हुमायूं कबीर की बाबरी मस्जिद मांग पर भड़का मुस्लिम समाज: साकिर अली ने कहा- विकास चाहिए, विवाद नहीं

-इतिहास में कभी नहीं बनी बाबरी के नाम पर मस्जिद, विधायक की बयानबाजी को बताया चुनावी हथकंडा

     उदय भूमि संवाददाता
पश्चिम बंगाल (मुर्शिदाबाद)। मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण को लेकर तृणमूल कांग्रेस के विधायक हुमायूं कबीर द्वारा हाल ही में दिए गए बयान पर रिसड़ा मस्जिद कमेटी के सदस्य साकिर अली ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। साकिर अली ने कहा कि वर्तमान मुस्लिम समाज विवादों में उलझने के बजाय शिक्षा, रोजगार और व्यवसाय में प्रगति कर सम्मान अर्जित करना चाहता है। उन्होंने कहा कि आज का मुसलमान विवाद नहीं, विकास चाहता है। बाबरी मस्जिद हमारी कभी मांग नहीं रही। साकिर अली ने सवाल उठाया कि क्या इतिहास में कभी मुगल सम्राट बाबर के पुत्र हुमायूं ने अपने पिता के नाम पर कोई मस्जिद बनवाई। उन्होंने कहा कि इतिहास में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है। ऐसे में हुमायूं कबीर किस आधार पर यह दावा कर रहे हैं?’  उन्होंने तंज कसा, बाबर का असली बेटा कौन – दिल्ली में दफन सम्राट हुमायूं या मुर्शिदाबाद के विधायक? साकिर अली ने आगे कहा कि पिछले 500 वर्षों में भारत में लाखों मस्जिदें बनी हैं, लेकिन कहीं भी ‘बाबरी मस्जिद’ नाम की मस्जिद नहीं बनी।

यह स्पष्ट करता है कि मुस्लिम समाज की सोच बदल चुकी है और वे विवाद के बजाय विकास को प्राथमिकता दे रहे हैं। रिसड़ा मस्जिद कमेटी के सदस्य ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले हुमायूं कबीर बाबरी मस्जिद का मुद्दा उठाकर इसे राजनीतिक रंग दे रहे हैं। साकिर अली ने बताया कि विधायक इस बयानबाजी के जरिए भाजपा को चुनावी लाभ देने की कोशिश कर रहे हैं। 1992 में मस्जिद ढहाए जाने पर उन्होंने एक शब्द नहीं कहा, लेकिन अब अव्यावहारिक मांग उठाकर माहौल बिगाडऩे की कोशिश कर रहे हैं। साकिर अली ने कहा कि मुस्लिम समाज अब चुनावी रोटियों या पुराने विवादों में उलझना नहीं चाहता। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का मुसलमान अच्छी शिक्षा, व्यवसाय और रोजगार के अवसर चाहता है। उन्होंने उल्लेख किया कि इस दिशा में राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार कई महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। साकिर अली ने हुमायूं कबीर से पूछा कि क्या इतिहास में कोई प्रमाण है कि बाबर के नाम पर मस्जिद बनाई गई हो। उन्होंने इसे अवास्तविक और समाज में नकारात्मक माहौल फैलाने वाली हरकत बताया। उनका कहना था कि मुस्लिम समाज अब जागरूक और विकासशील हो गया है।

उन्होंने कहा हम शिक्षा और रोजगार के जरिए समाज में सम्मान चाहते हैं। विवाद हमारी प्राथमिकता नहीं है। ऐसे में हुमायूं कबीर जैसे नेता सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए पुराने मुद्दों को ताजा कर रहे हैं। साकिर अली ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम समाज अब रोजगार, शिक्षा और व्यवसाय में आगे बढ़ रहा है। हमारा समाज अब विवादों में उलझकर समय और ऊर्जा बर्बाद नहीं करना चाहता। समाज का ध्यान विकास की ओर है। यही हमारी सच्ची मांग है। साकिर अली ने तृणमूल कांग्रेस के विधायक की बयानबाजी को निराधार और चुनावी फायदा उठाने वाली हरकत बताया। उन्होंने कहा कि समाज अब ऐसे नेताओं की राजनीति को पहचानने लगा है जो पुराने विवादों को तूल देकर अपने चुनावी हित साधने की कोशिश करते हैं। साकिर अली का संदेश साफ है कि मुस्लिम समाज अब विकास और शिक्षा को प्राथमिकता दे रहा है, न कि विवादों को।

उन्होंने हुमायूं कबीर से आग्रह किया कि वे समाज की भावनाओं और वास्तविक जरूरतों का सम्मान करें और चुनावी राजनीति के लिए इतिहास को हथियार न बनाएं। इस बयानबाजी से केवल समाज में तनाव बढ़ेगा और चुनावी माहौल खराब होगा। उन्होंने कहा कि हमें पुराने विवादों में उलझने की जरूरत नहीं। हमें अपने युवाओं को शिक्षित करना है, रोजगार के अवसर देने हैं और व्यवसाय को बढ़ावा देना है। यही समाज की सच्ची मांग है। उन्होंने तंज कसा कि अगर हुमायूं कबीर को इतिहास में रुचि है तो उन्हें अपने पिता बाबर या इतिहास के पन्नों को पढऩा चाहिए, न कि जनता के बीच विवाद पैदा करना। उनका कहना था, समाज अब जागरूक हो गया है। मुसलमान अब चुनावी खेलों में फंसना नहीं चाहता। हम विकास चाहते हैं, विवाद नहीं और पश्चिम बंगाल ममता बनर्जी के नेतृत्व में अच्छी काम कर रही है, पश्चिम बंगाल प्रगति के क्षेत्र में अग्रसर है।