-एसटीपी बंद, गंदा पानी सीधे नालों में, जांच में खुली बड़ी लापरवाही
-पहले 25 पर कार्रवाई, अब और कड़ी निगरानी के संकेत, 10 सोसाइटियों पर 5-5 लाख का जुर्माना
-पर्यावरण सुरक्षा पर सख्त रुख, नियम तोड़ने वालों पर जारी रहेगा अभियान
उदय भूमि संवाददाता
ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने सीवर शोधन को लेकर बिल्डर सोसाइटियों पर सख्ती बढ़ा दी गई है। शहर की कई आवासीय सोसाइटियों द्वारा सीवर का पानी बिना शोधित किए नालों में बहाए जाने की शिकायतों के बाद प्राधिकरण ने कड़ा रुख अपनाया है। जांच में खुलासा हुआ कि जिन सोसाइटियों ने अपने यहां एसटीपी चालू होने का दावा किया था, उनमें से कई में प्लांट बंद पाए गए। 10 सोसाइटियों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
प्राधिकरण के सीईओ एनजी रवि कुमार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि अधिकांश बिल्डर सोसाइटियों में एसटीपी प्रभावी रूप से संचालित नहीं हो रहे हैं। घरों से निकलने वाला गंदा पानी बिना शोधन के सीधे नालों में छोड़ा जा रहा है, जिससे पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए सीवर विभाग ने शहर की 220 से अधिक सोसाइटियों को नोटिस जारी कर एसटीपी की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट तलब की। अब तक करीब 50 सोसाइटियों ने अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए एसटीपी चालू होने की जानकारी दी थी। इसके बाद विभाग ने क्रॉस चेकिंग कराई। जांच में 10 और सोसाइटियों में एसटीपी बंद मिले और वहां से अपशिष्ट जल बिना शोधन के बहाया जा रहा था।
सीवर विभाग के सीनियर मैनेजर सन्नी यादव के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वाली इन सभी सोसाइटियों पर 5-5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। इससे पहले 25 और सोसाइटियों पर जुर्माना लगाया जा चुका है।प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में भी औचक निरीक्षण जारी रहेंगे और पर्यावरण मानकों से समझौता करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, सभी सोसाइटियों को नियमित रूप से एसटीपी संचालन सुनिश्चित करने और उसकी मॉनिटरिंग रिपोर्ट समय-समय पर जमा करने के निर्देश दिए गए हैं।
















