मोदीनगर गैस घोटाला: आपूर्ति विभाग की जांच में 99 सिलेंडर गायब, फर्जी डिलीवरी का खुलासा-एजेंसी पर मुकदमा दर्ज

-डीएम की सख्ती के बाद खुला खेल, जांच में स्टॉक और रिकॉर्ड में भारी अंतर उजागर
-उपभोक्ताओं को बिना सिलेंडर मिले पहुंच रहे थे डिलीवरी मैसेज, बढ़ी शिकायतें
-उपभोक्ताओं के हितों से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं, सख्त कार्रवाई जारी रहेगी: अमित तिवारी

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। मोदीनगर क्षेत्र में गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी और अनियमितताओं का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर की गई जांच में धीरेन्द्र गैस सर्विस, जो कि मोदी मंदिर के सामने स्थित है, के खिलाफ गंभीर गड़बडिय़ां पाई गईं। जांच के बाद एजेंसी के प्रबंधन और स्वामित्व के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। 20 मार्च 2026 को ग्राम फफराना निवासी सचिन चौधरी, पुत्र धर्मवीर सिंह (एडवोकेट), ने जिलाधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि धीरेन्द्र गैस सर्विस द्वारा घरेलू गैस सिलेंडरों की कालाबाजारी की जा रही है और उपभोक्ताओं को नियमानुसार आपूर्ति नहीं दी जा रही। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी रविंद्र कुमार मॉंदड़ ने तत्काल तहसीलदार मोदीनगर को जांच के निर्देश दिए। इसके बाद राजस्व विभाग, आपूर्ति विभाग और बीपीसीएल (भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड) के बिक्री अधिकारी की संयुक्त टीम का गठन किया गया, जिसने रविवार को मौके पर पहुंचकर एजेंसी के गोदाम और रिकॉर्ड की विस्तृत जांच की। जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे। टीम ने पाया कि एजेंसी के स्टॉक में 14.2 किलोग्राम के 99 घरेलू गैस सिलेंडर कम थे।

जब स्टॉक का मिलान स्टॉक रजिस्टर से किया गया, तो यह स्पष्ट हुआ कि रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर है। इतना ही नहीं, 19 किलोग्राम के कमर्शियल सिलेंडरों और अन्य सिलेंडरों का स्टॉक रजिस्टर भी अद्यावधिक नहीं पाया गया, जो नियमों का सीधा उल्लंघन है। जांच के समय मौके पर मौजूद कई उपभोक्ताओं ने भी गंभीर आरोप लगाए। उपभोक्ताओं ने बताया कि उन्होंने गैस सिलेंडर बुक कराया था और उनके मोबाइल पर डिलीवरी का मैसेज भी प्राप्त हो गया, लेकिन उन्हें वास्तव में सिलेंडर नहीं मिला। शिकायतकर्ताओं में आवेश, हिमांशु त्यागी, अरुणा, नसीम और निखिल कुमार शर्मा जैसे कई उपभोक्ताओं ने अपने बयान दर्ज कराए, जिससे एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए। बताया गया कि धीरेन्द्र गैस सर्विस के खिलाफ पहले भी लगातार शिकायतें मिल रही थीं। संबंधित अधिकारियों द्वारा एजेंसी के प्रबंधन और प्रोपराइटर को कई बार उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन इन निर्देशों का पालन नहीं किया गया।

शिकायतों के लगातार बढ़ते जाने और समाधान न होने के कारण प्रशासन को सख्त कदम उठाना पड़ा। जांच में सामने आई अनियमितताओं के आधार पर जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद शनिवार को एजेंसी की प्रबंधक योगिता तोमर और प्रोपराइटर कुसुम तोमर के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3/7 के अंतर्गत मुकदमा दर्ज कराया गया। जिला पूर्ति अधिकारी अमित तिवारी ने कहा कि उपभोक्ताओं के अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। स्टॉक में कमी, रिकॉर्ड में गड़बड़ी और उपभोक्ताओं को समय पर गैस न मिलना अत्यंत गंभीर मामला है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

उन्होंने कहा कि जिले में गैस एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और जहां कहीं भी अनियमितताएं पाई जाएंगी, वहां कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि यदि उन्हें गैस आपूर्ति से संबंधित कोई भी समस्या हो, तो वे तुरंत संबंधित विभाग को सूचित करें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। यह मामला न केवल गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता की आवश्यकता को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रशासन अब ऐसी अनियमितताओं के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए तैयार है। आने वाले समय में इस कार्रवाई का असर अन्य एजेंसियों पर भी देखने को मिल सकता है, जिससे उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं मिल सकेंगी।