-सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर भावनाओं और संवेदनाओं से भरा विशेष आयोजन
उदय भूमि संवाददाता
गाजि़याबाद। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर सिल्वरलाइन प्रेस्टीज स्कूल के प्रांगण में गुरुवार को इतिहास और संवेदना से भरपूर एक विशेष आयोजन हुआ, जिसने विद्यार्थियों के हृदय में देशभक्ति की भावना को और प्रज्वलित कर दिया। यहां विभाजन की त्रासदी विषय पर आधारित एक प्रभावशाली और भावनात्मक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन किया गया, जिसने 1947 के भारत विभाजन के दर्दनाक दौर को सजीव रूप में विद्यार्थियों के सामने प्रस्तुत कर दिया। इस डॉक्यूमेंट्री में दुर्लभ ऐतिहासिक चित्र, वास्तविक वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों की सच्ची गवाहियों को इस तरह पिरोया गया कि छात्रों ने मानो उस भयावह समय को स्वयं जी लिया हो।
फिल्म में दिखाया गया कि किस तरह लाखों लोग अपने पुश्तैनी घरों से उजड़ गए, सैकड़ों किलोमीटर पैदल यात्रा करनी पड़ी, समुदाय बिखर गए और अनगिनत परिवार हमेशा के लिए जुदा हो गए। यह दृश्य छात्रों के हृदय को भीतर तक झकझोर गए। फिल्म ने छात्रों को यह एहसास कराया कि स्वतंत्रता केवल एक औपचारिक अधिकार नहीं, बल्कि यह करोड़ों भारतीयों के संघर्ष, बलिदान और दृढ़ संकल्प से अर्जित धरोहर है। कार्यक्रम के दौरान छात्रों ने गहन मनोयोग से फिल्म देखी और इसके बाद अपने विचार साझा किए। कई छात्रों ने कहा कि उन्होंने आज महसूस किया कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और भाईचारा बनाए रखना उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। इस अवसर पर विद्यालय के चेयरमैन सुभाष जैन ने कहा कि आज की पीढ़ी को केवल इतिहास पढऩा ही नहीं, बल्कि उसे महसूस करना भी जरूरी है। यह डॉक्यूमेंट्री हमें यह सिखाती है कि आज़ादी की कीमत बहुत बड़ी है, और इसे बनाए रखना हम सबका कर्तव्य है।
जो त्याग हमारे पूर्वजों ने किया, वह हमें राष्ट्र की सेवा और एकता की रक्षा के लिए सदैव प्रेरित करेगा। डॉक्यूमेंट्री के अंत में पूरे सभागार में गहरा मौन छा गया, फिर राष्ट्रीय गीत की गूंज ने वातावरण को भावनाओं से भर दिया। विद्यार्थियों और शिक्षकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे जीवन के हर क्षेत्र में देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ करेंगे। यह आयोजन न केवल एक ऐतिहासिक पाठ बना, बल्कि इसने आने वाली पीढ़ी को यह गहरा संदेश भी दिया कि आज की आज़ादी कल के संघर्षों का परिणाम है, और इसे सुरक्षित रखना ही सच्ची देशभक्ति है।

















