-ऑनलाइन व्यवस्था से आवंटियों को बड़ी राहत, घर बैठे मिल रही सुविधाएं
-उपाध्यक्ष अतुल वत्स की डिजिटल पहल से राजस्व में उछाल, 3381 आवंटियों ने किया ऑनलाइन भुगतान
उदय भूमि संवाददाता
गाजियाबाद। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण (जीडीए) की ओर से हाल ही में शुरू किए गए ‘पहल’ पोर्टल ने रिकॉर्ड तोड़ सफलता हासिल की है। डिजिटल इंडिया के इस दौर में जीडीए ने तकनीक का भरपूर लाभ उठाते हुए न केवल आवंटियों की सुविधा को प्राथमिकता दी, बल्कि राजस्व वृद्धि की दिशा में भी मजबूत कदम उठाया है। अप्रैल से लेकर अब तक पहल पोर्टल के जरिए 3381 आवंटियों ने अपनी बकाया धनराशि का ऑनलाइन भुगतान कर जीडीए के खाते में 100 करोड़ रुपये से अधिक की राशि जमा कराई है। यह रकम विभिन्न योजनाओं और मदों से प्राप्त हुई है, जिससे जीडीए की वित्तीय स्थिति को मजबूत आधार मिला है। इस पोर्टल की शुरुआत जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स के नेतृत्व में इसी वित्तीय वर्ष में की गई थी। उपाध्यक्ष की रणनीतिक और दूरदर्शी सोच के चलते यह तकनीकी प्रयास आज एक सफल मॉडल के रूप में सामने आया है। जीडीए की विभिन्न आवासीय योजनाओं के आवंटी अब पहल पोर्टल के जरिए न केवल अपनी बकाया किस्तों का भुगतान कर रहे हैं, बल्कि रजिस्ट्री स्लॉट बुकिंग, नो ड्यूज सर्टिफिकेट, संपत्ति म्यूटेशन, और अन्य जरूरी सेवाएं भी घर बैठे हासिल कर पा रहे हैं। पोर्टल से अब तक 7452 से अधिक आवंटी जुड़ चुके हैं, जिसमें सबसे अधिक सक्रियता मधुबन-बापूधाम योजना के आवंटियों की रही है। यहां के 1736 आवंटियों ने पोर्टल के जरिए किस्तें जमा कराई हैं, जो यह दर्शाता है कि पोर्टल पर लोगों का विश्वास बढ़ा है।
गाजियाबाद की प्रमुख योजनाएं जैसे इंदिरापुरम, स्वर्णजयंतीपुरम, प्रताप विहार, वैशाली, इंद्रप्रस्थ, गोविंदपुरम, कर्पूरीपुरम, और चंद्रशिला अपार्टमेंट जैसी कॉलोनियों के आवंटी भी अब इस सेवा का लाभ ले रहे हैं। इन क्षेत्रों के आवंटियों ने नियमित रूप से ऑनलाइन बैंकिंग के माध्यम से भुगतान कर प्रशासन को डिजिटल दिशा में आगे बढ़ाने में सहयोग किया है। खास बात यह है कि जीडीए ने इस पोर्टल को यूजर फ्रेंडली बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। जैसे ही कोई आवंटी अपनी किस्त का भुगतान करता है, उसे यह जानकारी तुरंत मिल जाती है कि अब उसकी कितनी राशि शेष है और अगली किस्त कब देनी है। इससे पारदर्शिता तो आई ही है, साथ ही आवंटियों को योजना संबंधी भ्रम से भी छुटकारा मिला है।
जीडीए ने इस पोर्टल की पहुंच और प्रभावशीलता को और बढ़ाने के लिए अपने कार्यालय परिसर में विशेष हेल्प डेस्क की भी स्थापना की है, जहां प्रशिक्षित स्टाफ तैनात किया गया है। आवंटियों की समस्याओं का मौके पर समाधान किया जा रहा है। पोर्टल की विशेषताओं में यह भी शामिल है कि यदि किसी आवंटी की रजिस्ट्री होनी है तो वह स्लाट बुकिंग से लेकर दस्तावेज अपलोड तक की प्रक्रिया घर बैठे पूरी कर सकता है। यही नहीं, हाल ही में एक आवंटी को आवंटन पत्र ई-मेल के जरिए उपलब्ध कराकर जीडीए ने स्पष्ट कर दिया कि वह पूरी तरह डिजिटल रूपांतरण की ओर बढ़ चुका है। इस सफल डिजिटल पहल से साफ है कि गाजियाबाद विकास प्राधिकरण पारंपरिक व्यवस्था से बाहर निकलकर अब तकनीकी दक्षता की राह पर मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह पोर्टल आने वाले समय में न केवल जीडीए की छवि को निखारेगा बल्कि अन्य शहरी प्राधिकरणों के लिए भी एक आदर्श मॉडल प्रस्तुत करेगा। उपाध्यक्ष अतुल वत्स की यह डिजिटल पहल अब गाजियाबाद के लिए एक नई पहचान बनती जा रही है।
डिजिटल इंडिया की राह पर जीडीए की मजबूती
जीडीए उपाध्यक्ष अतुल वत्स की सोच और तकनीकी समझ का ही परिणाम है कि यह पोर्टल न केवल जीडीए के राजस्व में इजाफा कर रहा है, बल्कि आवंटियों को भी बड़ी सहूलियत प्रदान कर रहा है। इस वित्तीय वर्ष में लागू किए गए पोर्टल से अब तक 7452 आवंटी जुड़ चुके हैं, जिनमें से सबसे अधिक 1736 आवंटी मधुबन-बापूधाम योजना से हैं।
राजस्व पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता की नई मिसाल
गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की यह डिजिटल पहल राजस्व पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और तकनीकी दक्षता की मिसाल बन रही है। जीडीए अब अपने सभी संपत्ति संबंधी कार्यों को पेपरलेस और ऑनलाइन फ्रेंडली बनाने की दिशा में तेज़ी से अग्रसर है।
















