एक्शन मोड में नोएडा सीईओ कृष्णा करुणेश, अफसरों के विभाग बदले

कामकाज बेहतर करने के लिए सीईओ ने बड़ा लिया फैसला हैं। विभागों की समीक्षा करके जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए। सीईओ कृष्णा करुणेश ने विभागों में बड़े स्तर पर बदलाव कर सफाई और बुनियादी व्यवस्थाओं में सुधार का बिगुल फूँक दिया है। सफाई, जल और सिविल विभागों में जिम्मेदारी बंटवारे के साथ नए कार्य प्रणाली की शुरुआत हो गई है। सड़क, सीवर, अतिक्रमण और कम्युनिटी टॉयलेट सुधार पर सख्त निर्देश दिए। कार्य में लापरवाह अधिकारियों के रिजल्ट पर सीईओ की निगरानी रहेगी। सीईओ ने शहर की बुनियादी सुविधाओं, सफाई व्यवस्था, सड़क, सीवर, जलापूर्ति और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करते हुए कई अहम निर्देश जारी किए। सीईओ ने बताया कि सर्वे के दौरान नोएडा क्षेत्र में लगभग 65 छोटे-बड़े असुरक्षित प्वाइंट्स चिन्हित किए गए हैं। 

उदय भूमि संवाददाता
नोएडा। नव नियुक्त सीईओ कृष्णा करुणेश एक्शन मोड में आ गए हैं। तेज तर्रार अधिकारी कामकाज को दुरुस्त करने के लिए बड़े स्तर पर विभागों में बदलाव किया है। साथ ही विभागों की समीक्षा भी शुरू कर दी है। वह हर हाल में अफसरों से रिजल्ट चाहते हैं। ताकि व्यवस्थाओं को और सुधारा जाए। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश ने सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए अधिकारियों के कामकाज में बड़ा बदलाव किया है। ओएसडी क्रांति शेखर और डीएम विजय रावल को सफाई व्यवस्था में लगाया गया है। ओएसडी को जल का भी जिम्मा दिया गया है। जल विभाग का प्रभारी अधिकारी भी ओएसडी क्रांति शिखर को बनाया गया है। दोनों विभाग में जीएम के ऊपर निगरानी करेंगे और सीईओ को सीधे रिपोर्ट करेंगे। सिविल में वर्क सर्किल एक से पांच का जिम्मा एसीईओ वंदना त्रिपाठी को दिया गया है। वंदना त्रिपाठी सिविल के अलावा ग्रुप हाउसिंग, उद्यान, संस्थागत आदि का प्रभार देखेंगी। वर्क सर्किल 6 से 10 का कामकाज पहले की तरह ही एसीईओ सतीश पाल के पास रखा गया है। सिविल के अलावा उनके पास स्पोर्ट्स सिटी, विद्युत यांत्रिक, नियोजन, औद्योगिक विभाग का भी प्रभाव रहेगा।

नोएडा प्राधिकरण के नए मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्ण करुणेश ने प्राधिकरण के सभी विभागों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा बैठक कर चुके हैं। बैठक के दौरान सीईओ ने शहर की बुनियादी सुविधाओं, सफाई व्यवस्था, सड़क, सीवर, जलापूर्ति और अतिक्रमण से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा करते हुए कई अहम निर्देश जारी किए। सीईओ ने बताया कि सर्वे के दौरान नोएडा क्षेत्र में लगभग 65 छोटे-बड़े असुरक्षित प्वाइंट्स चिन्हित किए गए हैं। इनमें से जिन बिंदुओं पर प्राधिकरण को सीधे कार्रवाई करनी है, उन्हें एक सप्ताह के भीतर दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, अन्य विभागों से संबंधित बिंदुओं पर 20 फरवरी तक नोटिस जारी कर प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण कराने के आदेश दिए गए। उन्होंने कहा कि नोएडा में कई सड़कें ऐसी हैं जिन पर पिछले 4-5 वर्षों से ब्लैक टॉप नहीं हुआ है और सड़क की सतह खराब हो चुकी है। ऐसे सभी मार्गों का आकलन कर मार्च के पहले सप्ताह से मरम्मत कार्य शुरू कराने के निर्देश दिए गए हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर के नालियों में बहने की समस्या को गंभीर मानते हुए 10 दिनों के भीतर सभी औपचारिकताएं पूरी कर ईओआई आमंत्रित करने के निर्देश दिए गए। इसके साथ ही, वर्तमान में किसी एजेंसी द्वारा कम्युनिटी टॉयलेट का रखरखाव न होने पर नाराजगी जताते हुए एक सप्ताह में बोट मॉडल के माध्यम से टेंडर जारी कर सभी टॉयलेट का संचालन सुनिश्चित करने को कहा गया। सीईओ ने अवरुद्ध लेफ्ट टर्न की समस्या पर भी सख्त रुख अपनाते हुए एक माह के भीतर निविदा प्रक्रिया पूरी कर उन्हें सुचारू कराने के निर्देश दिए। सफाई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जन स्वास्थ्य विभाग में सेनेटरी इंस्पेक्टरों की कमी को देखते हुए जेम पोर्टल के माध्यम से 20 सेनेटरी इंस्पेक्टरों की नियुक्ति के आदेश दिए गए।

अवैध रेहड़ी-पटरी और अतिक्रमण पर निरंतर कार्रवाई करने, लाइसेंसधारी वेंडरों को निर्धारित वेंडिंग जोन में ही स्थापित करने तथा हर वर्क सर्किल को एक-एक जेसीबी और डंपर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जल विभाग को गांवों में सीवर ओवरफ्लो की स्थायी समस्या के समाधान के लिए 12 गांवों में संपवेल निर्माण के निर्देश दिए गए। साथ ही गिझौड़, सर्फाबाद और ममूरा में बढ़ती आबादी को देखते हुए नए भूमिगत जलाशयों के निर्माण की प्रक्रिया तेज करने को कहा गया। बैठक के अंत में सीईओ ने स्पष्ट किया कि कार्यों में लापरवाही या शिथिलता किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।