शिक्षक दिवस पर भूख हड़ताल: गाजियाबाद में शिक्षकों का उपवास आंदोलन तेज

-पुरानी पेंशन बहाली की मांग को नई धार, मनीष शर्मा बोले- सम्मान और सुरक्षा दोनों दांव पर
-सम्मान के दिन संघर्ष की गूंज, बुढ़ापे की गारंटी है पुरानी पेंशन

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। शिक्षक दिवस का दिन शुक्रवार को जब देशभर में गुरुजनों के सम्मान और आदर्शों को याद किया जा रहा था, उसी दिन गाजियाबाद में शिक्षक और कर्मचारी सरकार से अपने अधिकार की मांग के लिए उपवास पर बैठे। पुरानी पेंशन बहाली के लिए चल रहे आंदोलन को नई धार देने हेतु नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस/अटेवा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के आह्वान पर प्रदेशभर में शिक्षकों और कर्मचारियों ने एक दिन का उपवास रखा। इसी क्रम में अटेवा गाजियाबाद इकाई ने जिला मुख्यालय पर उपवास कार्यक्रम आयोजित किया।
कार्यक्रम की शुरुआत भारत रत्न डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण से हुई। शिक्षक दिवस के अवसर पर इस प्रतीकात्मक शुरुआत ने माहौल को और भावुक बना दिया। सम्मान और आभार का यह दिन गाजियाबाद में अधिकार और संघर्ष की आवाज में तब्दील हो गया। इस उपवास कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अटेवा जिलाध्यक्ष मनीष शर्मा ने अपने संबोधन में सरकार पर सीधा सवाल दागा। उन्होंने कहा कि यह कितना दुर्भाग्यपूर्ण है कि शिक्षक दिवस जैसे दिन पर भी शिक्षकों को अपना अधिकार पाने के लिए भूखा रहना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पुरानी पेंशन सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि कर्मचारियों की बुढ़ापे की गारंटी है। अगर सरकार अपने ही कर्मचारियों की सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो यह सवाल सरकार की संवेदनशीलता पर बड़ा धब्बा है। मनीष शर्मा ने मंच से कहा कि शिक्षक और कर्मचारी समाज की रीढ़ हैं। वे बच्चों को शिक्षा देकर देश का भविष्य गढ़ते हैं। लेकिन जब वही शिक्षक और कर्मचारी खुद अपने भविष्य को लेकर असुरक्षित हों तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सरकार तुरंत पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करे, वरना यह आंदोलन और बड़ा और उग्र रूप लेगा। गाजियाबाद के जिला मुख्यालय पर हुए इस उपवास कार्यक्रम में जिलेभर से सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी शामिल हुए। सभी ने सामूहिक अवकाश लेकर आंदोलन में भागीदारी की। उनकी एकजुटता ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया कि पुरानी पेंशन बहाली की मांग अब टाली नहीं जा सकती।

शिक्षक और कर्मचारी हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार से अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। इस कार्यक्रम में अटेवा के कई वरिष्ठ पदाधिकारी और शिक्षक संगठन से जुड़े नेता मौजूद रहे। इनमें मंडल उपाध्यक्ष एसपी सिंह, मनीष कुमार शर्मा, रामशेष वर्मा, अमित त्यागी, प्रदीप चौहान, अनुराग यादव, राजपाल यादव, राजमणि पाल, राजी हसन, महिपाल सिंह, अमिताभ पांडे, संजय चौधरी, अजय कुमार, अजय गहलोत, तरुण कुमार, प्रवीण कुमार, आरती वर्मा, डॉक्टर प्रियंका, रेखा शर्मा, पिंकी गुप्ता, सुधा, मनोज रोहिल्ला, पारस गोस्वामी, दीपक चौबियान, कविता चौधरी, मीनू शर्मा, अलका शर्मा दुबे, हिमांशु गुप्ता, मोहम्मद अब्बास, जाकिर हुसैन, संतोष यादव, प्रमोद कुमार बंसल, अखंड प्रताप सिंह, मनीष कुमार के साथ सैकड़ों शिक्षक कर्मचारियों ने उपवास में प्रतिभाग किया। उनकी मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूती दी और शिक्षकों में जोश भर दिया। शिक्षक दिवस को आमतौर पर सम्मान, आभार और कृतज्ञता के रूप में मनाया जाता है। लेकिन इस बार गाजियाबाद के शिक्षकों ने इसे संघर्ष का दिन बना दिया।

माल्यार्पण और श्रद्धांजलि के बाद जब सैकड़ों शिक्षक और कर्मचारी उपवास पर बैठे तो यह स्पष्ट हो गया कि यह आंदोलन केवल पेंशन का नहीं, बल्कि सम्मान का भी है। उन्होंने कहा कि अब यह लड़ाई तब तक जारी रहेगी जब तक पुरानी पेंशन स्कीम को बहाल नहीं किया जाता। अटेवा जिलाध्यक्ष मनीष शर्मा ने अपने बयान में साफ कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है। अगर सरकार ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो आंदोलन की धार और तेज होगी। उन्होंने कहा कि अभी शिक्षक और कर्मचारी शांतिपूर्वक उपवास कर रहे हैं, लेकिन भविष्य में उन्हें सड़कों पर उतरने और कड़े कदम उठाने पर भी मजबूर होना पड़ सकता है।

गाजियाबाद में शिक्षक दिवस पर आयोजित यह उपवास कार्यक्रम न केवल जिले में बल्कि प्रदेश और देशभर में पुरानी पेंशन बहाली की मांग को और अधिक प्रखर बना गया है। सैकड़ों शिक्षकों और कर्मचारियों ने एक स्वर में कहा कि उनका संघर्ष केवल वेतन या सुविधा का नहीं बल्कि उनके भविष्य की सुरक्षा का है। यह कार्यक्रम सरकार के लिए एक चेतावनी है कि अब पुरानी पेंशन की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।