-सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से सजा समारोह, शिक्षकों को दी गई भावपूर्ण श्रद्धांजलि और सम्मान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गौतम पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पी ब्लॉक प्रताप विहार में शुक्रवार को इस बार शिक्षक दिवस एक यादगार और भव्य आयोजन के रूप में मनाया गया। विद्यालय के डायरेक्टर आशीष गौतम ने कार्यक्रम का शुभारंभ भारत के महान दार्शनिक, शिक्षक और देश के द्वितीय राष्ट्रपति डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। पूरे प्रांगण में गुरुजनों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता का माहौल था। विद्यालय के विद्यार्थियों ने शिक्षक दिवस के अवसर पर अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया। संगीत, नृत्य, नाटक, मिमिक्री और विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने उपस्थित दर्शकों का मन मोह लिया। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से यह संदेश दिया कि शिक्षक न केवल उनके मार्गदर्शक हैं बल्कि उनके जीवन को दिशा देने वाले सच्चे प्रेरणास्त्रोत भी हैं। विद्यालय की प्रधानाचार्या पूनम गौतम ने सभी विद्यार्थियों, अध्यापकगण और अभिभावकों को शिक्षक दिवस और ईद-ए-मिलाद-उन-नबी की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने कहा कि शिक्षक दिवस, गुरु-शिष्य परंपरा का उत्सव है और यह दिन हमें याद दिलाता है कि भारतीय संस्कृति में शिक्षक को भगवान के समान माना जाता है।
उन्होंने इस वर्ष की थीम अगली पीढ़ी के शिक्षार्थियों को प्रेरित करना का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षक का कार्य केवल शैक्षणिक ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, दृढ़ता और रचनात्मकता का संचार करना भी है। विद्यालय की उपप्रधानाचार्या तनूजा ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि शिक्षक हमारे जीवन का वह स्तंभ हैं, जिन पर पूरा समाज टिका होता है। उन्होंने कहा एक कुम्हार जैसे मिट्टी को गढ़कर खूबसूरत कलाकृति बनाता है, वैसे ही शिक्षक बच्चों के भविष्य को आकार देते हैं। शिक्षक अपने परिश्रम, त्याग और धैर्य से विद्यार्थियों के जीवन को संवारते हैं। वे केवल किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। शिक्षक ही हमें यह सिखाते हैं कि कठिनाइयों से कैसे लड़ा जाए और समाज में एक बेहतर इंसान बनकर कैसे जिया जाए। तनूजा ने आगे कहा कि शिक्षक की भूमिका केवल विद्यालय तक सीमित नहीं होती, बल्कि उनका प्रभाव विद्यार्थियों के पूरे जीवन में दिखाई देता है।
शिक्षक ही बच्चों में संस्कार, आत्मविश्वास और नैतिकता का बीज बोते हैं, जो आगे चलकर उन्हें मजबूत नागरिक और जिम्मेदार इंसान बनाता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने गुरुओं का सम्मान करें और उनके बताए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सफल बनाएं। विद्यालय के अकादमिक हेड चेतन शर्मा ने शिक्षक दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जब डॉ0 सर्वपल्ली राधाकृष्णन राष्ट्रपति बने, तो उनके शिष्यों और मित्रों ने उनका जन्मदिन विशेष रूप से मनाने का आग्रह किया। इस पर उन्होंने कहा कि यदि यह दिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो उन्हें अधिक प्रसन्नता होगी। तभी से हर वर्ष 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाया जाने लगा। उन्होंने कहा कि जीवन को सही दिशा देने में एक अच्छे शिक्षक की भूमिका माता-पिता के बराबर, बल्कि कई बार उससे भी अधिक होती है।
विद्यार्थियों का उत्साह और समर्पण
इस अवसर पर विद्यालय के विद्यार्थियों ने न केवल अपने शिक्षकों को मंच पर सम्मानित किया, बल्कि उनकी नकल उतारकर, गीत गाकर और नृत्य प्रस्तुतियों के माध्यम से उनके जीवन के प्रति आभार भी व्यक्त किया। हंसी-मजाक और भावुकता से भरे इन क्षणों ने पूरे समारोह को यादगार बना दिया।
गुरु-शिष्य परंपरा का अनुपम उदाहरण
कार्यक्रम के समापन पर सभी अध्यापकगणों को शुभकामनाएं और धन्यवाद ज्ञापित किया गया। यह दिन केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि गुरु और शिष्य के बीच बने पवित्र बंधन का उत्सव बनकर विद्यालय परिवार और उपस्थित सभी अतिथियों के हृदय में अमिट छाप छोड़ गया।

















