नई दिल्ली। नवरात्रि पर्व समापन की ओर आ गया है। गुरुवार को महानवमी पर्व मनाया जाएगा। नवरात्रि के आखिरी दिन महानवमी पर्व मनाने का विशेष महत्व है। इस दिन मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की उपासना करने से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त हो जाती हैं। इसलिए इस दिन को खासा महत्व दिया जाता है। देशभर में बुधवार को अष्टमी पर्व मनाया गया। नवरात्रि के आठवें दिन मां दुर्गा के अष्टम स्वरूप की पूजा-अर्चना की गई। इसी क्रम में गुरुवार को महानवमी पर्व मनेगा। इसके साथ नवरात्रि पर्व का समापन हो जाएगा।
नवरात्रि के अंतिम दिन महानवमी पर्व मनाने के पीछे विशेष महत्व है। महानवमी पर मां दुर्गा के सिद्धिदात्री रूप की आराधना होती है। इस दिन हवन करने का भी अलग महत्व माना गया है। नवमी पर्व पर श्रद्धालु 9 कन्याओं को प्रसाद ग्रहण कराकर अपना व्रत खोलते हैं। इस रूप में मां की उपासना करने से सभी प्रकार की सिद्धियां प्राप्त होती है। मान्यता है कि महिषासुर नामक राक्षस ने चारों ओर हाहाकार मचा रखा था। महिषासुर के भय से सभी देवता काफी परेशान थे। बाद में महिषासुर के वध के लिए देवी आदिशक्ति ने दुर्गा का रूप धारण किया और 8 दिन तक महिषासुर से युद्ध करने के बाद 9वें दिन उसे मार गिराया। जिस दिन मां ने इस अत्याचारी राक्षस का वध किया, उस दिन को महानवमी के नाम से जाना जाने लगा। महानवमी के दिन महास्नान और षोडशोपचार पूजा करने का भी रिवाज है। ये पूजा अष्टमी की शाम ढलने के बाद होती है।
दुर्गा बलिदान की पूजा नवमी के दिन प्रात: में की जाती है। नवमी के दिन हवन करना जरूरी माना गया है। क्योंकि इस दिन नवरात्रि का समापन हो जाता है। मां दुर्गा की विदाई कर दी जाती है। भविष्य पुराण में भगवान श्री कृष्ण और धर्मराज युधिष्ठिर के संवाद में दुर्गाष्टमी व नवमी के पूजन का उल्लेख मिलता है। मां अम्बे का पूजन अष्टमी व नवमी को करने से परेशानियां दूर होती हैं। ये दोनों तिथि परम कल्याणकारी, पवित्र और सुख प्रदाता होती है। 9वें दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा का विधान है। मां सिद्धिदात्री ने देवताओं और श्रद्धालुओं के सभी मनोवांछित मनोरथों को सिद्ध कर दिया, जिससे पूरे जगत में इन्हें मां सिद्धिदात्री के रूप में जाना जाता है। इसलिए सिद्धिदात्री का पूजन व अर्चन करने से भक्तों के सभी मनोरथ सिद्ध होते हैं।
















