अब जाम नहीं, अनुशासन बनेगा गाजियाबाद की पहचान, अब गलती नहीं, लापरवाही कहलाएगी अपराध

-पुलिस कमिश्नरेट की हाईटेक प्लानिंग से बदलेगा ट्रैफिक का सिस्टम, जनता को मिलेगी राहत
-अब हर चौराहे पर दिखेगा अनुशासन और स्मार्ट व्यवस्था, ट्रैफिक सिस्टम को मिली टर्बो स्पीड

उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। सड़कों पर अब यातायात का चेहरा पूरी तरह बदलने जा रहा है। कमिश्नरेट गाजियाबाद ने ट्रैफिक व्यवस्था को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से एक विस्तृत और दूरदर्शी कार्ययोजना लागू की है। पुलिस आयुक्त जे. रविन्द्र गौड़ के निर्देशानुसार तैयार की गई इस कार्ययोजना की जानकारी अपर पुलिस आयुक्त (अपराध एवं कानून व्यवस्था) आलोक प्रियदर्शी ने सोमवार को पुलिस लाइन्स स्थित कैंप कार्यालय में एडीसीपी ट्रैफिक सच्चिदानंद की मौजूदगी में प्रेसवार्ता के दौरान बताया कि गाजियाबाद में अब यातायात केवल सिग्नलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह एक अनुशासित व्यवस्था का हिस्सा बनेगा, जिसमें तकनीक, प्रशिक्षण और जनसहयोग की त्रिस्तरीय भागीदारी होगी। शहर को तीन ट्रैफिक जोन और नौ सब-जोनों में विभाजित कर दिया गया है। प्रत्येक जोन की निगरानी सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे, जबकि सब-जोनों की जिम्मेदारी यातायात निरीक्षक स्तर के अधिकारियों को दी गई है। अब कुल 216 ड्यूटी पॉइंट्स होंगे, जहां पर 135 उपनिरीक्षक और 9 निरीक्षक प्रतिदिन सड़कों पर मौजूद रहेंगे। यह पूरी व्यवस्था दो शिफ्टों में चलेगी दिवसीय और रात्रिकालीन, जिससे चौबीसों घंटे यातायात नियंत्रण बना रहेगा।

शहर में 20 स्मार्ट ट्रैफिक बूथ बनाए जा रहे हैं, जो सीसीटीवी, वायरलेस कम्युनिकेशन और मॉनिटरिंग सुविधाओं से युक्त होंगे। इसके अलावा प्रत्येक निरीक्षक के लिए कार्यालय निर्माण की कार्यवाही भी जारी है, जिसमें एनएचएआई, नगर निगम और जीडीए का समन्वय लिया जा रहा है। इन स्मार्ट बूथों से फील्ड में तैनात अधिकारियों की कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। उन्होंने बताया नई व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव तकनीकी स्तर पर दिखाई देगा। गाजियाबाद में अब  एआई आधारित स्वचालित चालान प्रणाली लागू की जाएगी। इसके लिए कमिश्नरेट कार्यालय में एक हाईटेक कंट्रोल रूम की स्थापना की जा रही है, जहां से पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की रीयल टाइम निगरानी होगी। चालान, ओवरस्पीडिंग, रॉन्ग साइड, नो हेलमेट, नो सीट बेल्ट जैसे नियम उल्लंघनों पर स्वचालित कार्यवाही की जाएगी।
अपर पुलिस आयुक्त आलोक प्रियदर्शी ने बताय कि महिला सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सभी ऑटो और ई-रिक्शा को यूनिक रूट नंबर और अलग-अलग रंग कोड दिए जाएंगे। इस व्यवस्था का डेटा यातायात कार्यालय में रखा जाएगा, जिससे किसी भी संदिग्ध स्थिति में वाहन की ट्रेसिंग कुछ ही मिनटों में संभव होगी।

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध अब और अधिक सख्ती बरती जाएगी। बार-बार नियम तोडऩे वालों की आरसी और डीएल को निलंबित करने की कार्यवाही जारी है। साथ ही बिना मानकों के संचालित स्कूल बसों, वैनों और ई-रिक्शाओं पर विशेष अभियान चलाया जाएगा। एनजीटी के निर्देशों के अनुसार 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को जब्त करने की कार्रवाई भी लगातार की जा रही है। शहर के महत्वपूर्ण मार्गों पर दुर्घटनाओं में कमी लाने हेतु गाजियाबाद ट्रैफिक पुलिस, एनएचएआई के सहयोग से सड़क सुधार कार्यों को भी अंजाम दे रही है। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे और एनएच-09 पर सभी अंडरपासों पर रिफ्लेक्टिव साइनेज बोर्ड लगाए जा रहे हैं, वहीं यूपी गेट से डासना तक लोहे की रेलिंग लगाई जा रही है। आवश्यकतानुसार रात्रि के समय प्रकाश व्यवस्था और रम्बल स्ट्रिप्स की भी व्यवस्था कराई जा रही है। विपरीत दिशा में चलने वाले वाहन चालकों पर कार्यवाही के लिए सीसीटीवी कैमरों की स्थापना की जा रही है, जिससे नियम उल्लंघन पर तुरंत चालान जारी हो सके।

