-अपनों से उपेक्षित बुजुर्गों के लिए भोजन और आश्रय, बुजुर्गों के बीच पहुंच कर कराया भोजन
-धर्म का सच्चा संदेश: जरूरतमंदों की मदद ही पुण्य है
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गोर्वधन पर्व के मौके पर दुहाई क्षेत्र में वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के लिए बुधवार को श्री राम वेद सेवा संस्थान (एसआरवीएसएस) ने एक नई पहल की शुरुआत की। संस्था के पदाधिकारी आशीष गौतम और तनूजा ने वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों को भोजन कराया और उनकी आवश्यकताओं का ध्यान रखने की प्रतिबद्धता जताई। इन बुजुर्गों में अधिकांश वे लोग हैं जिन्हें उनके ही बच्चे तिरस्कार कर घर से अलग कर चुके हैं, वहीं कुछ बुजुर्ग अपनी इच्छा से आश्रम में रह रहे हैं। हालांकि इससे पूर्व भी संस्था द्वारा गरीबों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया गया है। आशीष गौतम ने बताया कि समाज में बुजुर्गों की स्थिति अक्सर उपेक्षित रहती है। परिवार की अपेक्षाओं और बच्चों की असंवेदनशीलता के कारण बुजुर्ग अकेले और भूखे रह जाते हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से संस्था ने यह संदेश देने की कोशिश की कि बुजुर्ग समाज का अमूल्य हिस्सा हैं और उनकी सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य है।
संस्था के पदाधिकारी आशीष गौतम ने बताया कि आज लोग धर्म के नाम पर लंबी तीर्थ यात्राएं करते हैं, मंदिर-मस्जिद-गुरुद्वारा में दान करते हैं, यज्ञ और अन्य संस्कारों का आयोजन करते हैं। लेकिन असली पुण्य तभी प्राप्त होता है जब हम जरूरतमंदों और समाज के कमजोर वर्ग की सहायता करें। उन्होंने कहा कि वृद्धाश्रम के बुजुर्गों की देखभाल करना केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि धर्म और मानवता की सेवा भी है। एसआरवीएसएस की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि बुजुर्ग केवल अनुभव के भंडार हैं और उनका सम्मान करना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। संस्था का मानना है कि बुजुर्गों की सेवा करने से न केवल समाज में भाईचारा और मानवता का संदेश फैलता है, बल्कि युवा पीढ़ी भी उनके अनुभव और मार्गदर्शन से सीखती है। कार्यक्रम में बुजुर्गों को भोजन कराए जाने के अलावा, संस्था ने उनके लिए स्वास्थ्य जांच और आवासीय सुविधा सुनिश्चित करने की भी योजना बनाई है। आशीष गौतम ने कहा कि बुजुर्गों के साथ-साथ समाज के अन्य जरूरतमंद वर्ग की मदद करना भी संस्था की प्राथमिकता में शामिल है।
बुजुर्ग बोझ नहीं, आशीर्वाद हैं
संस्था की सदस्य तनूजा ने कहा कि संयुक्त परिवार का स्थान एकल परिवार ने ले लिया है, जिससे बुजुर्गों को बच्चों और परिवार से दूर रहना पड़ रहा है। उनके अनुभव और मार्गदर्शन को युवा पीढ़ी में महत्व नहीं दिया जाता, जिससे बुजुर्ग अकेलेपन और उपेक्षा का शिकार होते हैं। तनूजा ने स्पष्ट किया कि बुजुर्गों को बूढ़ा कहकर वृद्धाश्रम में छोड़ देना अनुचित है। उनका कहना है कि बुजुर्ग समाज के लिए आशीर्वाद हैं, और उनके अनुभव और ज्ञान को सम्मान और आदर के साथ ग्रहण करना चाहिए।
भूख और उपेक्षा से राहत: वृद्धाश्रम का उद्देश्य
एसआरवीएसएस ने इस सेवा पहल का उद्देश्य बुजुर्गों को भूख और उपेक्षा से मुक्त जीवन देना बताया। संस्था के पदाधिकारी आशीष गौतम और तनूजा का कहना है कि यदि समाज में इस तरह के प्रयास निरंतर होते रहें, तो कोई भी व्यक्ति भूखा या अकेला नहीं रहेगा। बुजुर्गों की सेवा समाज के लिए सबसे बड़ा पुण्य और नैतिक जिम्मेदारी है।
निरंतर सामाजिक सेवा और शिक्षा का समर्थन
संस्था ने भविष्य में भी ऐसे ही सामाजिक कार्यों को जारी रखने का संकल्प लिया है। आशीष गौतम ने कहा कि वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्गों के स्वास्थ्य, भोजन और रहन-सहन पर लगातार ध्यान रखा जाएगा। तनूजा ने यह भी बताया कि संस्था न केवल बुजुर्गों की देखभाल करेगी, बल्कि उन्हें शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी देने में भी मदद करेगी। इसका उद्देश्य बुजुर्गों को जीवन में सम्मानपूर्ण स्थान दिलाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
समाप्ति: बुजुर्गों की सेवा ही सबसे बड़ा पुण्य
संस्था द्वारा इस सेवा के माध्यम से यह संदेश स्पष्ट हुआ कि बुजुर्ग बोझ नहीं, बल्कि आशीर्वाद हैं। उनके अनुभव और मार्गदर्शन से समाज और युवा पीढ़ी दोनों लाभान्वित होती हैं। एसआरवीएसएस का प्रयास है कि बुजुर्गों के लिए सुरक्षित, सम्मानपूर्ण और खुशहाल जीवन सुनिश्चित किया जाए। संस्था के पदाधिकारी आशीष गौतम और तनूजा ने सभी नागरिकों से अपील की कि वे भी समाज में बुजुर्गों की देखभाल करें और उनके अनुभव और ज्ञान को महत्व दें। उनका कहना है कि बुजुर्गों की सेवा सबसे बड़ा पुण्य है और यदि समाज में इस दिशा में प्रयास बढ़े, तो कोई भी व्यक्ति भूखा या अकेला नहीं रहेगा।


















