- फेफड़ों की जांच, विशेषज्ञ परामर्श और जागरूकता का बड़ा मंच
- बढ़ते प्रदूषण के बीच सांस की बीमारियों से बचाव पर जोर
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। बढ़ते प्रदूषण और असंतुलित जीवनशैली के दौर में सांस से जुड़ी बीमारियां लगातार लोगों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही हैं। इसी कड़ी में सोमवार को यशोदा मेडिसिटी, इंदिरापुरम ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मेगा पल्मोनोलॉजी स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया। यह शिविर न केवल जांच और परामर्श का केंद्र रहा, बल्कि आमजन के लिए सांस की सेहत और फेफड़ों की सुरक्षा पर जागरूकता फैलाने का भी एक बड़ा मंच साबित हुआ। इस शिविर में देश के जाने-माने पल्मोनोलॉजिस्ट्स डॉ. राजेश गुप्ता, डॉ. के.के. पांडेय, डॉ. आशीष कुमार, डॉ. अंकित भाटिया और डॉ. शेखर मौजूद रहे। उन्होंने मरीजों की जांच की, उनके सवालों के जवाब दिए और जीवनशैली में सुधार से लेकर दवाओं और उपचार तक हर पहलू पर मार्गदर्शन किया।
डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि फेफड़ों की शुरुआती जांच और समय पर इलाज से गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है। यही नहीं, कई बार मरीज बिना लक्षण के गंभीर बीमारियों से जूझते रहते हैं, ऐसे में जांच बेहद जरूरी है। शिविर में सिर्फ जांच और इलाज ही नहीं हुआ बल्कि लोगों को प्रदूषण से बचाव, सही खानपान, व्यायाम और नियमित जांच की अहमियत भी समझाई गई। विशेषज्ञों ने बताया कि धूम्रपान और प्रदूषण दोनों ही फेफड़ों के लिए घातक हैं और इन्हें जीवनशैली से बाहर करना जरूरी है। यशोदा मेडिसिटी के चेयरमैन और एमडी डॉ. पी.एन. अरोड़ा ने कहा कि सांस की बीमारियां अक्सर नजरअंदाज कर दी जाती हैं, लेकिन यही बीमारियां आगे चलकर जानलेवा रूप ले सकती हैं। हमारा मकसद है कि लोग समय पर जांच कराएं और जागरूक रहें। यह शिविर हमारी सामाजिक जिम्मेदारी का हिस्सा है और हम आगे भी ऐसे प्रयास जारी रखेंगे।
समय रहते जांच है जीवनरक्षक
वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. राजेश गुप्ता ने कहा कि जब लोग फेफड़ों की जांच समय पर कराते हैं तो बीमारियों की पहचान शुरुआती स्तर पर हो जाती है और इलाज आसान हो जाता है। यही सबसे बड़ा बचाव है। वहीं डॉ. के.के. पांडेय ने बढ़ते प्रदूषण और बदली हुई जीवनशैली को सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि आज सांस की बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और नियमित जांच ही हमें सुरक्षित रख सकती है।
बड़ी संख्या में लोगों ने लिया लाभ
इस शिविर में दूर-दराज से आए सैकड़ों लोगों ने हिस्सा लिया। मरीजों ने नि:शुल्क जांच और परामर्श का लाभ उठाया। कई प्रतिभागियों ने माना कि वे पहली बार इतने बड़े स्तर पर आयोजित फेफड़ों के विशेष स्वास्थ्य शिविर का हिस्सा बने। एक प्रतिभागी ने कहा, हम अक्सर दिल और शुगर की जांच करवाते हैं, लेकिन फेफड़ों पर ध्यान नहीं देते। इस शिविर ने हमें जागरूक किया कि सांस की सेहत भी उतनी ही जरूरी है।
















