-समाज में दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर और सहयोग बढ़ाना हमारी प्राथमिकता है: अमिताभ सुकुल
-दिव्यांग बच्चों को पहचान कर स्वावलंबन की राह दिखाने वाली माओं को मंच पर किया गया सम्मानित
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। विश्व दिव्यांगता दिवस 2025 के अवसर पर भागीरथ सेवा संस्थान द्वारा संचालित कैमकुस कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन, बी-ब्लॉक सेक्टर 23, संजयनगर में मंगलवार को एक गरिमामयी एवं भावनात्मक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस वर्ष समारोह की थीम- ‘सामाजिक प्रगति के लिए दिव्यांगता समावेशी समाज को बढ़ावा देने पर चर्चा’ – समाज में समान अवसर, संवेदनशीलता और न्यायपूर्ण भागीदारी को बढ़ावा देने पर केंद्रित रही। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जिला दिव्यांगजन सशक्तिकरण अधिकारी अंशुल चौहान उपस्थित रहे। उनके स्वागत में भागीरथ सेवा संस्थान के निदेशक अमिताभ सुकुल ने स्मृति चिह्न भेंट किया। कार्यक्रम में भागीरथ पब्लिक स्कूल के छात्र-छात्राओं ने भी उत्साहपूर्वक सहभागिता की। विशेषज्ञों ने दिव्यांगजनों के अधिकार, उनके लिए आवश्यक सहयोगी वातावरण, समावेशी शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं, रोजगार अवसरों एवं सामाजिक सहभागिता में आने वाली चुनौतियों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने यह भी कहा कि समाज तभी प्रगतिशील माना जा सकता है, जब वह दिव्यांगजनों के लिए समान अवसर, संवेदना और समर्थन सुनिश्चित करे।
कार्यक्रम में छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और विशेषज्ञों के बीच समूह चर्चा आयोजित की गई, जिसमें एक समावेशी और न्यायसंगत समाज निर्माण के उपायों पर गंभीरता से विचार हुआ। अभिभावकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि समय पर जागरूकता, सही मार्गदर्शन और सहयोग से दिव्यांग बच्चों के जीवन में कितना बड़ा सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है। मुख्य अतिथि अंशुल चौहान ने दिव्यांगजनों और उनके परिवारों के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं, सहायताओं और अधिकारों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अभिभावकों को अपने बच्चे की जिम्मेदारी के साथ-साथ समाज में जागरूकता फैलाने की भी भूमिका निभानी चाहिए।
इस अवसर पर विशेष शिक्षकों ने दिव्यांग बच्चों के साथ कार्य करते समय आने वाली चुनौतियों और उनके व्यावहारिक समाधान साझा किए। कार्यक्रम की मुख्य आकर्षण बनीं वे माताएं, जिन्होंने अपने दिव्यांग बच्चों को पहचानने, समझने और उन्हें स्वावलंबन की राह पर आगे बढ़ाने के लिए अप्रतिम प्रयास किए। एक ऑटिस्टिक बच्चे की मां नम्रता पाठक ने मंच से कहा कि मैं अपने बच्चे की प्राउड मदर हूँ। उसने मुझे वह पहचान दिलाई जो मैं अपनी शिक्षा और नौकरी से भी नहीं कमा सकी। उनका 17 वर्षीय बच्चा राष्ट्रीय स्तर का स्केट्स खिलाड़ी है।
एक अन्य मां करिश्मा चौधरी ने बताया कि उन्होंने बच्चे के विशेष होने को स्वीकार करते हुए अपनी नौकरी छोड़ दी और पूरे समर्पण से उसके विकास में जुट गईं। उनका बच्चा, जो ढाई साल की उम्र तक कुछ भी नहीं बोलता था, अब पाँच साल की उम्र में आत्मविश्वास के साथ सबके सामने संवाद करता है। करिश्मा अब अन्य विशेष बच्चों की सहायता के लिए विशेष शिक्षा का कोर्स भी कर रही हैं। ऐसे अनेक भावनात्मक अनुभवों ने उपस्थित लोगों को यह संदेश दिया कि विशेष बच्चे बोझ नहीं, बल्कि विशेष जिम्मेदारी हैं। उन्हें स्वीकार कर उनकी जरूरत के अनुसार काम किया जाए तो वे असाधारण सफलता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम का संचालन महेश्वरी चौधरी, कोऑर्डिनेटर, कैमकुस कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन ने किया। समारोह के अंत में उन माओं को मंच पर बैठाकर सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने दिव्यांग बच्चों को समय रहते पहचानकर, मेहनत और धैर्य के साथ उन्हें स्वावलंबी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।विश्व दिव्यांगता दिवस का यह कार्यक्रम न केवल प्रेरणा और जागरूकता का माध्यम बना बल्कि समाज को संवेदना, सहयोग और समावेशिता की राह पर आगे बढऩे का महत्वपूर्ण संदेश भी दे गया।
















