पुरानी पेंशन नहीं तो वोट नहीं, गाजियाबाद से गूंजा राष्ट्रव्यापी आक्रोश

-जनपद गाजियाबाद में कर्मचारी संगठनों का रोष मार्च, प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। देशभर में लगभग एक करोड़ शिक्षक, कर्मचारी व अधिकारी राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के अंतर्गत आते हैं, जो बीते कई वर्षों से पुरानी पेंशन योजना की बहाली की मांग कर रहे हैं। नई पेंशन प्रणाली में उन्हें 800 से 2200 तक की मामूली पेंशन मिल रही है, जो उनके और उनके परिवार के लिए न तो पर्याप्त है और न ही सम्मानजनक जीवनयापन की गारंटी देती है। जिन लोगों ने अपना संपूर्ण जीवन देश और विभाग की सेवा में समर्पित कर दिया, आज वही असुरक्षा और उपेक्षा का शिकार हैं। यदि वे पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) के अंतर्गत होते, तो सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सम्मान उनके जीवन का हिस्सा होता। यही कारण है कि पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने के लिए देशव्यापी आंदोलन तेजी पकड़ चुका है। देश में तेज़ी से हो रहे सरकारी संस्थाओं के निजीकरण ने बेरोजगारी को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है। इससे युवाओं को रोजगार से वंचित होना पड़ रहा है और आम जनता को मिलने वाली सरकारी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

संस्थाओं के राष्ट्रीयकरण की मांग अब ज़ोर पकड़ चुकी है, क्योंकि इससे न केवल रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, बल्कि देश की आर्थिक रीढ़ भी मजबूत होगी। जनपद गाजियाबाद में अखिल भारतीय राज्य कर्मचारी महासंघ के नेतृत्व में एक विशाल रोष मार्च निकाला गया। इसमें डीपीए गाजियाबाद, माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट, राजकीय नर्सिंग एसोसिएशन, लेखपाल संघ, उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी सफाई संघ समेत विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों ने भाग लिया। जुलूस के अंत में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा गया, जिसमें पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण समाप्त करने की मांग की गई। जिलाध्यक्ष मनीष कुमार शर्मा ने बताया कि हमने अपने जीवन का स्वर्णिम समय देश और विभाग की सेवा में समर्पित किया है, लेकिन आज हमें बुज़ुर्गावस्था में असुरक्षा और उपेक्षा का सामना करना पड़ रहा है।

नई पेंशन योजना में 800 से 2200 की पेंशन किसी के जीवन-यापन के लिए पर्याप्त नहीं है। यह व्यवस्था हमारे साथ अन्याय है। हम केवल पेंशन नहीं मांग रहे, हम अपने सम्मान और सामाजिक सुरक्षा का अधिकार मांग रहे हैं। पुरानी पेंशन योजना की बहाली केवल कर्मचारियों की मांग नहीं, यह एक सामाजिक न्याय का प्रश्न है। जब संसद से लेकर सड़क तक की लड़ाई हमने लड़ी है, तो अपने अधिकार भी लेकर रहेंगे। यह आंदोलन अब थमेगा नहीं, जब तक कि सरकार हमें फिर से ओपीएस के अंतर्गत नहीं लाती। निजीकरण से देश के युवाओं के भविष्य को अंधकार में झोंका जा रहा है। हम चाहते हैं कि सरकारी संस्थाओं को मज़बूत किया जाए, ताकि देश और समाज दोनों सुरक्षित रह सकें। यही राष्ट्रहित है, और यही जनहित है।

इस दौरान रामशेष वर्मा (जिला महामंत्री), राकेश कुमार (संयुक्त मंत्री), अनुराग यादव जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट), नरेंद्र कुमार शर्मा जिलाध्यक्ष (DPA), संजय शर्मा जिला मंत्री (DPA), गोविंद कुमार सिंह प्रमुख सलाहकार, परमानंद पाठक जिला प्रवक्ता, मीनू शर्मा (महामंत्री महिला प्रकोष्ठ), सीमा शर्मा, रेनू चौधरी, कविता चौधरी, महिला प्रतिनिधिगण, प्रदीप चौहान कोषाध्यक्ष, पारस गोस्वामी ब्लॉक अध्यक्ष (लोनी), सुधा देवी ब्लॉक संरक्षिका लोनी),अमित त्यागी महानगर अध्यक्ष, अमिताभ पांडेय महानगर उपाध्यक्ष, जाकिर हुसैन, टीएससीटी प्रदेश प्रवक्ता, राजबहादुर, रज़ी हसन, वरिष्ठ सदस्य समेत सैकड़ों कर्मचारी और प्रतिनिधियों ने रोष मार्च में भाग लिया, जो पुरानी पेंशन बहाली आंदोलन को अब जनांदोलन के रूप में परिवर्तित कर रहे हैं।