिए गए। बैठक में यह ऐतिहासिक फैसला लिया गया कि गाजियाबाद प्रदेश का पहला नगर निगम बनेगा, जहां तीन एबीसी सेंटर एक साथ संचालित होंगे और निराश्रित श्वानों के लिए मास रेबीज वैक्सीनेशन और आरएफआईडी माइक्रोचिप की शुरुआत की जाएगी। इस कदम से शहरवासियों को राहत मिलने के साथ ही श्वानों के कल्याण की दिशा में भी महत्वपूर्ण सुधार होगा। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बैठक में स्पष्ट कहा कि गाजियाबाद नगर निगम का उद्देश्य केवल योजनाएँ बनाना नहीं, बल्कि उनका जमीनी क्रियान्वयन करना है। उन्होंने बताया कि निराश्रित श्वानों की समस्याओं का समाधान अब वैज्ञानिक और तकनीकी दृष्टिकोण से किया जाएगा। इस दिशा में सबसे महत्वपूर्ण कदम है आरएफआईडी माइक्रोचिप की शुरुआत, जिसके माध्यम से प्रत्येक श्वान की पूरी जानकारी रजिस्ट्रेशन, टीकाकरण और बध्याकरण डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाएगी।

इस प्रणाली से गाजियाबाद नगर निगम न केवल प्रदेश में अग्रणी बनेगा, बल्कि अन्य नगर निगमों के लिए भी एक मॉडल स्थापित करेगा। नगर आयुक्त ने अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए कि प्रतिदिन स्टेरलाइजेशन की संख्या बढ़ाई जाए और महीने में कम से कम दो बार मॉनिटरिंग बैठक आयोजित की जाए। बैठक में मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. एस.पी. पांडेय, उपमुख्य पशु चिकित्सा एवं कल्याण अधिकारी डॉ. अनुज कुमार सिंह, डॉ. हरिवंश सिंह, डॉ. सौरभ कुमार, डॉ. आशीष त्रिपाठी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मिथिलेश कुमार सिंह और वार्ड 100 के पार्षद संजय सिंह समेत कई सदस्य उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर श्वानों की बढ़ती संख्या और उससे उत्पन्न समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पालतू श्वानों का पंजीकरण 311 एप और जीएमसी पेट एप के माध्यम से बड़े पैमाने पर किया जाएगा और नागरिकों को इस प्रक्रिया में भाग लेने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके अलावा आरडब्ल्यूए और एओए को भी निर्देश दिए गए कि वे अपनी सोसाइटियों में फीडिंग पॉइंट स्थापित करें, जिससे श्वानों को नियंत्रित और सुरक्षित रूप से भोजन उपलब्ध हो सके।

सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश का अनुपालन: डॉग शेल्टर और एडॉप्शन
बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का भी विशेष रूप से उल्लेख किया गया। इस क्रम में नगर निगम ने डॉग शेल्टर बनाने की कार्य योजना प्रस्तुत की। यह शेल्टर न केवल निराश्रित श्वानों के लिए सुरक्षित ठिकाना प्रदान करेगा, बल्कि उनके इलाज, देखभाल और एडॉप्शन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। नगर आयुक्त ने कहा कि ज्यादा से ज्यादा श्वानों को गोद लेने की संस्कृति विकसित की जानी चाहिए, जिससे शहर और पशु दोनों लाभान्वित हों। इसके साथ ही नए बस अड्डे पर बनाए गए एबीसी सेंटर पर बध्याकरण की प्रक्रिया जल्द प्रारंभ करने के निर्देश भी दिए गए।

हेल्पलाइन और नागरिक सहभागिता: तत्काल निस्तारण का प्रावधान
नगर आयुक्त ने यह भी स्पष्ट किया कि अब गाजियाबाद में किसी भी श्वान संबंधित समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। हेल्पलाइन नंबर 9650934500 पर आने वाली शिकायतों का निस्तारण प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा और शिकायत दर्ज होते ही संबंधित टीम मौके पर पहुंचेगी। इस पहल से न केवल शहर में आवारा श्वानों की समस्याओं का स्थायी समाधान होगा, बल्कि नगर निगम की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और नागरिक सहभागिता भी बढ़ेगी।

प्रदेश में पहली बार मास वैक्सीनेशन और आरएफआईडी माइक्रोचिप
गाजियाबाद नगर निगम अब उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा नगर निगम बनने जा रहा है, जहां निराश्रित श्वानों पर मास रेबीज वैक्सीनेशन और आरएफआईडी माइक्रोचिप की शुरुआत होगी। इस पहल से शहरी प्रशासन और पशु कल्याण में क्रांतिकारी बदलाव आएगा। नगर आयुक्त विक्रमादित्य सिंह मलिक ने कहा कि इस योजना की सफलता के लिए शहरवासियों का सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने अपील की कि नागरिक आगे आएं और नगर निगम की इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बनें। बैठक में लिए गए निर्णय न केवल शहर की वर्तमान समस्याओं का समाधान करेंगे, बल्कि गाजियाबाद को स्मार्ट और तकनीकी दृष्टि से सक्षम नगर निगम के रूप में स्थापित करेंगे। तीन एबीसी सेंटर, डिजिटल रजिस्ट्रेशन और आरएफआईडी माइक्रोचिप का मिश्रण गाजियाबाद को उत्तर प्रदेश का अग्रणी नगर निगम बनाएगा और अन्य शहरों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। नगर आयुक्त ने बैठक का समापन करते हुए सभी अधिकारियों और टीमों को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहने और तेजी से कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यह केवल एक योजना नहीं, बल्कि शहरवासियों और श्वानों दोनों के लिए एक नई शुरुआत है।

विक्रमादित्य सिंह मलिक
नगर आयुक्त

गाजियाबाद नगर निगम हमेशा से ही नवाचार और दक्षता के माध्यम से शहरवासियों की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रतिबद्ध रहा है। हमारी प्राथमिकता है कि शहरी प्रबंधन और पशु कल्याण दोनों को संतुलित रूप से आगे बढ़ाया जाए। निराश्रित श्वानों की संख्या बढ़ रही है और उनके कल्याण के लिए केवल कागजों पर योजनाएँ बनाना पर्याप्त नहीं है। इसीलिए हमने तीन एबीसी सेंटर स्थापित करने और आरएफआईडी माइक्रोचिप के माध्यम से प्रत्येक श्वान की पूरी जानकारी डिजिटल रूप में रखने का निर्णय लिया है। हमारा उद्देश्य है कि शहर में श्वान संबंधित शिकायतों का त्वरित समाधान हो और सभी श्वान सुरक्षित और स्वस्थ रहें। मैं शहरवासियों से अपील करता हूँ कि वे इस पहल में हमारे साथ सहयोग करें। उनकी सहभागिता से ही गाजियाबाद प्रदेश का पहला ऐसा नगर निगम बनेगा, जहाँ तकनीक और नवाचार के माध्यम से श्वान कल्याण को नई दिशा मिलेगी। यह कदम न केवल गाजियाबाद बल्कि पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल होगा।
विक्रमादित्य सिंह मलिक
नगर आयुक्त