एडीसीपी ट्रैफिक सच्चिदानंद ने बताया कि शहर की सड़कों पर बेहतर ट्रैफिक प्रवाह के लिए अनाधिकृत पार्किंग स्थलों, टैक्सी स्टैंडों और बस स्टॉप्स को चिन्हित कर उन पर नियंत्रण की योजना लागू की जा रही है। इसके साथ-साथ जब्त वाहनों के लिए जोन स्तर पर समर्पित पार्किंग स्थलों की भी व्यवस्था की जा रही है। मल्टीलेवल पार्किंग के लिए नगर निगम और जीडीए के साथ मिलकर जगहों की पहचान की जा रही है, जिससे मुख्य बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अवैध पार्किंग की समस्या खत्म हो सके। ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित प्रशिक्षण देकर उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है ताकि वे बेहतर ढंग से डिजिटल और फील्ड कार्यों का समन्वय कर सकें। साथ ही सभी गलत और खतरनाक कट्स की पहचान कर उन्हें बंद किया जा रहा है और उनकी जगह यूटर्न की सुविधा विकसित की जा रही है। अपर पुलिस आयुक्त आलोक प्रियदर्शी ने कहा कि यह कार्ययोजना केवल सड़कों की नहीं, सोच की मरम्मत है। यह ट्रैफिक व्यवस्था को केवल नियंत्रित करने की नहीं, बल्कि नागरिकों को सुरक्षित और सुविधाजनक अनुभव देने की दिशा में उठाया गया क्रांतिकारी कदम है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस परिवर्तनकारी पहल से गाजियाबाद की यातायात व्यवस्था पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बनेगी।

सड़क सुधार के लिए एनएचएआई के साथ मिलकर कई नए कदम
• दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे और एनएच-09 पर सभी अंडरपासों पर रिफ्लेक्टिव साइनेज बोर्ड
• यूपी गेट से डासना तक लोहे की रेलिंग
• अतिरिक्त एम्बुलेंस, रिकवरी वैन और पेट्रोलिंग वाहन तैनात
• रॉन्ग साइड चालकों पर कार्रवाई हेतु सीसीटीवी कैमरे
• रात्रि में समुचित प्रकाश व्यवस्था और आवश्यकतानुसार रम्बल स्ट्रिप्स

जन-जागरूकता को अभियान का आधार बनाया जाएगा
• स्कूल-कॉलेजों, बाजारों और चौराहों पर वृहद जागरूकता कार्यक्रम
• ट्रॉमा सेंटर, अस्पतालों और एम्बुलेंस नंबरों का प्रचार-प्रसार
• ट्रैफिक पुलिस कर्मियों को नियमित प्रशिक्षण, ताकि वे तकनीकी और सामाजिक रूप से अधिक सक्षम हो सकें।

पार्किंग और रूट प्लानिंग में भी सुधार की तैयारी
• अनाधिकृत पार्किंग स्थलों, बस-टैक्सी स्टैंडों की पहचान कर वहां पर नियंत्रण की योजना
• मल्टीलेवल पार्किंग के लिए जगह चिन्हित करने की प्रक्रिया नगर निगम और जीडीए के साथ मिलकर जारी
• जब्त वाहनों के लिए समर्पित जोनल पार्किंग की योजना अंतिम चरण में

सख्ती भी उतनी ही जरूरी: आरसी/डीएल सस्पेंड, स्कूल वैन चेकिंग, पुरानी गाडिय़ाँ जब्त
• बार-बार ट्रैफिक नियम तोड़ने वालों की आरसी और डीएल निलंबित करने के लिए रिपोर्ट भेजी जा रही है।
• बिना फिटनेस और मानक के चलने वाली स्कूल बसों, वैनों, ई-रिक्शा पर सख्त अभियान जारी।
• एनजीटी के निर्देशों के अनुसार 10 साल से अधिक पुराने डीजल और 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल वाहनों को जब्त किया जा रहा है।