नगरायुक्त ने बचाये नगर निगम के पौने 2 करोड़

– कुटेशन परंपरा पर लगाई रोक, ई-टेंडर के जरिये कराये जा रहे हैं काम
– दीवालों की रंगाई पुताई एवं सौंदर्यीकरण के कार्य में ई टेंडरिंग लागू करने से हुई बचत

उदय भूमि ब्यूरो
गाजियाबाद। कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। ऐसा ही कुछ इन दिनों म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर को लेकर चर्चा हो रही है। महेंद्र सिंह तंवर को गाजियाबाद नगर निगम का चार्ज संभाले अभी चंद महीने ही हुए हैं लेकिन उनके कार्यशैली की झलक नगर निगम में साफ-साफ दिखने लगी है। निगम अधिकारियों को जहां शहरवासियों की शिकायतों एवं जन समस्याओं के निस्तारण को लेकर जवाबदेह बनाया जा रहा है। वहीं, नगर निगम की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ फिजूलखर्ची रोकने को लेकर भी कवायद की जा रही है। महत्वपूर्ण यह है कि म्युनिसिपल कमिश्नर के इन प्रयासों का परिणाम अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। कुटेशन परंपरा रोककर ई-टेंडरिंग व्यवस्था को सख्ती से लागू करके म्युनिसिपल कमिश्नर ने नगर निगम के पौने 2 करोड़ रुपये बचाये हैं।
ज्ञात हो कि म्युनिसिपल कमिश्नर ने नगर निगम में चल रहे कुटेशन परंपरा को बंद करने का निर्देश निगम अधिकारियों को दिया था। निगम का चार्ज संभालते ही उन्होंने सभी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की और सभी को स्पष्ट निर्देश दिया कि जो छोटे-छोटे कार्य हैं उन्हें टूकड़ों में कराने के बजाय एक साथ कराया जाये। इन कार्यों को कुटेशन के आधार पर कराने के बजाय टेंडर प्रक्रिया से कराया जाये। यदि विशेष परिस्थितियों में कुछ आवश्यक कार्य कुटेशन से कराये जाता है तो उनकी संख्या कम से कम होनी चाहिये। कुटेशन पर रोक लगाने के निर्णय से नगर निगम को काफी बचत हो रही है। हालिया एक मामले में नगर निगम को लगभग पौने दो करोड़ रुपए की बचत हुई है। दरअसल स्वच्छ भारत अभियान के तहत शहर में सौंदर्यीकरण, दीवालों की रंगाई पुताई एवं मेंटेनेंस वर्क कुटेशन के आधार पर कराये जाते रहे हैं। दरअसल इस तरह के कार्य ऐन मौके पर कराये जाते थे। जिस कारण अधिकारियों के पास टेंडर कराने का समय भी नहीं होता था।

अधिकारियों के साथ बैठक करते म्युनिसियल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर

लेकिन म्युनिसिपल कमिश्नर महेंद्र सिंह तंवर ने इस बार अभियान की शुरूआत में ही अधिकारियों के साथ बैठक करके इन कार्यों की लिस्ट तैयार करवाया और इन कार्यों को टेंडर के जरिये करवाने का आदेश दिया।
शहर के पांचों जोन में दीवारों की रंगाई-पुताई, डिवाइडर एवं फुटपाथ की रंगाई-पुताई एवं मरम्मत, शौचालयों की रंगाई पुताई एवं मरम्मत, विलोपित कुरा घरों की रंगाई पुताई एवं मरम्मत, पार्कों की रंगाई पुताई एवं मरम्मत से संबंधित 74 कार्यों का टेंडर कराया गया। इन कार्यों की अनुमानित लागत लगभग 5 करोड़ 83 लाख रुपये थी। सभी कार्यों को ई-टेंडर निविदा के जरिए कराए जाने से इसकी लागत घटकर लगभग 4 करोड़ 7 लाख रुपये रह गई। नगर निगम को इन कार्यों में लगभग एक करोड़ 75 लाख 64 हजार रुपए की बचत हुई है। नगर निगम मामलों के जानकार बताते हैं कि कोटेशन पर रोक और टेंडर व्यवस्था लागू होने से नगर निगम को काफी लाभ मिलेगा। साल भर में अनुमानित रूप से नगर निगम को लगभग 20 से 25 करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है।
———————